रायपुर, 25 मई 2026
छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग के सुदूर जनजातीय अंचलों में दशकों से निःस्वार्थ चिकित्सा सेवा देने वाले डॉ. रामचंद्र गोडबोले और उनकी पत्नी श्रीमती सुनीता गोडबोले को राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने पद्मश्री सम्मान से अलंकृत किया है। इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने गहरा हर्ष व्यक्त किया है। मुख्यमंत्री ने इसे समूचे छत्तीसगढ़ के लिए अत्यंत गौरव और प्रेरणा का विषय बताया है।
राष्ट्रीय स्तर पर मिला समर्पण को सम्मान
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने अपने बधाई संदेश में कहा कि माननीय राष्ट्रपति जी द्वारा गोडबोले दंपति को देश के इस प्रतिष्ठित नागरिक सम्मान से नवाजा जाना जनसेवा, समर्पण और संवेदनशीलता के मूल्यों को राष्ट्रीय स्तर पर मिली बड़ी पहचान है। उन्होंने कहा कि गोडबोले दंपति का जीवन समाज के लिए एक जीवंत मिसाल है।
वनवासी कल्याण आश्रम से जुड़कर बस्तर को बनाया कर्मभूमि
मुख्यमंत्री ने गोडबोले दंपति के संघर्ष और सेवा यात्रा को याद करते हुए कहा:
- जीवन समर्पित: दंपति ने वनवासी कल्याण आश्रम से जुड़कर अपना पूरा जीवन जनजातीय समाज के उत्थान के लिए समर्पित कर दिया।
- दुर्गम क्षेत्रों में सेवा: बस्तर के बारसूर जैसे अत्यधिक दूरस्थ, संवेदनशील और दुर्गम वनांचल में रहकर उन्होंने दशकों तक काम किया।
- निःशुल्क उपचार: स्वास्थ्य सुविधाओं से कोसों दूर रहने वाले वनवासियों तक निःशुल्क इलाज और दवाइयाँ पहुँचाईं।
- चेतना का संचार: उन्होंने न केवल इलाज किया, बल्कि ग्रामीणों में स्वास्थ्य जागरूकता और जनविश्वास का प्रकाश भी फैलाया।
कुपोषण मुक्ति और स्वास्थ्य सुधार में अनुकरणीय योगदान
मुख्यमंत्री श्री साय ने आगे कहा कि बस्तर के ग्रामीण और जनजातीय समाज में स्वास्थ्य के प्रति चेतना विकसित करने में इस दंपति की भूमिका अद्वितीय रही है। उन्होंने कुपोषण मुक्ति और प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए ज़मीनी स्तर पर काम किया। सीमित संसाधनों और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने कभी हार नहीं मानी। उनका यह सेवा भाव आने वाली पीढ़ियों के लिए हमेशा प्रेरणा का स्रोत बना रहेगा।
मुख्यमंत्री ने दी बधाई और शुभकामनाएं
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने इस गौरवपूर्ण उपलब्धि पर डॉ. रामचंद्र गोडबोले एवं श्रीमती सुनीता गोडबोले को छत्तीसगढ़ की जनता की ओर से बधाई और शुभकामनाएं दी हैं। उन्होंने कहा कि गोडबोले दंपति की यह सेवा भावना समाज में करुणा, दायित्वबोध और राष्ट्र निर्माण की प्रेरणा को और अधिक मजबूत करेगी।
