रायपुर 16 मई । छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की पहल पर शुरू हुआ ‘सुशासन तिहार’ जनता की समस्याओं के मौके पर ही निपटारे का एक बड़ा माध्यम बन चुका है। इस अभियान के तहत खुद मुख्यमंत्री, राज्य के जनप्रतिनिधि और प्रशासनिक अधिकारी बिना किसी पूर्व सूचना के अचानक गांवों और शहरों में जनता के बीच पहुंच रहे हैं। इसका मुख्य उद्देश्य कागजी दावों से अलग हटकर सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन की जमीनी हकीकत का सीधे पता लगाना है।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने अभियान की सफलता को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा, “सुशासन तिहार 2026 के तहत अब तक राज्य के 8 जिलों का सघन प्रवास करने के बाद यह स्पष्ट रूप से कहा जा सकता है कि हमारी सरकार जनसेवा के जिन लक्ष्यों को लेकर आगे बढ़ी है, वे अब धरातल पर साफ नजर आ रहे हैं।”
बिना सूचना पहुंच रहे अधिकारी, मौके पर समाधान
इस अभियान की सबसे बड़ी विशेषता इसका औचक निरीक्षण (Surprise Inspection) मॉडल है। मुख्यमंत्री ने साफ किया है कि शासन और प्रशासन के लोग बिना किसी तामझाम या पूर्वनिर्धारित कार्यक्रम के सीधे जनता के बीच जा रहे हैं। इससे न केवल सरकारी अमला पूरी तरह अलर्ट है, बल्कि राशन, स्वास्थ्य, सड़क और पानी जैसी बुनियादी सुविधाओं की असली स्थिति सामने आ रही है।
मुख्यमंत्री के बयान के मुख्य बिंदु:
- 8 जिलों का दौरा पूरा: मुख्यमंत्री साय ने अब तक 8 जिलों का जमीनी दौरा कर सुशासन की रफ्तार को खुद परखा है।
- जमीनी हकीकत पर फोकस: बिना सूचना के दौरों से सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन की असली तस्वीर सामने आ रही है।
- लक्ष्यों की प्राप्ति: सरकार के जनसेवा के संकल्प ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में वास्तविक रूप से पूरे हो रहे हैं।
- मौके पर निपटारा: जनप्रतिनिधि और अधिकारी जनता की शिकायतों को सुनकर तत्काल उनका समाधान कर रहे हैं।
प्रशासनिक तंत्र में कसावट
‘सुशासन तिहार’ के माध्यम से छत्तीसगढ़ सरकार ने स्पष्ट संकेत दिया है कि आम जनता को अपने छोटे-छोटे कामों के लिए दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे, बल्कि सरकार खुद चलकर उनके दरवाजे तक आएगी। मुख्यमंत्री के इस कड़े रुख से प्रशासनिक तंत्र में भारी कसावट देखी जा रही है और लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर तत्काल कार्रवाई भी की जा रही है।
