विशेष संवाददाता
रायपुर, 06 जून 2026।कलंक मिटा, कल्याणी बने हाथ: सुकमा में बंदूक छोड़ राजमिस्त्री बन रहे आत्मसमर्पित नक्सली, बनाएंगे गरीबों के आशियाने
बस्तर का नाम आते ही कभी जेहन में बंदूक की गूंज, बारूद की गंध और भय का साया उभर आता था। सुकमा के घने जंगलों में रहने वाली कई पीढ़ियों ने बचपन से केवल संघर्ष देखा। उन्होंने स्कूल की घंटी से ज्यादा बंदूकों की आवाजें सुनीं। लेकिन आज उसी सुकमा की धरती से बदलाव की एक ऐसी बयार चली है, जो पूरे देश को उम्मीद और शांति का नया संदेश दे रही है। यह कहानी उन युवाओं की है जो कभी राह भटक गए थे, पर आज वे विकास की नई इबारत लिख रहे हैं।

राज्य की विष्णुदेव साय सरकार की पुनर्वास नीति इन युवाओं के जीवन में बड़ा उजियारा लेकर आई है। जिला प्रशासन सुकमा और एसबीआई आरसेटी (SBI RSETI) के मिले-जुले प्रयासों से एक अनोखी पहल की गई है। इसके तहत आत्मसमर्पण कर चुके 25 युवाओं को राजमिस्त्री (भवन निर्माण) का खास प्रशिक्षण दिया जा रहा है। सबसे खास बात यह है कि इन युवाओं में 13 महिलाएं और 12 पुरुष शामिल हैं।

टूटती उम्मीदों को जोड़ने का प्रयास
इन युवाओं का अतीत जंगलों के खौफ और अनिश्चित जिंदगी के बीच बीता। वहां जीने का संघर्ष तो था, पर बेहतर भविष्य के सपने देखने की आजादी नहीं थी। आज प्रशिक्षण केंद्र में जब ये युवा हाथों में करनी और साहुल थामते हैं, तो वे केवल ईंट से ईंट नहीं जोड़ते, बल्कि अपनी टूटती उम्मीदों को भी एक नया आकार देते हैं। जो हाथ कभी समाज को नुकसान पहुंचाने के लिए विवश थे, वही हाथ अब समाज के निर्माण में जुट गए हैं।

सीख रहे हैं आधुनिक निर्माण की बारीकियां
इस विशेष प्रशिक्षण शिविर में युवाओं को राजमिस्त्री के काम से जुड़ी हर छोटी-बड़ी तकनीक सिखाई जा रही है। उन्हें आधुनिक निर्माण तकनीक, सही नाप-जोख, दीवारों की चिनाई, प्लास्टर करना और भवन निर्माण के अन्य जरूरी गुर सिखाए जा रहे हैं। अनुभवी प्रशिक्षक उन्हें पूरी बारीकी से काम सिखा रहे हैं ताकि वे आत्मनिर्भर बन सकें।
प्रधानमंत्री आवास योजना में निभाएंगे भूमिका
प्रशिक्षण पूरा होने के बाद इन युवाओं को सीधे रोजगार से जोड़ा जाएगा। ये आत्मसमर्पित युवा आने वाले दिनों में सरकार की महत्वाकांक्षी योजना ‘प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण)’ के तहत मकान बनाएंगे। इसके अलावा अन्य सरकारी निर्माण कार्यों में भी इनकी सेवाएं ली जाएंगी। कल तक जिन हाथों के डर से लोग सहम जाते थे, अब वही हाथ किसी गरीब परिवार के सपनों का आशियाना तैयार करेंगे।
आत्मसम्मान के साथ जीने का नया आधार
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार की प्रशासनिक संवेदनशीलता ने इन युवाओं को केवल आत्मसमर्पण तक सीमित नहीं रखा। सरकार इन्हें मुख्यधारा में लौटाकर समाज में एक सम्मानजनक स्थान दे रही है। यह पुनर्वास कार्यक्रम सुकमा और पूरे बस्तर संभाग के अन्य भटके हुए युवाओं के लिए भी एक मिसाल बन रहा है। यह इस बात का सबूत है कि यदि सही दिशा और अवसर मिले, तो बंदूक थामने वाले हाथ भी देश के विकास में अपना बड़ा योगदान दे सकते हैं।
