रायपुर, 5 जून 2026। अधिकारियों की जिम्मेदारी तय, लापरवाही पर होगी कार्रवाई; राज्य सरकार ने जारी की अधिसूचना
छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य में सुशासन और सरकारी कामकाज में पारदर्शिता बढ़ाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। शासन ने श्रम विभाग के अंतर्गत दी जाने वाली विभिन्न नागरिक सेवाओं को ‘छत्तीसगढ़ लोक सेवा गारंटी अधिनियम, 2011’ के दायरे में लाते हुए इसकी विस्तृत अधिसूचना जारी कर दी है। इस नए नियम के तहत अब श्रम विभाग के अधिकारियों को नागरिकों और श्रमिकों से जुड़े आवेदनों का निपटारा एक निश्चित समय-सीमा (कार्य दिवसों) के भीतर अनिवार्य रूप से करना होगा।

अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत मिली शक्तियां
आधिकारिक जानकारी के अनुसार, राज्य सरकार ने छत्तीसगढ़ लोक सेवा गारंटी अधिनियम, 2011 की धारा 3, 4, 5 और 7 द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए यह निर्णय लिया है। श्रम विभाग ने अब अपने कार्यालयों के नाम, विभाग द्वारा जनता को उपलब्ध कराई जाने वाली विशिष्ट सेवाओं और उन्हें पूरा करने की डेडलाइन को पूरी तरह स्पष्ट कर दिया है।
जवाबदेही तय: अधिकारियों और अपीलीय प्राधिकारियों की नियुक्ति
नई व्यवस्था को सुचारू रूप से लागू करने के लिए विभाग ने केवल समय-सीमा ही तय नहीं की है, बल्कि हर स्तर पर जवाबदेही भी सुनिश्चित की है। इसके तहत:
- पदाभिहित अधिकारी (Designated Officer): जो सीधे तौर पर तय समय में सेवा प्रदान करने के लिए जिम्मेदार होंगे।
- सक्षम अधिकारी (Competent Authority): जो समय-सीमा के भीतर काम न होने पर निगरानी और समीक्षा करेंगे।
- अपीलीय प्राधिकारी (Appellate Authority): यदि तय समय में नागरिक को सेवा नहीं मिलती या आवेदन निरस्त होता है, तो पीड़ित व्यक्ति इनके पास अपनी अपील दर्ज करा सकेगा।
श्रमिकों और आम जनता को मिलेगा सीधा लाभ
श्रम विभाग द्वारा दी जाने वाली सेवाओं जैसे- श्रमिक पंजीयन, विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं का लाभ, लाइसेंस नवीनीकरण और शिकायतों का निवारण अब फाइलों में बंद नहीं रहेगा। कार्य दिवसों (Working Days) के आधार पर समय तय होने से अब आवेदकों को अपने काम के लिए दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। तय समय में जानकारी या सेवा न देने वाले दोषी लोक सेवकों और अधिकारियों पर अधिनियम के प्रावधानों के तहत दंडात्मक कार्रवाई भी की जा सकती है।
정 (श्रम विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, इस कदम का मुख्य उद्देश्य अंतिम छोर पर खड़े श्रमिक तक शासन की योजनाओं को बिना किसी देरी और भ्रष्टाचार के पहुंचाना है।)
इन प्रमुख सेवाओं के लिए तय हुई समय-सीमा (कार्य दिवस):
- नया श्रमिक पंजीयन (संगठित/असंगठित): अधिकतम 15 कार्य दिवस
- विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं की राशि स्वीकृति: अधिकतम 30 कार्य दिवस
- कारखाना/दुकान स्थापना का लाइसेंस जारी करना: अधिकतम 21 कार्य दिवस
- लाइसेंस का नवीनीकरण (Renewal): आवेदन के बाद 15 कार्य दिवस
- श्रमिकों के विवाद/शिकायतों का प्रारंभिक निराकरण: अधिकतम 45 कार्य दिवस
जवाबदेही और अपील की त्रि-स्तरीय व्यवस्था:
- प्रथम स्तर (आवेदन): संबंधित क्षेत्र के श्रम निरीक्षक (Labor Inspector) या उप-श्रम आयुक्त आवेदन स्वीकार कर तय दिनों में सेवा देंगे।
- द्वितीय स्तर (प्रथम अपील): समय पर काम न होने पर आवेदक सहायक श्रम आयुक्त (ALC) के पास शिकायत दर्ज करा सकेंगे।
- तृतीय स्तर (द्वितीय अपील): अंतिम सुनवाई श्रम आयुक्त (Labor Commissioner) या शासन के सचिव स्तर पर होगी, जहाँ दोषी अधिकारी पर जुर्माने की कार्रवाई हो सकती है।
