- स्थान: पहाड़गांव (पिलखा डैम), सूरजपुर जिला, छत्तीसगढ़।
- समूह: मुस्कान महिला स्व-सहायता समूह (10 सदस्यीय टीम)।
- नेतृत्व: श्रीमती सुनीता सिंह (अध्यक्ष) और श्रीमती यशोदा दास (सचिव)।
- सफलता: अब तक ₹74,000 की शुद्ध आय अर्जित की।
सूरजपुर/रायपुर, 02 जून 2026
छत्तीसगढ़ के ग्रामीण अंचलों में महिला सशक्तिकरण और आत्मनिर्भरता की एक नई और अनोखी कहानी लिखी जा रही है। कभी घर-परिवार के चूल्हे-चौके और सीमित जिम्मेदारियों तक सिमटी रहने वाली ग्रामीण महिलाएं आज न सिर्फ आर्थिक रूप से स्वतंत्र हो रही हैं, बल्कि पूरे प्रदेश के लिए प्रेरणा का केंद्र बन गई हैं। इसका ताजा और जीवंत उदाहरण सूरजपुर जिले के पहाड़गांव में स्थित पिलखा डैम में देखने को मिल रहा है, जहां शांत जलराशि पर दौड़ती नावें अब केवल पर्यटकों के मनोरंजन का साधन नहीं हैं, बल्कि स्थानीय महिलाओं के संघर्ष, साहस और कामयाबी का प्रतीक बन चुकी हैं।

चुनौतियों को बनाया सफलता की पतवार
यह गौरवमयी कहानी पहाड़गांव की ‘मुस्कान महिला स्व-सहायता समूह’ की है। समूह की अध्यक्ष श्रीमती सुनीता सिंह और सचिव श्रीमती यशोदा दास के कुशल मार्गदर्शन में गांव की 10 महिलाओं ने लीक से हटकर कुछ नया करने की ठानी। उन्होंने पारंपरिक खेती-मजदूरी से आगे बढ़कर पर्यटन के क्षेत्र में कदम रखा और पिलखा डैम में बोटिंग (नौकायन) गतिविधि की शुरुआत की।
शुरुआती सफर बेहद चुनौतीपूर्ण था। महिलाओं के पास न तो पर्याप्त वित्तीय संसाधन थे और न ही बोट संचालन या तकनीकी प्रबंधन का कोई पूर्व अनुभव। सुरक्षा नियमों और पर्यटकों को संभालने जैसी अनेक व्यावहारिक दिक्कतें भी सामने थीं। लेकिन इन ग्रामीण महिलाओं ने हार मानने के बजाय हर चुनौती को एक अवसर के रूप में स्वीकार किया। उन्होंने बोटिंग संचालन, लाइफ जैकेट व सुरक्षा प्रबंधन और पर्यटकों की सुविधाओं से जुड़ी बारीकियाँ खुद सीखीं और जिम्मेदारी संभाली।

पर्यटकों की पहली पसंद बना पिलखा डैम, ₹74 हजार की आय
महिलाओं के इस अथक प्रयास का नतीजा आज सबके सामने है। पिलखा डैम अब जिले के एक प्रमुख पर्यटन स्थल के रूप में उभर रहा है, जहां आने वाले पर्यटक इन महिलाओं के हौसले को देखकर बेहद उत्साहित होते हैं और बोटिंग का आनंद लेते हैं। इस नवाचार और कड़ी मेहनत के दम पर मुस्कान समूह ने अब तक ₹74,000 की शानदार आय अर्जित कर ली है। इस कमाई ने न केवल इन महिलाओं के परिवारों की आर्थिक स्थिति को सुधारा है, बल्कि समाज में उनके सम्मान और आत्मविश्वास को एक नई उड़ान दी है।
महिला सशक्तिकरण और आत्मनिर्भर भारत की मिसाल
समूह की सदस्यों का कहना है कि उन्होंने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि वे कभी खुद एक पर्यटन व्यवसाय का संचालन करेंगी और आत्मनिर्भर बनेंगी। आज वे न केवल अपने घर का खर्च चलाने में मदद कर रही हैं, बल्कि गांव की दूसरी महिलाओं को भी आगे आने के लिए प्रेरित कर रही हैं।
मुस्कान महिला स्व-सहायता समूह की यह सफलता साबित करती है कि यदि ग्रामीण महिलाओं को सही अवसर, संसाधन और समाज का विश्वास मिले, तो वे किसी भी क्षेत्र में कामयाबी के झंडे गाड़ सकती हैं। पिलखा डैम की लहरों पर तैरती ये नावें आज छत्तीसगढ़ में महिला उद्यमिता और ‘आत्मनिर्भर भारत’ के संकल्प की एक मजबूत पहचान बन चुकी हैं।
