रायपुर 11 मई : पश्चिम एशिया संकट: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की देशवासियों से अपील, ‘डीजल-पेट्रोल की खपत में बरतें सावधानी’
पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और युद्ध की स्थितियों को देखते हुए छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने देश और प्रदेश की जनता से एक महत्वपूर्ण अपील की है। मुख्यमंत्री ने वैश्विक संकट के आर्थिक प्रभावों के प्रति आगाह करते हुए नागरिकों को ईंधन के विवेकपूर्ण उपयोग की सलाह दी है।
वैश्विक संकट का भारत पर प्रभाव
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि पश्चिम एशिया में जारी युद्ध की स्थिति का प्रभाव केवल उस क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका असर संपूर्ण विश्व पर पड़ रहा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि वैश्विक अर्थव्यवस्थाएं आपस में जुड़ी हुई हैं, इसलिए हमारा देश भी इन परिस्थितियों से अछूता नहीं रहेगा। विशेष रूप से ऊर्जा आपूर्ति और कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ने वाले प्रतिकूल प्रभाव को देखते हुए उन्होंने भविष्य की चुनौतियों के प्रति सचेत किया है।
ईंधन की बचत को बताया ‘देशहित’
मुख्यमंत्री ने माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की दूरदर्शिता का समर्थन करते हुए कहा कि ऐसे चुनौतीपूर्ण समय में डीजल और पेट्रोल की खपत को सोच-समझकर और यथासंभव कम करना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि “ईंधन की बचत करना किसी प्रकार की नाकामी या कमजोरी का संकेत नहीं है, बल्कि यह देशहित में उठाया गया एक बेहद जिम्मेदार और साहसिक कदम है।” उन्होंने नागरिकों से आग्रह किया कि वे अनावश्यक ऊर्जा व्यय को कम कर राष्ट्र की अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करें।
विपक्ष पर साधा निशाना
अपने बयान के दौरान मुख्यमंत्री साय ने कांग्रेस पार्टी को भी आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि यदि कांग्रेस को ईंधन की बचत की इस सलाह पर कोई आपत्ति है, तो उसे आलोचना करने के बजाय यह बताना चाहिए कि ऐसी गंभीर वैश्विक परिस्थितियों में देशहित में और क्या बेहतर उपाय किए जाने चाहिए। उन्होंने राजनीति से ऊपर उठकर राष्ट्र प्रथम की भावना से काम करने की आवश्यकता पर बल दिया।
विशेषज्ञों की राय
आर्थिक जानकारों का मानना है कि पश्चिम एशिया में अस्थिरता के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आने की संभावना बनी रहती है। ऐसे में मुख्यमंत्री का यह आह्वान न केवल विदेशी मुद्रा भंडार को बचाने की दिशा में एक कदम है, बल्कि यह आम नागरिकों को भी संभावित महंगाई के प्रति मानसिक रूप से तैयार करने का एक प्रयास है।
मुख्यमंत्री के इस बयान के बाद प्रदेश में ऊर्जा संरक्षण और वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों पर चर्चा एक बार फिर तेज हो गई है।
