मुंगेली/रायपुर, 2 जून 2026
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की मंशानुरूप और मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के कुशल नेतृत्व में संचालित ‘प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना’ छत्तीसगढ़ के मुंगेली जिले के अन्नदाताओं के लिए बड़ा सहारा साबित हो रही है। इस महत्वाकांक्षी योजना ने जिले के हजारों किसानों के जीवन और खेती-किसानी के तौर-तरीकों में व्यापक सकारात्मक बदलाव लाया है। संकट के समय समय पर मिलने वाली आर्थिक सहायता ने किसानों को कर्ज के दलदल से उबारकर आत्मनिर्भरता की नई राह दिखाई है।

समय पर आर्थिक मदद से कम हुआ कर्ज का बोझ
मुंगेली जिले के लोरमी विकासखंड के अंतर्गत आने वाले ग्राम करूहानार के प्रगतिशील किसान चुन्नूलाल साहू योजना के प्रत्यक्ष उदाहरण हैं। उन्होंने बताया कि इस योजना के तहत प्रतिवर्ष मिलने वाली 6,000 रुपये की राशि उनके लिए किसी वरदान से कम नहीं है। चुन्नूलाल ने खुशी जाहिर करते हुए कहा, “पहले सीजन की शुरुआत में खाद, उन्नत बीज और कृषि उपकरणों के लिए दूसरों के सामने हाथ फैलाना पड़ता था या साहूकारों से ऊंचे ब्याज पर कर्ज लेना पड़ता था। लेकिन अब पीएम किसान निधि की राशि सीधे बैंक खाते में आने से यह चिंता पूरी तरह खत्म हो गई है।”
अब तक मिल चुकी हैं 22 किश्तें
किसान चुन्नूलाल साहू ने बताया कि वे योजना की शुरुआत से ही इसके लाभार्थी रहे हैं और अब तक उन्हें सफलतापूर्वक 22 किश्तों का लाभ मिल चुका है। सरकार द्वारा पारदर्शी डीबीटी (डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर) व्यवस्था के जरिए बिना किसी बिचौलिए के सीधे खाते में पैसा भेजने से किसानों का व्यवस्था पर भरोसा बढ़ा है। चुन्नूलाल कहते हैं, “समय पर पैसा मिलने से खरीफ और रबी फसलों की तैयारी बिना किसी रुकावट के हो जाती है, जिससे हमारे भीतर खेती को लेकर आत्मविश्वास और उत्साह बढ़ा है।”
ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिल रही गति
शासन की इस किसान हितैषी नीति से न केवल मुंगेली बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ के ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक तरलता बढ़ी है। किसान अब आधुनिक कृषि पद्धतियों और अच्छे बीजों का उपयोग करने लगे हैं, जिससे फसलों की पैदावार में भी सुधार हो रहा है।
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के प्रति विशेष आभार व्यक्त करते हुए किसान चुन्नूलाल ने कहा कि वर्तमान सरकार की नीतियां सीधे तौर पर गांवों और किसानों को मजबूत कर रही हैं। यह योजना महज एक आर्थिक सहायता नहीं, बल्कि किसानों के सम्मान और उनकी आत्मनिर्भरता का आधार बन चुकी है।
