विशेष संवाददाता, रायपुर 26 मई। बस्तर के वनांचलों में सुदृढ़ होगी महिला-बाल विकास की नींव: 506 नए आंगनबाड़ी भवनों के निर्माण को मिली हरी झंडी, बजट में 2,320 करोड़ का प्रावधान
मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार बस्तर संभाग के नक्सल प्रभावित और दूरस्थ क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए युद्ध स्तर पर काम कर रही है। राज्य सरकार ने बच्चों और माताओं के स्वास्थ्य, पोषण और प्रारंभिक शिक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए बस्तर संभाग के सभी 6 जिलों में संचालित शेष 506 भवनविहीन आंगनबाड़ी केन्द्रों के लिए नए सरकारी भवनों की स्वीकृति प्रक्रिया को तेज करने के कड़े निर्देश दिए हैं।

मुख्यमंत्री श्री साय ने स्पष्ट किया है कि सरकार का संकल्प बस्तर को पूरी तरह मुख्यधारा से जोड़ना है। इस बड़ी पहल के माध्यम से नक्सल मुक्त घोषित किए जा चुके वनांचल ग्रामों में शत-प्रतिशत आंगनबाड़ियों को अपने सर्वसुविधायुक्त पक्के भवनों में शिफ्ट किया जाएगा, जिससे ग्रामीण अंचलों में कोई भी केंद्र किराए के या जर्जर भवनों में संचालित न रहे।
बजट और विशेष आंकड़े: बुनियादी ढांचे पर फोकस
छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य के वार्षिक बजट (2026-27) में महिला एवं बाल विकास क्षेत्र के लिए बड़े वित्तीय प्रावधान किए हैं:
- ₹2,320 करोड़ का भारी-भरकम आवंटन: आंगनबाड़ी सेवाओं और सुदृढ़ पोषण संबंधी योजनाओं के संचालन के लिए राज्य बजट में ₹2,320 करोड़ की विशेष राशि स्वीकृत की गई है।
- पूरक पोषण आहार के लिए विशेष बजट: बस्तर और सरगुजा जैसे आदिवासी बहुल संभागों में कुपोषण को खत्म करने के लिए पृथक से अतिरिक्त पूरक पोषण आहार का बजट आरक्षित किया गया है।
- मिशन सक्षम आंगनबाड़ी और पोषण 2.0: केंद्र और राज्य के अभिसरण (Convergence) से बस्तर के इन नए भवनों को आधुनिक ‘सक्षम आंगनबाड़ी’ केंद्रों के रूप में अपग्रेड किया जाएगा, जहां बाल-सुलभ शिक्षा (ECCE) और बेहतर पेयजल व स्वच्छता सुविधाएं मिलेंगी।
इन 6 आकांक्षी जिलों में प्राथमिकता से होगा निर्माण
महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा तैयार की गई कार्ययोजना के तहत बस्तर संभाग के उन संवेदनशील और सुदूर क्षेत्रों को चिन्हित किया गया है, जहां बुनियादी सुविधाएं पहुंचाना सबसे चुनौतीपूर्ण माना जाता था। प्राथमिकता के आधार पर जिन 6 जिलों में तत्काल निर्माण सुनिश्चित किया जाएगा, वे हैं:
- बस्तर
- बीजापुर
- दंतेवाड़ा
- कांकेर
- नारायणपुर
- सुकमा
विभाग की अतिरिक्त योजनाएं: बस्तर की माताओं और बेटियों को मिल रहा संबल
मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के मार्गदर्शन में महिला एवं बाल विकास विभाग बस्तर संभाग में कई अन्य महत्वपूर्ण फ्लैगशिप योजनाएं भी संचालित कर रहा है, जो ग्रामीण परिवेश को पूरी तरह बदल रही हैं:
- महतारी वंदन योजना: बस्तर संभाग की लाखों विवाहित महिलाओं के स्वास्थ्य और पोषण स्तर में सुधार लाने के लिए उन्हें सालाना ₹12,000 (₹1000 प्रति माह) की वित्तीय सहायता सीधे उनके बैंक खातों में ट्रांसफर की जा रही है। इस योजना के लिए बजट में ₹8,200 करोड़ की बड़ी राशि रखी गई है।
- लक्ष्मी सखी मिलेट्स कार्यक्रम: बस्तर की स्थानीय आदिवासी महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए विभाग द्वारा मिलेट्स (कोदो, कुटकी, रागी) आधारित स्वरोजगार गतिविधियों से जोड़ा जा रहा है। इसके तहत महिलाओं को आधुनिक स्टॉल दिए जा रहे हैं ताकि वे पौष्टिक खाद्य उत्पाद बेचकर अपनी आय बढ़ा सकें।
- प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना (PMMVY): गर्भवती और धात्री माताओं को पहली व दूसरी संतान के समय उचित देखभाल और आराम सुनिश्चित करने के लिए नकद प्रोत्साहन राशि प्रदान की जा रही है, जिसके लिए बजट में ₹120 करोड़ का विशेष प्रावधान है।
- सुरक्षा एवं संरक्षण योजनाएं: महिलाओं और बच्चों की त्वरित सहायता के लिए बस्तर संभाग के सभी जिलों में सखी वन स्टॉप सेंटर, महिला हेल्पलाइन 181 और चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 को पूरी तरह सक्रिय कर दिया गया है।
“आंगनबाड़ी केवल पोषण केंद्र नहीं, समग्र विकास की नींव”: मुख्यमंत्री
मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने विभागीय अधिकारियों को कड़े लहजे में निर्देशित किया है कि सुदूर आदिवासी क्षेत्रों में गुणवत्तापूर्ण आंगनबाड़ी व्यवस्था ही बच्चों के सुनहरे भविष्य की गारंटी है। उन्होंने कहा, “आंगनबाड़ी केन्द्र केवल पोषण वितरण का माध्यम नहीं, बल्कि बच्चों के समग्र विकास, मातृ स्वास्थ्य, प्रारंभिक शिक्षा और सामाजिक सशक्तिकरण की मजबूत नींव हैं।” मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्माण कार्यों में उच्च स्तर की गुणवत्ता, समयबद्धता और स्थानीय आवश्यकताओं (जैसे- स्थानीय भाषा और संस्कृति के अनुरूप चित्रकारी) का विशेष ध्यान रखने के निर्देश दिए हैं।
कलेक्टर्स को संयुक्त निर्देश, समय सीमा तय
प्रशासनिक अमला इस योजना को धरातल पर उतारने के लिए तेजी से सक्रिय हो गया है। मुख्य सचिव स्तर पर 16 मई 2026 को आयोजित उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में दिए गए कड़े निर्देशों के अनुरूप बस्तर संभाग की प्रत्येक ग्राम पंचायत में आंगनबाड़ी भवन निर्माण को शासन की ‘सर्वोच्च प्राथमिकता’ सूची में शामिल किया गया है। विकास कार्यों में किसी भी तरह की कागजी देरी को रोकने और त्वरित प्रशासनिक व तकनीकी स्वीकृति जारी करने के लिए संबंधित जिलों के कलेक्टर्स को संयुक्त दिशा-निर्देश जारी कर दिए गए हैं।
इस वृहद अभियान से बस्तर के घने वनांचल क्षेत्रों में रहने वाले हजारों जनजातीय बच्चों को न केवल कुपोषण से मुक्ति मिलेगी, बल्कि उन्हें प्रारंभिक बाल्यावस्था शिक्षा के लिए एक सुरक्षित, आधुनिक और आनंदमय वातावरण भी मिल सकेगा।
