बंदूक हटी, कलम सजी! नारायणपुर के कारकाबेड़ा में आजादी के बाद पहली बार खुला स्कूल

नारायणपुर में ऐतिहासिक शुरुआत: आजादी के बाद पहली बार अबूझमाड़ के कारकाबेड़ा गांव में खुला स्कूल, बंदूक की जगह बच्चों के हाथों में आई कलम

नारायणपुर/रायपुर, 17 मई 2026 नारायणपुर में ऐतिहासिक शुरुआत: आजादी के बाद पहली बार अबूझमाड़ के कारकाबेड़ा गांव में खुला स्कूल, बंदूक की जगह बच्चों के हाथों में आई कलम
छत्तीसगढ़ का सुदूर और कभी नक्सलवाद के प्रभाव में रहा अबूझमाड़ क्षेत्र अब विकास और शिक्षा की नई रोशनी से जगमगा रहा है। देश के गृह मंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के सुशासन में बस्तर संभाग में बदलाव की एक नई इबारत लिखी जा रही है। इसका सबसे बड़ा और ऐतिहासिक उदाहरण नारायणपुर जिले के अति दूरस्थ ग्राम कारकाबेड़ा में देखने को मिला है, जहां देश की आजादी के बाद पहली बार किसी प्राथमिक स्कूल की स्थापना की गई है। कभी नक्सलियों का गढ़ माने जाने वाले इस इलाके में अब बच्चों के हाथों से बंदूक और भय हटकर कलम, किताबें और सुनहरे भविष्य के सपने सजने लगे हैं।

जनसमस्या शिविर में ग्रामीणों ने उठाई थी मांग

इस बदलाव की नींव हाल ही में अबूझमाड़ के ही सुदूर क्षेत्र कोड़ेनार में आयोजित हुए ‘जनसमस्या निवारण शिविर’ में पड़ी थी। शिविर के दौरान कारकाबेड़ा के ग्रामीणों ने अपने बच्चों के भविष्य की चिंता करते हुए गांव में ही स्कूल खोलने की पुरजोर मांग प्रशासन के सामने रखी थी। मामले की संवेदनशीलता और शिक्षा के महत्व को समझते हुए नारायणपुर कलेक्टर ने इसे गंभीरता से लिया। उन्होंने तत्काल जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) को इस संबंध में त्वरित कार्रवाई करने और गांव में बुनियादी शिक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने के कड़े निर्देश दिए।

5 घंटे की कठिन पैदल यात्रा कर पहुंची शिक्षा विभाग की टीम

कलेक्टर से हरी झंडी मिलते ही शिक्षा विभाग की टीम एक्शन मोड में आ गई। विभाग ने सबसे पहले कारकाबेड़ा गांव का जमीनी सर्वे कराया, जिसमें प्राथमिक शिक्षा के योग्य 20 बच्चे चिन्हित किए गए। इसके बाद खंड शिक्षा अधिकारी (BEO), खंड स्रोत समन्वयक (BRC), संकुल समन्वयक, स्थानीय सरपंच और शिक्षकों की एक संयुक्त टीम ने अदम्य साहस का परिचय दिया। घने जंगलों, दुर्गम रास्तों, कई नदी-नालों और ऊंची पहाड़ियों को पार करते हुए यह टीम लगभग 5 घंटे की कठिन पैदल यात्रा तय कर कारकाबेड़ा पहुंची। टीम ने वहां पहुंचकर नवीन प्राथमिक शाला का औपचारिक और ऐतिहासिक शुभारंभ किया।

पहले ही दिन बंटी किताबें और यूनिफॉर्म, खिले बच्चों के चेहरे

स्कूल के उद्घाटन के पहले ही दिन बच्चों और उनके अभिभावकों में भारी उत्साह देखा गया। जिला प्रशासन की ओर से स्कूल शुरू होने के साथ ही सभी 20 नामांकित बच्चों को तत्काल निःशुल्क स्कूल यूनिफॉर्म (गणवेश), पाठ्यपुस्तकें, स्लेट, पेंसिल और कॉपियां वितरित की गईं। इसके साथ ही पढ़ाई को सुचारू रूप से चलाने के लिए स्कूल को श्यामपट्ट (ब्लैकबोर्ड) और अन्य जरूरी शैक्षणिक सामग्रियां भी मौके पर उपलब्ध कराई गईं। स्कूल की घंटी बजते ही बच्चों के चेहरों पर एक अनूठी मुस्कान और चमक बिखर गई।

‘सपने के सच होने जैसा है यह दिन’ – सरपंच

गांव में स्कूल खुलने पर कारकाबेड़ा के सरपंच रामूराम वड्डे ने भावुक होते हुए जिला प्रशासन और सरकार का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा, “हमारे गांव में स्कूल खुलना किसी बड़े सपने के सच होने जैसा है। सालों से हमारा इलाका इस बुनियादी हक से महरूम था। अब हमारे बच्चों को अक्षरों का ज्ञान लेने के लिए अपनी जान जोखिम में डालकर, नदी-नालों को पार करके दूर के गांवों में नहीं जाना पड़ेगा। वे अपने ही गांव में सुरक्षित रहकर पढ़ सकेंगे और आगे बढ़ सकेंगे।”

छत्तीसगढ़ शासन का यह कदम यह साफ करता है कि अबूझमाड़ के दुर्गम अंचलों में अब विकास की बयार बहने लगी है। गोली और बारूद की गूंज को पीछे छोड़कर बस्तर का यह सुदूर अंचल अब शिक्षा, शांति और प्रगति के पथ पर मजबूती से कदम बढ़ा रहा है।


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