बलरामपुर की उमा सिंह बनीं ‘लखपति दीदी’, खेती, मछली पालन और चाट दुकान से बदली अपनी तकदीर
बलरामपुर/रायपुर, 26 मई 2026। बलरामपुर की उमा सिंह बनीं ‘लखपति दीदी’, खेती, मछली पालन और चाट दुकान से बदली अपनी तकदीर
मछली पालन और छोटे व्यवसायों ने ग्रामीण भारत, विशेषकर छत्तीसगढ़ की महिलाओं को स्वरोजगार और शानदार सफलता की नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया है। सही जानकारी, प्रशिक्षण और सरकारी योजनाओं के तालमेल से ग्रामीण महिलाएं अब आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर होकर दूसरों के लिए प्रेरणा बन रही हैं। सफलता की ऐसी ही एक नई इबारत बलरामपुर जिले में लिखी गई है, जहां एक ग्रामीण महिला ने अपनी मेहनत से ‘लखपति दीदी’ बनने का गौरव हासिल किया है।

समूह से मिला संबल, ऋण लेकर बढ़ाया कदम
जनपद पंचायत बलरामपुर के ग्राम महाराजगंज की निवासी उमा सिंह आज क्षेत्र की महिलाओं के लिए एक मिसाल बन चुकी हैं। उमा सिंह ने अपनी आर्थिक स्थिति को मजबूत करने के लिए ‘गुलाब महिला स्व-सहायता समूह’ की सदस्यता ली। समूह से जुड़ने के बाद उनकी राह आसान हुई। उन्होंने आजीविका गतिविधियों को शुरू करने के लिए चक्रीय निधि, सामुदायिक निवेश कोष (CIF) और बैंक लिंकेज के माध्यम से कुल 85 हजार रुपये का ऋण प्राप्त किया। इस पूंजी को उन्होंने पारंपरिक खेती के साथ-साथ नए व्यवसायों में निवेश किया।

बहुआयामी आजीविका मॉडल से बढ़ी आमदनी
उमा सिंह ने केवल एक साधन पर निर्भर रहने के बजाय बहुआयामी आजीविका (मल्टीपल लाइवलीहुड) मॉडल को अपनाया। उन्होंने अपनी जमीन और उपलब्ध संसाधनों का बेहतर प्रबंधन करते हुए निम्नलिखित क्षेत्रों में काम किया:
- उन्नत कृषि: उमा ने 2.5 एकड़ भूमि में धान की फसल और 1.5 एकड़ भूमि में मक्का की खेती कर बेहतर उत्पादन हासिल किया।
- मत्स्य पालन: पारंपरिक खेती से हटकर उन्होंने अपनी डबरी (छोटे तालाब) में मछली बीज डालकर मत्स्य पालन का नया काम शुरू किया।
- छोटा व्यवसाय: कृषि और मछली पालन के साथ ही उन्होंने महाराजगंज चौक पर प्रतिदिन शाम को चना-चाट की दुकान लगानी शुरू की, जिससे उन्हें हर दिन नकद कमाई होने लगी।
एक साल में कमाए लाखों रुपये
विभिन्न आर्थिक गतिविधियों के जुड़ाव से उमा सिंह की आय में भारी बढ़ोतरी हुई है। इस वित्तीय वर्ष में उन्हें अलग-अलग स्रोतों से शानदार मुनाफा हुआ है:
- धान बिक्री से शुद्ध आय: ₹1,42,000
- मक्का उत्पादन से कमाई: ₹16,000
- मत्स्य पालन से लाभ: ₹20,000
इसके अलावा, शाम को चलने वाली चना-चाट की दुकान से उन्हें नियमित रूप से अतिरिक्त घरेलू आय प्राप्त हो रही है।
ग्रामीण महिलाओं के लिए बनीं रोल मॉडल
कभी साधारण गृहणी रहीं उमा सिंह आज अपने पूरे गांव और विकासखंड में ‘लखपति दीदी’ के रूप में अपनी नई पहचान बना चुकी हैं। उनकी यह सफलता साबित करती है कि यदि ग्रामीण महिलाओं को सही समय पर वित्तीय सहायता और अवसर मिले, तो वे न केवल अपने परिवार को आर्थिक तंगहाली से उबार सकती हैं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ भी बन सकती हैं।
