कोरबा/रायपुर, 16 मई 2026: लेमरू में सुशासन तिहार: मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने लखपति दीदी मंजू के स्टॉल पर खाए गुपचुप, 30 हजार रुपये का दिया प्रोत्साहन चेक
छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के कोरबा जिले के लेमरू प्रवास के दौरान ‘सुशासन तिहार’ के अंतर्गत महिला सशक्तीकरण और आत्मनिर्भरता की एक बेहद खूबसूरत और प्रेरणादायक तस्वीर सामने आई। मुख्यमंत्री ने न केवल एक ग्रामीण महिला के संघर्ष को सराहा, बल्कि खुद उनके स्टॉल पर रुककर आत्मीय संवाद किया।

मुख्यमंत्री ने चखा गुपचुप का स्वाद
लेमरू में आयोजित कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) से जुड़ी लखपति दीदी श्रीमती मंजू के छोटे से गुपचुप स्टॉल पर पहुंचे। मुख्यमंत्री ने वहां रुककर बड़े चाव से मंजू के हाथों से बने चटपटे गुपचुप का स्वाद लिया। मुख्यमंत्री को अपने बीच पाकर और उन्हें गुपचुप खिलाकर मंजू के चेहरे पर खुशी और गर्व साफ झलक रहा था।

गुपचुप बेचने से ‘सेंटरिंग प्लेट’ व्यवसाय तक का सफर
मुख्यमंत्री से बातचीत करते हुए श्रीमती मंजू ने अपनी संघर्षगाथा साझा की। उन्होंने बताया कि उन्होंने बेहद सीमित संसाधनों के साथ बहुत छोटे स्तर से गुपचुप बेचने के व्यवसाय की शुरुआत की थी। कठिन परिश्रम और बचत के पैसों की बदौलत आज उनका हौसला इतना बढ़ गया है कि वे अब भवन निर्माण कार्यों में इस्तेमाल होने वाली ‘सेंटरिंग प्लेट’ (सेंटीग्रेट) के व्यवसाय से भी जुड़ चुकी हैं। सीमित साधनों के बावजूद मंजू ने मेहनत और आत्मविश्वास से आत्मनिर्भरता की एक अनूठी मिसाल पेश की है।

30 हजार रुपये का प्रोत्साहन चेक सौंपा
मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने मंजू बहन के इस अनुकरणीय प्रयास की जमकर सराहना की। उन्होंने मंजू के हौसले को और उड़ान देने के लिए मौके पर ही ‘लखपति दीदी योजना’ के अंतर्गत 30 हजार रुपये का प्रोत्साहन चेक प्रदान किया।
ग्रामीण महिलाओं को सशक्त बनाना सरकार का लक्ष्य: मुख्यमंत्री
इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा, “हमारी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त और आत्मनिर्भर बनाना है। ‘लखपति दीदी योजना’ आज प्रदेश की महिलाओं के आत्मविश्वास, सम्मान और आर्थिक मजबूती का एक बड़ा आधार बन चुकी है।”
मुख्यमंत्री ने आगे जोड़ा कि जब कड़ी मेहनत को सही अवसर और हौसले को सरकार का सहारा मिलता है, तो बदलाव सिर्फ एक व्यक्ति या परिवार तक सीमित नहीं रहता, बल्कि उसका सकारात्मक असर पूरे गांव और समाज पर दिखाई देता है।
