रायपुर, 10 जून 2026।
छत्तीसगढ़ में सरकारी स्तर पर दवाओं की गुणवत्ता को लेकर स्वास्थ्य विभाग और छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेस कारपोरेशन लिमिटेड (CGMSC) पूरी तरह मुस्तैद है। गुणवत्ता मानकों से समझौता न करते हुए सीजीएमएससी ने दवा निर्माता फर्म ‘यूनिक्योर इंडिया लिमिटेड’ (Unicure India Ltd.) के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। मध्य प्रदेश में इस फर्म को ब्लैकलिस्ट किए जाने की सूचना मिलते ही छत्तीसगढ़ में इसके नए दर अनुबंधों (रेट कॉन्ट्रैक्ट) और नए क्रयादेशों (सप्लाई ऑर्डर) पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी गई है।

- मध्य प्रदेश में ब्लैकलिस्ट होने के बाद छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेस कारपोरेशन (CGMSC) की बड़ी कार्रवाई
- अमानक (नॉन-स्टैंडर्ड) पाई गई थी ‘लैक्टुलोज सॉल्यूशन’ सिरप, सीजीएमएससी ने पुराने ऑर्डर किए रद्द
- विभाग का दावा- छत्तीसगढ़ में जांच के बाद ही बांटी गई दवाएं, नए आदेशों पर पूरी तरह रोक
क्या है पूरा मामला?
सीजीएमएससी से मिली आधिकारिक जानकारी के अनुसार, दवा निर्माता फर्म ‘यूनिक्योर इंडिया लिमिटेड’ ने बीती 18 मई 2026 को छत्तीसगढ़ कॉर्पोरेशन को एक लिखित सूचना दी थी। इस सूचना में बताया गया था कि मध्य प्रदेश पब्लिक हेल्थ सर्विसेस कारपोरेशन लिमिटेड (भोपाल) ने 8 मई 2026 को एक आदेश जारी किया है। इस आदेश के तहत सरकारी प्रयोगशालाओं में जांच के दौरान फर्म की दवा ‘लैक्टुलोज सॉल्यूशन आईपी 10 ग्राम/15 मिली’ (100 मिली बोतल) के 3 बैच अमानक यानी सब-स्टैंडर्ड पाए गए थे। इसके परिणाम स्वरूप मध्य प्रदेश सरकार ने इस फर्म को ब्लैकलिस्ट (काली सूची में दर्ज) कर दिया है।
छत्तीसगढ़ में पहले ही हो चुकी थी कार्रवाई
इस मामले में छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेस कारपोरेशन ने बेहद सतर्कता दिखाई। मध्य प्रदेश द्वारा उक्त दवा के एक बैच को पहले ही प्रोडक्ट ब्लैकलिस्ट किए जाने के कारण, सीजीएमएससी ने छत्तीसगढ़ की निविदा नियमों के तहत कार्रवाई शुरू कर दी थी। कॉर्पोरेशन ने ‘लैक्टुलोज सॉल्यूशन’ के दर अनुबंध (रेट कॉन्ट्रैक्ट) को पहले ही ब्लॉक कर दिया था और इससे संबंधित सभी पुराने क्रयादेशों (सप्लाई ऑर्डर्स) को निरस्त (कैंसिल) करने की सख्त कार्रवाई की थी।
पुरानी दवाओं का क्या हुआ? छत्तीसगढ़ में वितरण की क्या है स्थिति?
फर्म द्वारा भेजे गए ब्लैकलिस्टिंग आदेश में यह स्पष्ट लिखा है कि यह रोक पूर्व में खरीदी जा चुकी दवाओं या जारी हो चुके ऑर्डर्स पर लागू नहीं होगी, बशर्ते वे दवाएं पूरी तरह सुरक्षित और मानक स्तर की हों।
सीजीएमएससी प्रबंधन ने छत्तीसगढ़ के नागरिकों को आश्वस्त करते हुए बताया है कि यूनिक्योर इंडिया लिमिटेड द्वारा राज्य में पहले जो भी दवाएं सप्लाई की गई थीं, उनका वितरण सीधे नहीं किया गया। उन दवाओं का पहले सीजीएमएससी की अनुबंधित एनएबीएल (NABL) प्रमाणित प्रयोगशालाओं से कड़ा गुणवत्ता परीक्षण कराया गया। लैबोरेट्री से पूरी तरह ‘मानक गुणवत्तायुक्त’ (पास) रिपोर्ट मिलने के बाद ही दवाओं को अस्पतालों में बांटने की मंजूरी दी गई थी।
हाईकोर्ट के फैसले पर टिकी अगली नजर
यूनिक्योर इंडिया लिमिटेड ने छत्तीसगढ़ कॉर्पोरेशन को यह भी बताया है कि उन्होंने मध्य प्रदेश सरकार के इस ब्लैकलिस्टिंग आदेश के खिलाफ माननीय उच्च न्यायालय, मध्य प्रदेश (मुख्य पीठ, जबलपुर) में एक याचिका दायर की है। इस मामले की अहम सुनवाई आज यानी 10 जून 2026 को तय की गई है। अधिकारियों का कहना है कि माननीय उच्च न्यायालय द्वारा इस मामले में जो भी आदेश पारित किया जाएगा, उसके आधार पर छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेस कारपोरेशन लिमिटेड आगे की कानूनी और प्रशासनिक कार्यवाही सुनिश्चित करेगा।
गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं
ब्लैकलिस्टिंग की आधिकारिक जानकारी मिलने के बाद से सीजीएमएससी ने इस फर्म के साथ कोई भी नया बिजनेस या नया अनुबंध नहीं किया है। विभाग का कहना है कि राज्य के सरकारी अस्पतालों में आने वाले मरीजों को सुरक्षित और उच्च गुणवत्ता वाली दवाएं देना उनकी पहली प्राथमिकता है। यह पूरी कार्रवाई सीजीएमएससी की दवा विनियामक मानकों (ड्रग रेगुलेटरी स्टैंडर्ड्स) पर आधारित सख्त प्रक्रिया का हिस्सा है।
