वनांचल में घर-घर पहुंचेगा पानी: मुख्यमंत्री की पहल पर 113 योजनाएं स्वीकृत

रायपुर/सरगुजा 8 मई :

मुख्यमंत्री की पहल: सरगुजा के वनांचल में बुझेगी प्यास, 113 नई पेयजल परियोजनाओं को मिली मंजूरी

छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले के सुदूर वनांचलों और पहाड़ी क्षेत्रों में गहराते जल संकट को देखते हुए राज्य सरकार ने एक बड़ी राहतकारी योजना शुरू की है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के कड़े निर्देशों के बाद प्रशासन ने पहाड़ी कोरवा बस्तियों और दुर्गम इलाकों में शुद्ध पेयजल सुनिश्चित करने के लिए 113 नए हैंडपंप और बोरवेल स्थापित करने का निर्णय लिया है।

मुख्यमंत्री का सख्त निर्देश: अंतिम व्यक्ति तक पहुँचे सुविधा

हाल ही में अपने सरगुजा दौरे के दौरान मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने ग्रामीणों से चर्चा की थी, जिसमें पेयजल की समस्या प्रमुखता से उभरी थी। मुख्यमंत्री ने इसे गंभीरता से लेते हुए जिला कलेक्टर को स्पष्ट किया था कि वनांचल में रहने वाले ग्रामीण, विशेष रूप से ‘विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह’ (PVTG) जैसे पहाड़ी कोरवा, बुनियादी सुविधाओं से वंचित नहीं रहने चाहिए। उन्होंने निर्देश दिए थे कि सरकार की कल्याणकारी योजनाओं का लाभ कतार के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचना चाहिए।

DMF मद से स्वीकृत हुए कार्य

मुख्यमंत्री के निर्देशों पर त्वरित अमल करते हुए सरगुजा कलेक्टर और जिला खनिज संस्थान न्यास (DMF) के अध्यक्ष श्री अजीत वसंत ने प्रशासनिक मशीनरी को सक्रिय कर दिया है। इन सभी 113 परियोजनाओं के लिए जिला खनिज निधि (DMF) से बजट स्वीकृत किया गया है।

प्रशासन ने सभी संबंधित विभागों और जनपद पंचायत सीईओ को अल्टीमेटम दिया है कि खनन और स्थापना का यह कार्य एक माह के भीतर अनिवार्य रूप से पूर्ण कर लिया जाए। स्थलीय सर्वे का काम पहले ही पूरा किया जा चुका है।

ब्लॉकवार विस्तार: कहाँ लगेंगे कितने हैंडपंप?

सर्वेक्षण के आधार पर विभिन्न विकासखंडों में कार्यों का आवंटन इस प्रकार किया गया है:

  • लुण्ड्रा: 34 नए हैंडपंप
  • लखनपुर: 22 नए हैंडपंप
  • मैनपाट: 20 नए हैंडपंप
  • सीतापुर: 16 नए हैंडपंप
  • अंबिकापुर: 11 नए हैंडपंप
  • बतौली: 06 नए हैंडपंप
  • उदयपुर: 04 नए हैंडपंप

बदलेगी ग्रामीणों की जिंदगी

इस पहल का मुख्य उद्देश्य पहाड़ी क्षेत्रों में रहने वाले ग्रामीणों की पारंपरिक और असुरक्षित जल स्रोतों (झरिया, नाले) पर निर्भरता को कम करना है। भीषण गर्मी के इस मौसम में घरों के पास शुद्ध पेयजल उपलब्ध होने से न केवल महिलाओं का श्रम कम होगा, बल्कि जलजनित बीमारियों के खतरे में भी कमी आएगी।

प्रशासन की इस सक्रियता से उम्मीद है कि आने वाले कुछ ही हफ्तों में सरगुजा के सबसे दुर्गम क्षेत्रों में भी पाइप और हैंडपंप की खड़खड़ाहट पानी की नई उम्मीद लेकर आएगी।

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