अब देश के नक्शे पर आया बीजापुर का दारेली: 40 बरस बाद पहुंचे अफसर, लगी चौपाल

बीजापुर, 20 मई 2026दारेली (बीजापुर) में चार दशक बाद पहुंचा प्रशासन: पहली बार हुई जनगणना, चौपाल लगाकर कलेक्टर ने सुनीं ग्रामीणों की समस्याएं

नक्सलवाद के खौफ और दशकों की उपेक्षा को पीछे छोड़कर छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले का सुदूरवर्ती दारेली गांव अब विकास की नई रोशनी से जगमगा रहा है। पिछले 40 साल से जिस गांव में प्रशासन का कोई भी अधिकारी कदम रखने की हिम्मत नहीं जुटा पाया था, वहां अब इतिहास बदल चुका है। सुरक्षा बलों के बढ़ते प्रभाव और सरकार की विकास नीति के चलते दारेली गांव अब मुख्यधारा में शामिल हो रहा है।

पहली बार हुई जनगणना, ग्रामीणों की आंखें हुईं नम

माओवादी आतंक के साए के कारण यह गांव बुनियादी सुविधाओं के साथ-साथ वर्ष 2011 की राष्ट्रीय जनगणना से भी पूरी तरह वंचित रह गया था। लेकिन अब सुरक्षा और विश्वास के नए माहौल के बीच जिला प्रशासन की टीम पहली बार सीधे दारेली गांव पहुंची। प्रशासनिक अमले ने यहां पहुंचकर गांव के हर घर का डेटा जुटाया और सुचारू रूप से जनगणना का ऐतिहासिक कार्य संपन्न कराया। अधिकारियों को अपने बीच पाकर ग्रामीणों का उत्साह देखते ही बनता था। ग्रामीणों ने अपनी पारंपरिक संस्कृति के अनुसार पूरी आत्मीयता से अधिकारियों का भावुक स्वागत किया और कहा कि आज पहली बार उन्हें महसूस हुआ है कि सरकार उनके साथ खड़ी है।

कलेक्टर की चौपाल: मौके पर ही दिए दस्तावेज बनाने के निर्देश

इस ऐतिहासिक बदलाव की कमान खुद बीजापुर कलेक्टर श्री विश्वदीप ने संभाली। उनके साथ जिला पंचायत सीईओ श्रीमती नम्रता चौबे, जनगणना प्रभारी अधिकारी श्री मुकेश देवांगन और उसूर एसडीएम श्री भूपेंद्र गावरे भी दारेली के सघन दौरे पर रहे।

कलेक्टर ने गांव के बीचो-बीच चौपाल लगाकर ग्रामीणों से सीधा संवाद किया। उन्होंने मौके पर ही ग्रामीणों के जमीन पट्टे, आधार कार्ड, बैंक खाते और राशन कार्ड जैसे जरूरी दस्तावेजों की जांच की। जांच के दौरान कई ग्रामीणों के दस्तावेज अपूर्ण पाए गए, जिस पर कलेक्टर ने नाराजगी जाहिर करते हुए अधीनस्थ अधिकारियों को तुरंत गांव में ‘विशेष शिविर’ लगाने के निर्देश दिए। उन्होंने साफ किया कि गांव के शत-प्रतिशत लोगों का दस्तावेजीकरण (सैचुरेशन) अनिवार्य रूप से पूरा किया जाए।

अंतिम छोर के व्यक्ति तक पहुंचेगा सरकारी योजनाओं का लाभ

कलेक्टर श्री विश्वदीप ने चौपाल में ग्रामीणों को प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY) सहित राज्य और केंद्र सरकार की कई कल्याणकारी योजनाओं की विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने अधिकारियों को सख्त लहजे में हिदायत दी कि विकास का लाभ समाज के अंतिम छोर पर बैठे अंतिम व्यक्ति तक बिना किसी बाधा के पहुंचना चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने शिक्षा पर जोर देते हुए ग्राम पंचायत दारेली के सभी स्कूली बच्चों को प्राथमिकता के आधार पर छात्रवृत्ति दिलाने की घोषणा की।

जो दारेली गांव कभी भय, सन्नाटे और सरकारी उपेक्षा की पहचान बन चुका था, आज वहां बच्चों की किलकारियां और विकास की उम्मीदें साफ देखी जा सकती हैं। प्रशासन की इस संवेदनशील और जमीनी पहल ने ग्रामीणों के भीतर लोकतंत्र और शासन के प्रति एक नया और अटूट भरोसा पैदा किया है।

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