बलरामपुर, 24 मई 2026
बलरामपुर-रामानुजगंज जिला प्रशासन की एक संवेदनशील पहल ने सुदूर वनांचल में रहने वाले विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह (PVTG) के जीवन में खुशहाली की नई रोशनी बिखेरी है। विकासखंड राजपुर के सुदूर ग्राम पंचायत पतरापारा की निवासी पहाड़ी कोरवा महिला श्रीमती रोन्ही के लिए प्रशासन की ‘जनभागीदारी सबसे दूर सबसे पहले’ मुहिम वरदान साबित हुई है। इस अभियान के तहत आयोजित शिविर में उन्हें आयुष्मान भारत कार्ड प्रदान किया गया है, जिसने उनके पूरे परिवार को इलाज की बड़ी चिंताओं से मुक्त कर दिया है।

अभावों में कट रहा था जीवन, बैगा-गुनिया के भरोसे था इलाज
ग्राम पतरापारा की रोन्ही पहाड़ी कोरवा अपने परिवार के साथ बेहद सीमित संसाधनों में जीवनयापन कर रही हैं। आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण परिवार में छोटी-मोटी बीमारी आने पर भी संकट खड़ा हो जाता था। आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाओं की जानकारी न होने और आर्थिक तंगी के कारण उन्हें मजबूरीवश स्थानीय बैगा-गुनिया (पारंपरिक उपचारकों) के सहारे रहना पड़ता था।
इलाज के खर्च से टूट जाती थी कमर
बीमारी बढ़ने की स्थिति में शहर के बड़े अस्पताल जाना रोन्ही के लिए मानसिक और आर्थिक रूप से अत्यंत कष्टकारी होता था। अस्पताल आने-जाने के किराए और महंगी दवाइयों के खर्च में उनकी मेहनत की गाढ़ी कमाई का बड़ा हिस्सा बह जाता था। इसके चलते परिवार की रोजमर्रा की बुनियादी जरूरतें पूरी करना भी दूभर हो गया था और परिवार कर्ज के दलदल में फंसता जा रहा था।
‘जन जनजातीय गरिमा उत्सव’ बना तारणहार
श्रीमती रोन्ही के जीवन के इस कठिन ढर्रे को बदलने का माध्यम जिला प्रशासन द्वारा संचालित ‘जनभागीदारी सबसे दूर सबसे पहले’ अभियान बना। पतरापारा में आयोजित ‘जनजातीय गरिमा उत्सव शिविर’ में स्वास्थ्य विभाग की टीम ने रोन्ही की इस पीड़ा को समझा। टीम ने संवेदनशीलता दिखाते हुए मौके पर ही उनका आयुष्मान भारत कार्ड बनाकर उन्हें सौंप दिया।
निःशुल्क और बेहतर इलाज की मिली गारंटी
आयुष्मान कार्ड मिलने के बाद अब रोन्ही और उनके पूरे परिवार को इलाज पर होने वाले भारी-भरकम खर्च की चिंता से हमेशा के लिए मुक्ति मिल गई है। अब वे किसी भी आपातकालीन स्थिति या गंभीर बीमारी के दौरान शासन द्वारा अनुबंधित चिन्हित अस्पतालों में जाकर निःशुल्क एवं बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ उठा सकेंगी।
मुख्यमंत्री और जिला प्रशासन का जताया आभार
अपनी खुशी साझा करते हुए श्रीमती रोन्ही ने भावुक होकर बताया, “पहले हमारे लिए बीमारी का मतलब सिर्फ मानसिक चिंता और कर्ज का बोझ होता था। लेकिन अब यह आयुष्मान कार्ड हमारे पास है, जिससे हमें एक बड़ी स्वास्थ्य सुरक्षा का एहसास हुआ है। अब मैं अपने परिवार के स्वास्थ्य और उनके भविष्य को लेकर निश्चिंत हूँ।” उन्होंने इस शिविर को दूरस्थ अंचल के ग्रामीणों के लिए एक अत्यंत उपयोगी और जीवनदायिनी पहल बताते हुए राज्य सरकार एवं जिला प्रशासन के प्रति सहृदय आभार व्यक्त किया है
