विशेष संवाददाता
रायपुर, 23 जून।छत्तीसगढ़ के खनिज इतिहास में स्वर्णिम अध्याय: महासमुंद के बलौदा-बेलमुंडी में मिले हीरे
एनएमडीसी-सीएमडीसी के वैज्ञानिक अन्वेषण में बड़ी सफलता, 200 टन बल्क सैंपल की प्रोसेसिंग से मिले 5 बेशकीमती हीरे
छत्तीसगढ़ की समृद्ध खनिज संपदा के इतिहास में आज एक नया और ऐतिहासिक अध्याय जुड़ गया है। सूबे के महासमुंद जिले के सरायपाली क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले बलौदा-बेलमुंडी डायमंड ब्लॉक में हीरों की मौजूदगी की आधिकारिक पुष्टि हो गई है। वैज्ञानिक अन्वेषण (Scientific Exploration) के दौरान इस ब्लॉक से हीरे प्राप्त हुए हैं, जिसने छत्तीसगढ़ को वैश्विक खनिज मानचित्र पर एक बेहद मजबूत और नई पहचान देने की दिशा में बड़ा कदम बढ़ाया है।

यह बड़ी कामयाबी संयुक्त उपक्रम ‘एनएमडीसी-सीएमडीसी लिमिटेड’ (NMDC-CMDC Limited) को मिली है। संस्थान द्वारा क्षेत्र से जुटाए गए लगभग 200 टन खनिज सामग्री के बल्क सैंपल का कड़ाई से परीक्षण और प्रसंस्करण (Processing) किया गया। इस पूरी वैज्ञानिक प्रक्रिया के बाद कुल 5 हीरे सफलतापूर्वक प्राप्त किए गए हैं, जिनका कुल वजन 1.22 कैरेट दर्ज किया गया है। विशेषज्ञों के मुताबिक, शुरुआती स्तर पर मिली यह सफलता इस बात का पुख्ता प्रमाण है कि इस पूरे क्षेत्र में बड़े पैमाने पर हीरा खनिजीकरण (Diamond Mineralization) मौजूद है।
दो हीरे ‘जेम क्वालिटी’ के, आधुनिक तकनीकों से मिली सफलता
राज्य शासन को एनएमडीसी-सीएमडीसी लिमिटेड द्वारा सौंपी गई विस्तृत रिपोर्ट के अनुसार, बलौदा-बेलमुंडी क्षेत्र में लंबे समय से वैज्ञानिक पद्धतियों से काम चल रहा था। इसके तहत:
- आधुनिक वैज्ञानिक सर्वेक्षण: पूरे क्षेत्र का जीपीएस और सैटेलाइट आधारित मैपिंग की गई।
- स्ट्रीम सेडिमेंट सैंपलिंग: जलधाराओं के तलछट की बारीकी से जांच की गई।
- भू-भौतिकीय अध्ययन (Geophysical Study): जमीन के भीतर की परतों का एक्स-रे किया गया।
- अन्वेषण ड्रिलिंग: संभावित जगहों पर गहरी खुदाई कर सैंपल निकाले गए।
इन्हीं प्रक्रियाओं के आधार पर एक खास क्षेत्र को चिन्हित कर वहां से 200 टन वजनी बल्क सैंपल एकत्रित किया गया था। सबसे खास बात यह है कि प्रसंस्करण के बाद मिले पांच हीरों में से दो हीरे ‘जेम क्वालिटी’ (रत्न श्रेणी) के हैं, जिनका उपयोग आभूषणों में किया जाता है। वहीं, शेष तीन हीरे अन्य औद्योगिक श्रेणी के हैं।

आर्थिक तरक्की, निवेश और रोजगार के खुलेंगे नए द्वार
खनिज विशेषज्ञों का मानना है कि इस खोज के बाद आने वाले दिनों में छत्तीसगढ़ में बड़े पैमाने पर निवेश का रास्ता साफ होगा। भविष्य में जब यहां व्यावसायिक तौर पर खनन शुरू होगा, तो इससे राज्य सरकार को भारी-भरकम राजस्व (Revenue Generation) प्राप्त होगा। इसके साथ ही सरायपाली और महासमुंद समेत पूरे अंचल में स्थानीय स्तर पर रोजगार के हजारों नए अवसर पैदा होंगे, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था की सूरत बदल जाएगी।
विकसित छत्तीसगढ़ के लक्ष्य को मिलेगी नई मजबूती: मुख्यमंत्री
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर बेहद उत्साह व्यक्त किया है। उन्होंने इसे प्रदेश की आर्थिक क्षमता और प्राकृतिक संसाधनों के वैज्ञानिक दोहन की दिशा में एक क्रांतिकारी मील का पत्थर बताया।
“छत्तीसगढ़ पहले से ही देश के प्रमुख खनिज उत्पादक राज्यों में शामिल है। हम लौह अयस्क, कोयला, बॉक्साइट और चूना पत्थर के उत्पादन में देश का नेतृत्व कर रहे हैं। अब हीरा मिलने की पुष्टि से हमारी खनिज विविधता और समृद्ध होगी। हमारी नीति सिर्फ उत्खनन तक सीमित नहीं है, बल्कि हम खनिज आधारित उद्योगों और वैल्यू एडिशन (मूल्य संवर्धन) पर ध्यान दे रहे हैं ताकि स्थानीय युवाओं को रोजगार मिले। यह खोज ‘विकसित छत्तीसगढ़’ के हमारे संकल्प को साकार करने में बड़ी भूमिका निभाएगी।”
— श्री विष्णु देव साय, मुख्यमंत्री, छत्तीसगढ़
अब आगे क्या?
खनिज विभाग के सूत्रों के मुताबिक, शुरुआती सैंपल में सफलता मिलने के बाद अब इस डायमंड ब्लॉक में आगे की खोज और बड़े पैमाने पर खदान विकसित करने की कार्ययोजना पर काम तेज किया जाएगा। सुरक्षा और पारदर्शी प्रबंधन के साथ इस ब्लॉक के व्यावसायिक इस्तेमाल की रूपरेखा तैयार की जा रही है, जिससे छत्तीसगढ़ देश का एक प्रमुख हीरा उत्पादक राज्य बनकर उभर सके।
