बिलासपुर, 2 जून 2026। बिलासपुर में खरीफ सीजन के लिए खाद का पुख्ता इंतजाम: 46 हजार टन से अधिक का भंडारण, कालाबाजारी पर रहेगी सख्त नजर
खरीफ सीजन 2026 की शुरुआत के साथ ही बिलासपुर जिला प्रशासन ने किसानों को समय पर खाद-बीज उपलब्ध कराने के लिए कमर कस ली है। कलेक्टर श्री अग्रवाल स्वयं प्रतिदिन खाद और बीज की उपलब्धता, भंडारण तथा वितरण की समीक्षा कर रहे हैं। जिले की 114 सहकारी समितियों और पंजीकृत निजी दुकानों के माध्यम से किसानों को सुगमता से खाद का वितरण शुरू कर दिया गया है।

कृषि विभाग के अधिकारियों ने बताया कि जिले में खाद का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है और मांग के अनुसार निरंतर आपूर्ति की जा रही है।
लक्ष्य का 60% से अधिक भंडारण पूरा
उप संचालक कृषि से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, बिलासपुर जिले को खरीफ 2026 के लिए कुल 68,950 टन रासायनिक उर्वरक वितरण का लक्ष्य मिला है। प्रशासन की मुस्तैदी के चलते अब तक 46,780 टन से अधिक उर्वरक का भंडारण किया जा चुका है, जो कुल लक्ष्य का लगभग 60.28 प्रतिशत है। इसमें से 19,912 टन से अधिक खाद का वितरण किसानों को किया जा चुका है।

गोदामों में 41 हजार टन से ज्यादा का स्टॉक
जिले के गोदामों और सोसायटियों में वर्तमान में कुल 41,560 टन उर्वरक का सुरक्षित भंडार उपलब्ध है। विभिन्न प्रकार के खादों का विवरण इस प्रकार है:
- यूरिया: 22,996 टन
- डीएपी (DAP): 5,621 टन
- एनपीके (NPK): 6,808 टन
- एसएसपी (SSP): 4,981 टन
- एमओपी (MOP): 1,155 टन
कृषि विभाग लगातार उर्वरक कंपनियों के संपर्क में है। अतिरिक्त रैक मंगाकर भंडारण को और मजबूत किया जा रहा है ताकि सीजन के पीक समय पर किसानों को परेशानी न हो।
कालाबाजारी और जमाखोरी पर कड़ी निगरानी
कलेक्टर श्री अग्रवाल ने कृषि विभाग के अधिकारियों को सोसायटियों और निजी खाद विक्रेताओं की दुकानों का नियमित निरीक्षण करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने साफ किया है कि खाद की कालाबाजारी, जमाखोरी या निर्धारित से अधिक दाम वसूलने पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। किसानों को सही दाम पर गुणवत्तायुक्त खाद मिले, इसके लिए दैनिक मॉनिटरिंग की जा रही है।
प्रशासन की किसानों से अपील
जिला प्रशासन ने किसानों से आग्रह किया है कि वे केवल अधिकृत सहकारी समितियों और लाइसेंसधारी निजी विक्रेताओं से ही खाद-बीज खरीदें। खरीदारी के समय रसीद अवश्य लें। यदि कोई विक्रेता अधिक कीमत मांगता है या गड़बड़ी करता है, तो इसकी सूचना तुरंत कृषि विभाग को दें।
