गौरेला-पेन्ड्रा-मरवाही, 03 मई 2026 | छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा प्रदेश में सुशासन को जमीनी स्तर पर उतारने के लिए आयोजित किया जा रहा ‘सुशासन तिहार’ आम जनता की उम्मीदों का नया सवेरा बन गया है। शासन की इस पहल से न केवल दफ्तरों की दूरी कम हुई है, बल्कि वर्षों से लंबित समस्याओं का मौके पर ही निराकरण हो रहा है। हाल ही में मरवाही विकासखंड के ग्राम पंचायत सेमरदर्री में आयोजित शिविर में एक ऐसी ही सुखद तस्वीर सामने आई, जहाँ किसान भवन सिंह की वर्षों पुरानी चिंता का अंत हुआ।
सरकारी दफ्तरों के चक्करों से मिली मुक्ति
किसान भवन सिंह पिछले कई वर्षों से अपनी जमीन की ‘किसान किताब’ (ऋण पुस्तिका) बनवाने के लिए परेशान थे। सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने और दस्तावेजों की कमी के कारण उनका काम अटका हुआ था। एक छोटे किसान के लिए खेती-किसानी के कामों और खाद-बीज के लिए किसान किताब का होना अनिवार्य है, जिसके अभाव में उन्हें काफी आर्थिक और मानसिक दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा था।

भवन सिंह बताते हैं, “मुझे उम्मीद नहीं थी कि जिस काम के लिए मैं सालों से भटक रहा था, वह गाँव में ही आयोजित एक शिविर में मिनटों में हो जाएगा। सुशासन तिहार ने मेरे जैसे कई ग्रामीणों की मुश्किलों को आसान कर दिया है।”
मौके पर हुआ समाधान, खिले चेहरे
सेमरदर्री में आयोजित इस विशेष शिविर में राजस्व विभाग की टीम ने भवन सिंह के आवेदन पर त्वरित कार्रवाई की। दस्तावेजों के तत्काल सत्यापन के बाद उन्हें मौके पर ही ‘किसान किताब’ सौंप दी गई। अपनी वर्षों पुरानी समस्या का समाधान अपनी ही पंचायत में होता देख भवन सिंह की आँखों में खुशी के आँसू छलक आए। उन्होंने राज्य सरकार और जिला प्रशासन का आभार जताते हुए इसे ‘असली सुशासन’ बताया।
सुशासन तिहार: गाँव-गाँव पहुँच रहा प्रशासन
गौरेला-पेन्ड्रा-मरवाही जिले के दूरस्थ अंचलों में रहने वाले ग्रामीणों के लिए यह शिविर किसी वरदान से कम साबित नहीं हो रहे हैं। जिला प्रशासन द्वारा मुख्यमंत्री के निर्देशानुसार इन शिविरों के माध्यम से शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ सीधे हितग्राहियों तक पहुँचाया जा रहा है।
शिविर में केवल राजस्व ही नहीं, बल्कि स्वास्थ्य, कृषि, महिला एवं बाल विकास और पंचायत विभाग से जुड़ी समस्याओं का भी निराकरण किया जा रहा है। प्रशासन का यह ‘ऑन द स्पॉट’ समाधान मॉडल ग्रामीणों के बीच विश्वास का नया सेतु बन गया है।
भरोसे की नई इबारत
सेमरदर्री का यह उदाहरण यह बताने के लिए काफी है कि सुशासन केवल कागजों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आम नागरिकों के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रहा है। भवन सिंह जैसे अनगिनत लोग अब सुशासन तिहार के जरिए सरकारी व्यवस्था के साथ सम्मानजनक तरीके से जुड़ रहे हैं।
