छत्तीसगढ़ में मिलेट्स क्रांति: कोदो-कुटकी की खेती ने बदली पोटाली और नहाड़ी के युवाओं की तकदीर

रायपुर, 6 जून 2026: मिलेट्स की खेती से समृद्ध हो रहे छत्तीसगढ़ के किसान: कोदो-कुटकी ने बदली पोटाली और नहाड़ी के युवाओं की तकदीर

छत्तीसगढ़ और पूरे भारत में मिलेट्स (मोटा अनाज) की खेती किसानों के लिए वरदान साबित हो रही है। कम लागत, कम पानी और बंजर भूमि में भी बेहतरीन पैदावार देने के कारण मिलेट्स किसानों की आय बढ़ा रहे हैं। कभी पारंपरिक भोजन का हिस्सा रहे रागी (मड़िया), कोदो और कुटकी जैसे मोटे अनाज आज पूरी दुनिया में ‘सुपर फूड’ के रूप में पहचान बना चुके हैं। पौष्टिक गुणों से भरपूर ये अनाज अब घरों के साथ-साथ होटलों और रेस्टोरेंटों में भी पसंद किए जा रहे हैं। बढ़ती मांग और बेहतर बाजार मूल्य ने किसानों के लिए मिलेट (श्री अन्न) की खेती को लाभकारी बना दिया है।

सरकार के प्रयासों से बढ़ा रुझान

केंद्र और राज्य सरकार द्वारा मिलेट फसलों को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। किसानों को प्रोत्साहित करने के लिए विभिन्न योजनाओं के माध्यम से सहायता प्रदान की जा रही है। समर्थन मूल्य में वृद्धि और बाजार उपलब्धता के कारण अब अधिक किसान श्री अन्न की खेती की ओर आकर्षित हो रहे हैं। जिले के ग्राम पोटाली और नहाड़ी के दो युवा किसानों ने कृषक उन्नति योजना का लाभ लेकर मिलेट उत्पादन में उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। उनकी मेहनत और योजना से मिली सहायता ने उनकी आय में बड़ा बदलाव लाया है।

दिलीप मरकाम को हुआ 1.50 लाख का मुनाफा

ग्राम पोटाली के धुरवा पारा निवासी किसान दिलीप मरकाम ने इस वर्ष अपने खेत में कोदो-कुटकी की खेती कर लगभग 1 लाख 50 हजार रुपये का लाभ अर्जित किया। वे अपने 17 हेक्टेयर कृषि क्षेत्र में कोदो-कुटकी के साथ धान और सब्जियों का उत्पादन भी करते हैं। दिलीप ने बताया कि उन्होंने इस वर्ष 88 क्विंटल धान बेचकर लगभग 2 लाख 72 हजार रुपये की आय प्राप्त की। खेती को आधुनिक बनाने के लिए उनके पास पावर टिलर जैसे कृषि यंत्र भी उपलब्ध हैं। वे अपनी आय का एक हिस्सा खेती के विकास और नई तकनीकों को अपनाने में निवेश करना चाहते हैं।

हलदर हेमला ने कमाए 1.20 लाख रुपये

ग्राम नहाड़ी के किसान हलदर हेमला ने भी कोदो-कुटकी की खेती से उल्लेखनीय सफलता प्राप्त की। उन्होंने इस फसल से लगभग 1 लाख 20 हजार रुपये का लाभ कमाया। उनका कहना है कि मिलेट की खेती कम लागत में बेहतर आय देने वाली फसल साबित हो रही है। इन दोनों युवा किसानों की सफलता क्षेत्र के अन्य किसानों के लिए प्रेरणा बन चुकी है।

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