छत्तीसगढ़ में डिजिटल क्रांति: जनगणना 2027 का शंखनाद, 51 हजार कर्मचारी संभाल रहे हैं मोर्चा

रायपुर 3 जून | छत्तीसगढ़ में आधुनिक तकनीक के साथ विकास की नई इबारत लिखने की तैयारी शुरू हो गई है। ‘भारत की जनगणना 2027’ के प्रथम चरण का आगाज राज्य में 1 मई से हो चुका है। इस बार की जनगणना अपनी खास ‘डिजिटल पद्धति’ के कारण चर्चा में है, जो न केवल डेटा की शुद्धता सुनिश्चित करेगी बल्कि भविष्य की योजनाओं के लिए सटीक आधार भी तैयार करेगी।

30 मई तक चलेगा मकान सूचीकरण का महाभियान

जनगणना के इस प्रथम चरण में मुख्य रूप से ‘मकान सूचीकरण’ और ‘मकानों की गणना’ का कार्य किया जा रहा है। 1 मई से शुरू हुआ यह सघन अभियान 30 मई 2026 तक पूरे राज्य में चलेगा। इस दौरान हर गली, मोहल्ले और सुदूर वनांचलों तक प्रशासन की पहुँच सुनिश्चित की जा रही है।

51 हजार ‘डिजिटल सिपाहियों’ की फौज तैनात

इस विशाल कार्य को समय सीमा में पूरा करने के लिए राज्य सरकार और जनगणना कार्य निदेशालय ने कमर कस ली है। पूरे छत्तीसगढ़ में:

  • 51,300 प्रगणक (Enumerators): घर-घर जाकर जानकारी जुटा रहे हैं।
  • 9,000 पर्यवेक्षक (Supervisors): मैदानी स्तर पर कार्य की गुणवत्ता और डेटा की मॉनिटरिंग कर रहे हैं।

ये कर्मचारी मोबाइल ऐप के जरिए रियल-टाइम डेटा एंट्री कर रहे हैं, जिससे कागजी कार्रवाई का बोझ कम हुआ है और पारदर्शिता बढ़ी है।

पहली बार ‘डिजिटल मोड’ में जनगणना: क्या होगा खास?

छत्तीसगढ़ के इतिहास में यह पहली बार है जब जनगणना पूरी तरह से डिजिटल मोड में हो रही है। इसकी कुछ प्रमुख विशेषताएं इस प्रकार हैं:

  1. सटीक डेटा: मैन्युअल एंट्री में होने वाली गलतियों की संभावना अब नगण्य होगी।
  2. त्वरित विश्लेषण: डिजिटल डेटा होने के कारण केंद्र और राज्य सरकार को सांख्यिकीय रिपोर्ट जल्द प्राप्त होगी।
  3. गोपनीयता: एकत्र की गई जानकारी पूरी तरह सुरक्षित रहेगी और इसका उपयोग केवल सांख्यिकीय उद्देश्यों के लिए किया जाएगा।

आम जनता से सहयोग की अपील

प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि जब प्रगणक उनके घर पहुँचें, तो उन्हें सही और सटीक जानकारी उपलब्ध कराएं। मकान का नंबर, उपयोग (आवासीय या व्यावसायिक) और उपलब्ध सुविधाओं से संबंधित जानकारी साझा करना राष्ट्र निर्माण में एक बड़ा योगदान है।

छत्तीसगढ़ में इस डिजिटल शंखनाद के साथ ही विकास की नई रूपरेखा तैयार होने जा रही है, जो आने वाले दशकों में प्रदेश की नीति निर्धारण में मील का पत्थर साबित होगी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *