रायपुर/धमतरी 9 मई :
छत्तीसगढ़ की जीवनरेखा माने जाने वाले धमतरी स्थित रविशंकर सागर जलाशय (गंगरेल बांध) की मजबूती और सुरक्षा को लेकर राज्य सरकार ने एक बड़ा फैसला लिया है। जल संसाधन विभाग ने बांध के गेटों की मरम्मत और अन्य तकनीकी सुधारों के लिए 65 करोड़ 50 लाख रुपए की भारी-भरकम प्रशासनिक स्वीकृति जारी कर दी है।
क्यों जरूरी है यह मरम्मत?
गंगरेल बांध प्रदेश की सबसे पुरानी और महत्वपूर्ण सिंचाई परियोजनाओं में से एक है। लंबे समय से इसके गेटों और आंतरिक संरचना में रखरखाव की आवश्यकता महसूस की जा रही थी। बांध की संरचनात्मक मजबूती (Structural Integrity) को बनाए रखने और भविष्य के किसी भी खतरे से निपटने के लिए यह राशि मंजूर की गई है।
इन आधुनिक तकनीकों का होगा उपयोग
स्वीकृत राशि से बांध में कई विशेष तकनीकी कार्य किए जाएंगे:
- एपॉक्सी ग्राउटिंग (Epoxy Grouting): बांध की दरारों और कंक्रीट संरचना को भीतर से मजबूती देने के लिए एपॉक्सी ग्राउटिंग की जाएगी, जिससे रिसाव की समस्या खत्म होगी।
- हाई प्रेशर वाटर जेट सफाई: फ्लेक्सिबल शाफ्ट और हाई प्रेशर वाटर जेट तकनीक का उपयोग करके चोक हो चुके व्हीपीडी (VPD) की सफाई की जाएगी। इससे बांध के जल निकासी सिस्टम में सुधार होगा।
- गेटों का संरक्षण: बांध के मुख्य गेटों की कार्यक्षमता बढ़ाने के लिए उनकी ऑयलिंग, ग्रीसिंग और आवश्यक पुर्जों को बदलने का कार्य भी किया जाएगा।
किसानों और आमजन को मिलेगा सीधा लाभ
इस परियोजना के पूर्ण होने से न केवल बांध की उम्र बढ़ेगी, बल्कि इसकी जल भंडारण और निकासी क्षमता भी सुरक्षित रहेगी। इसका सीधा लाभ धमतरी, रायपुर और आसपास के जिलों के किसानों को सिंचाई के लिए और शहरों को पेयजल आपूर्ति के लिए मिलेगा।
गुणवत्ता पर विशेष जोर
जल संसाधन विभाग ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि मरम्मत कार्यों में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। विभाग ने अधिकारियों को निर्देशित किया है कि सभी तकनीकी मानकों का कड़ाई से पालन किया जाए और काम की गुणवत्ता उच्च स्तरीय हो, ताकि बांध की सुरक्षा आने वाले कई दशकों तक सुनिश्चित रहे।
