“सत्ता का नया ठिकाना: जब एसी कमरों से निकलकर इमली की छाँव और खाट तक पहुँची सरकार”

सुकमा | 7 मई 2026

सुशासन की नई मिसाल: जब इमली के पेड़ के नीचे खाट पर बैठी सरकार, सुदूर गोंडेरास और नीलावाया तक पहुँचा प्रशासन

छत्तीसगढ़ सरकार के ‘सुशासन तिहार 2026’ अभियान के तहत विकास की बयार अब केवल कागजों और दफ्तरों तक सीमित नहीं है, बल्कि राज्य के सबसे दुर्गम वनांचलों तक पहुँच रही है। इसी कड़ी में बुधवार को सुकमा जिला प्रशासन ने संवेदनशीलता और कर्तव्यपरायणता की एक अनूठी मिसाल पेश की, जब जिले के आला अधिकारी वीआईपी प्रोटोकॉल छोड़कर सीधे ग्रामीणों के बीच उनके घर पहुँचे।

30 किमी का दुर्गम सफर: बाइक पर सवार होकर पहुँचे कलेक्टर-एसपी

पहुँचविहीन ग्राम गोंडेरास और नीलावाया पहुँचने के लिए कलेक्टर श्री अमित कुमार और पुलिस अधीक्षक श्री किरण चव्हाण ने किसी लग्जरी गाड़ी का नहीं, बल्कि मोटरसाइकिल का सहारा लिया। दुर्गम पहाड़ियों, उबड़-खाबड़ रास्तों और घने जंगलों के बीच 30 किलोमीटर का चुनौतीपूर्ण सफर तय कर जब प्रशासन की टीम इन गांवों में पहुँची, तो ग्रामीण उन्हें अपने बीच पाकर दंग रह गए। अधिकारियों का यह अंदाज यह संदेश देने के लिए काफी था कि सरकार और जनता के बीच की दूरी अब खत्म हो रही है।

इमली के पेड़ के नीचे ‘जनता की अदालत’

गोंडेरास गांव में सुशासन का असली स्वरूप तब दिखा जब कोई आलीशान मंच या टेंट नहीं लगाया गया। कलेक्टर और एसपी ने गांव के एक पुराने इमली के पेड़ के नीचे बिछी साधारण खाट पर बैठकर ग्रामीणों से सीधा संवाद किया। ग्रामीणों ने अपनी समस्याएं खुलकर साझा कीं। जब सोलर प्लेट्स के खराब होने की शिकायत सामने आई, तो कलेक्टर ने मौके पर ही क्रेडा (CREDA) विभाग के अधिकारियों को निर्देशित किया कि तत्काल हर घर की मरम्मत सुनिश्चित की जाए।

70 लाख की सौगात और ग्रामीणों को ही जिम्मेदारी

गांव के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए प्रशासन ने बड़ी घोषणाएं कीं। आंगनबाड़ी केंद्र और पंचायत भवन जैसे आवश्यक निर्माण कार्यों के लिए 70 लाख रुपये की तत्काल स्वीकृति दी गई। खास बात यह रही कि इन कार्यों के क्रियान्वयन की जिम्मेदारी किसी बाहरी ठेकेदार के बजाय सीधे ग्राम पंचायत को सौंपी गई, ताकि स्थानीय लोगों को रोजगार मिले और कार्य की गुणवत्ता पर ग्रामीणों का नियंत्रण रहे।

मौके पर ही समस्याओं का समाधान

‘सुशासन तिहार’ शिविर के माध्यम से ग्रामीणों को सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने से मुक्ति मिली। शिविर में त्वरित कार्रवाई करते हुए निम्नलिखित लाभ दिए गए:

  • 17 किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) और 11 पीएम-किसान प्रकरणों का निराकरण।
  • 12 जाति प्रमाण पत्र और 2 किसान किताब का वितरण।
  • पटवारी प्रतिवेदन सहित अन्य महत्वपूर्ण राजस्व दस्तावेज मौके पर ही सौंपे गए।

विश्वास की नई किरण

जिला प्रशासन का यह दौरा केवल एक प्रशासनिक औपचारिकता नहीं, बल्कि व्यवस्था के प्रति जनता का विश्वास बहाल करने की एक गंभीर कोशिश है। सुशासन तिहार के माध्यम से 31 व्यक्तिगत योजनाओं और 14 सामुदायिक सुविधाओं को सीधे ग्रामीणों के द्वार तक पहुँचाया जा रहा है। कलेक्टर अमित कुमार के अनुसार, प्रशासन का लक्ष्य है कि अंतिम छोर पर बैठे व्यक्ति को भी अहसास हो कि सरकार उसके साथ खड़ी है।

इस संवेदनशीलता ने न केवल गोंडेरास और नीलावाया के ग्रामीणों के मन में बदलाव की उम्मीद जगाई है, बल्कि पूरे प्रदेश में सुशासन के मॉडल के रूप में एक नई चर्चा शुरू कर दी है।

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