रायपुर 9 मई।
छत्तीसगढ़ अपनी समृद्ध वन संपदा और दूरदर्शी सरकारी नीतियों के दम पर ग्रामीण अर्थव्यवस्था की तस्वीर बदल रहा है। यहाँ के वनों से प्राप्त होने वाला ‘ग्रीन गोल्ड’ अब केवल जंगलों तक सीमित नहीं है, बल्कि वैश्विक बाज़ारों में अपनी चमक बिखेर रहा है।

1. ग्रीन गोल्ड: राज्य की आर्थिक रीढ़
छत्तीसगढ़ में वनोपज को ‘हरा सोना’ कहा जाता है, जो लाखों आदिवासियों और ग्रामीणों की आजीविका का मुख्य आधार है।
- प्रमुख उत्पाद: तेंदूपत्ता और बाँस को उनकी बहुमुखी उपयोगिता के कारण ‘हरा सोना’ माना जाता है।
- बहुमूल्य संपदा: यहाँ लाख, शहद, दुर्लभ औषधीय पौधों के साथ-साथ सागौन, साल, बीजा और शीशम जैसे कीमती वृक्ष प्रचुर मात्रा में उपलब्ध हैं।

2. प्रसंस्करण और भंडारण: वैल्यू एडिशन का पावरहाउस
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय और वन मंत्री श्री केदार कश्यप के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ अब केवल कच्चा माल प्रदाता नहीं, बल्कि एक मैन्युफैक्चरिंग हब बन चुका है।
- अत्याधुनिक इकाइयाँ: आंवला, बेल, गिलोय और अश्वगंधा जैसे कच्चे माल को अब उच्च गुणवत्ता वाले जूस, कैंडी और हर्बल पाउडर में बदला जा रहा है।
- वैज्ञानिक भंडारण: राज्य में 20 हजार मीट्रिक टन क्षमता वाले अत्याधुनिक गोदाम बनाए गए हैं, जो उपज को सुरक्षित रखते हैं और संग्राहकों को बाजार के उतार-चढ़ाव से बचाते हैं।

3. छत्तीसगढ़ हर्बल्स: लोकल से ग्लोबल तक
राज्य सरकार का आधिकारिक ब्रांड ‘छत्तीसगढ़ हर्बल्स’ अब शुद्धता का दूसरा नाम बन गया है।
- नेटवर्क का विस्तार: संजीवनी स्टोरों की संख्या 30 से बढ़कर अब 1,500 से अधिक हो गई है।
- डिजिटल पहुँच: ये उत्पाद अब अमेज़न और फ्लिपकार्ट जैसे ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर भी धूम मचा रहे हैं।
- लोकप्रिय उत्पाद: भृंगराज और नीम तेल, च्यवनप्राश, शुद्ध शहद, महुआ उत्पाद और बेल शर्बत की भारी मांग है।
4. हर्बल एक्सट्रैक्शन यूनिट (2025): भविष्य की नई राह
वर्ष 2025 में स्थापित इस यूनिट ने छत्तीसगढ़ की पहचान बदल दी है।
- हाई-टेक अर्क: यहाँ औषधीय पौधों से उच्च गुणवत्ता वाले ‘एक्सट्रैक्ट’ (अर्क) तैयार किए जाते हैं।
- फार्मा सेक्टर में धाक: इन अर्कों की अंतर्राष्ट्रीय फार्मास्युटिकल और वेलनेस इंडस्ट्री में जबरदस्त मांग है, जिससे राज्य की आय में भारी वृद्धि हो रही है।
- छत्तीसगढ़ की यह पहल न केवल वनों का संरक्षण कर रही है, बल्कि ग्रामीण समाज में स्वावलंबन, आत्मविश्वास और आर्थिक सुरक्षा की एक नई चेतना का संचार कर रही है। आज छत्तीसगढ़ सही मायनों में ‘गढ़बो नवा छत्तीसगढ़’ के संकल्प को साकार कर रहा है।
