सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के प्रहरी थे डॉ. मुखर्जी, उनका त्याग हमारी अमूल्य धरोहर: सीएम साय

रायपुर, 23 जून 2026: मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने आज राजधानी रायपुर स्थित अपने शासकीय निवास कार्यालय में प्रख्यात शिक्षाविद्, भारत के प्रथम उद्योग मंत्री और महान राष्ट्रवादी चिंतक डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के बलिदान दिवस पर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। मुख्यमंत्री ने डॉ. मुखर्जी के तैलचित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर देश के प्रति उनके अमूल्य योगदान को याद किया।

देश के अखंड भारत के स्वप्नदृष्टा: मुख्यमंत्री

इस गरिमामयी अवसर पर मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के व्यक्तित्व और कृतित्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि डॉ. मुखर्जी भारत की एकता, अखंडता और राष्ट्रीय स्वाभिमान के एक सशक्त प्रहरी थे। उन्होंने ‘एक देश में दो निशान, दो प्रधान और दो विधान नहीं चलेंगे’ का नारा देकर देश में वैचारिक क्रांति की अलख जगाई थी। उनका पूरा जीवन राष्ट्रहित के लिए समर्पित रहा।

मुख्यमंत्री ने डॉ. मुखर्जी के योगदान को रेखांकित करते हुए प्रमुख बातें कहीं:

  • राष्ट्रहित सर्वोपरि: डॉ. मुखर्जी ने हमेशा व्यक्तिगत और राजनीतिक स्वार्थों से ऊपर उठकर राष्ट्रहित को प्राथमिकता दी।
  • वैचारिक आधार: उन्होंने भारतीय राजनीति को एक मजबूत वैचारिक और राष्ट्रवादी आधार प्रदान किया।
  • अमूल्य धरोहर: उनके विचार, कड़ा संघर्ष और सर्वोच्च त्याग भारतीय लोकतंत्र की सबसे बड़ी पूंजी हैं।

आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में मार्गदर्शन

श्री साय ने आगे कहा कि आज जब देश प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में ‘विकसित भारत’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ के निर्माण की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है, तब डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के सिद्धांत और आदर्श देशवासियों को निरंतर सही मार्ग दिखाते हैं। उनके सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के विचारों को आत्मसात करके ही हम एक मजबूत और सशक्त राष्ट्र का निर्माण कर सकते हैं।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री निवास के वरिष्ठ अधिकारी, गणमान्य नागरिक और जनप्रतिनिधि भी उपस्थित थे, जिन्होंने डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के योगदान को स्मरण करते हुए उन्हें अपनी श्रद्धांजलि दी।

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