उदंती-सीतानदी में देश की पहली ‘हॉर्नबिल सफारी’ शुरू: दुर्लभ पक्षियों का दीदार करेंगे पर्यटक, आदिवासियों को मिलेगा सीधा रोजगार

रायपुर 24 जून।

उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में देश की अनूठी ‘हॉर्नबिल सफारी’ की शुरुआत: दुर्लभ पक्षियों का संरक्षण अब बनेगा आदिवासियों के रोजगार का जरिया

वन्यजीव प्रेमियों और पर्यटकों के लिए एक बड़ी खुशखबरी है। छत्तीसगढ़ का उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व अब देश के नक्शे पर बर्ड वॉचिंग (पक्षी दर्शन) के एक बड़े केंद्र के रूप में उभरने जा रहा है। वन मंत्री श्री केदार कश्यप की पहल पर रिजर्व प्रबंधन ने विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह (PVTG) के गांवों ओढ़, अमलोर और आमामोरा में विशेष ‘हॉर्नबिल सफारी’ शुरू करने का ऐतिहासिक निर्णय लिया है।

यह अनूठी पहल न केवल विलुप्तप्राय ‘मालाबार पाइड हॉर्नबिल’ के कुनबे को सुरक्षित करेगी, बल्कि स्थानीय आदिवासियों के आर्थिक सशक्तिकरण का नया रास्ता भी खोलेगी।

रायपुर से कैसे पहुँचें? (मार्ग और दूरी)

राजधानी रायपुर से उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व पहुँचना बेहद आसान है। इसके लिए पर्यटक निम्नलिखित साधनों का उपयोग कर सकते हैं:

  • सड़क मार्ग (दूरी लगभग 170-190 किमी): रायपुर से गरियाबंद और मैनपुर होते हुए उदंती अभ्यारण्य तक पहुँचा जा सकता है। कार, निजी वाहन या नियमित बस सेवा के माध्यम से यह दूरी तय करने में लगभग 4 से 5 घंटे का समय लगता है।
  • निकटतम हवाई अड्डा: रायपुर का स्वामी विवेकानंद हवाई अड्डा (माना) देश के सभी प्रमुख शहरों से जुड़ा हुआ है। हवाई अड्डे से पर्यटक सीधे टैक्सी किराए पर लेकर रिजर्व आ सकते हैं।
  • निकटतम रेलवे स्टेशन: रायपुर जंक्शन सबसे मुख्य रेलवे स्टेशन है, जहाँ से सड़क मार्ग द्वारा आसानी से रिजर्व तक सफर तय किया जा सकता है।

सफारी का समय (टाइमिंग्स)

पक्षियों की चहचहाहट और उनकी दैनिक गतिविधियों को बेहतर ढंग से देखने के लिए वन विभाग ने सफारी को दो मुख्य स्लॉट में विभाजित किया है:

  • सुबह का स्लॉट: प्रातः 07:00 बजे से सुबह 09:30 बजे तक (पक्षी दर्शन और फोटोग्राफी के लिए सबसे उत्तम समय)
  • शाम का स्लॉट: दोपहर बाद 03:30 बजे से शाम 06:00 बजे तक
    (नोट: दोपहर के समय पक्षियों की कम हलचल और वन्यजीवों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए सफारी बंद रहेगी।)

पर्यटकों के रुकने के लिए ‘ईको हट्स कोयबा’ रिसॉर्ट

दूर-दराज से आने वाले पर्यटकों और शोधकर्ताओं के ठहरने के लिए रिजर्व प्रबंधन ने प्रकृति के बीच बेहद खूबसूरत आवास व्यवस्था तैयार की है:

  • कोयबा ईको रिसॉर्ट: पर्यटकों के लिए जंगल के शांत और नैसर्गिक माहौल में ‘ईको हट्स (कॉट्रेज) कोयबा’ का निर्माण किया गया है। ये कॉटेज सभी बुनियादी आधुनिक सुविधाओं से लैस हैं।
  • प्रकृति के करीब अनुभव: यहाँ ठहरने वाले पर्यटक रात में जंगल के शांत वातावरण का अनुभव कर सकते हैं और सुबह होते ही सीधे सफारी के लिए रवाना हो सकते हैं।

बुकिंग प्रक्रिया और महत्वपूर्ण संपर्क सूत्र

इस अनूठी सफारी का आनंद लेने और रिसॉर्ट में रुकने के लिए वन विभाग ने एक पारदर्शी व्यवस्था बनाई है:

  • ऑनलाइन माध्यम: पर्यटक अपनी यात्रा और ठहरने की अग्रिम बुकिंग उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर ऑनलाइन फॉर्म भरकर कर सकते हैं।
  • सीधा संपर्क नंबर: कॉटेज की उपलब्धता जांचने और किसी भी पूछताछ के लिए विभाग के आधिकारिक हेल्पलाइन नंबर 7225823006 एवं 7566510937 पर संपर्क किया जा सकता है। विभाग ने पर्यटकों को सलाह दी है कि वे अपनी यात्रा से पहले इन नंबरों पर कॉल करके कॉटेज की रिक्ति जरूर जांच लें।
  • टिकट दरें: सफारी और एंट्री फीस की आधिकारिक विस्तृत सूची जल्द ही स्थानीय आदिवासियों की संचालन समिति द्वारा काउंटर और वेबसाइट पर लाइव कर दी जाएगी।

‘हॉर्नबिल रेस्टोरेंट’ और ट्रैकिंग टीम से बढ़ी संख्या

उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में पिछले चार वर्षों के भीतर मालाबार पाइड हॉर्नबिल की आबादी में रिकॉर्ड बढ़ोतरी देखी गई है। इस सफलता के पीछे वन विभाग की कड़ी मेहनत और कुछ अनोखे प्रयास शामिल हैं:

  1. एंटी-पोचिंग और अतिक्रमण पर कार्रवाई: जंगलों को शिकारियों और अवैध कब्जों से मुक्त कराया गया।
  2. हॉर्नबिल रेस्टोरेंट: पक्षियों के पसंदीदा फलदार पौधों का संरक्षण और बड़े पैमाने पर रोपण किया गया, जिससे उन्हें पर्याप्त भोजन मिल सके।
  3. विशेष ट्रैकिंग टीम: स्थानीय युवाओं और वन कर्मचारियों की एक टीम लगातार हॉर्नबिल के घोंसलों, अंडों और उनकी गतिविधियों पर चौबीसों घंटे नजर रख रही है।

पर्यटन और पर्यावरण का बेजोड़ संगम

आमतौर पर हॉर्नबिल पक्षी घने जंगलों या पश्चिमी घाट के नम पर्णपाती इलाकों में पाए जाते हैं। लेकिन ओढ़, अमलोर और आमामोरा के ग्रामीणों की जागरूकता के कारण छत्तीसगढ़ का यह इलाका आज हॉर्नबिल के सबसे सुरक्षित ठिकाने के रूप में विकसित हो चुका है। सफारी का संचालन पूरी तरह स्थानीय ग्रामीणों और पीवीटीजी समुदाय के हाथों में होगा, जिससे उन्हें सीधे तौर पर रोजगार मिलेगा। पर्यटकों की सुविधा के लिए प्रारंभिक चरण में दो विशेष जिप्सी वाहनों की व्यवस्था की गई है।

प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख श्री अरुण कुमार पाण्डेय तथा प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यप्राणी) श्री ओ.पी. यादव के कुशल मार्गदर्शन में तैयार इस सफारी के शुरू होने से छत्तीसगढ़ का नाम देश-दुनिया के इको-टूरिज्म के मानचित्र पर बेहद सम्मान के साथ दर्ज हो जाएगा।

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