रायपुर 24 जून ।
छत्तीसगढ़ में 1 जुलाई से लागू होगी ऐतिहासिक “वीबी-जी राम जी योजना”, कैबिनेट ने प्रारूप को दी मंजूरी
प्रदेश के ग्रामीण परिवारों को मिलेगा 125 दिन का गारंटीड रोजगार, सफल क्रियान्वयन के लिए राज्य सरकार ने रखा ₹4,000 करोड़ का भारी-भरकम बजट।
छत्तीसगढ़ के गांवों को आत्मनिर्भर और आर्थिक रूप से समृद्ध बनाने की दिशा में राज्य सरकार ने एक बड़ा फैसला लिया है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के ‘विकसित भारत @2047’ के विजन को धरातल पर उतारने के लिए आगामी 1 जुलाई से पूरे प्रदेश में “विकसित भारत – रोजगार और आजीविका के लिये गारंटी मिशन (ग्रामीण) : वीबी-जी राम जी योजना छत्तीसगढ़” लागू होने जा रही है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में हुई मंत्रिपरिषद की बैठक में भारत सरकार के अधिनियम, 2025 के अनुरूप तैयार इस योजना के नीतिगत प्रारूप को अंतिम मंजूरी दे दी गई है। इस ऐतिहासिक निर्णय के बाद अब मैदानी स्तर पर इसकी प्रदेशव्यापी शुरुआत की तैयारियां युद्धस्तर पर शुरू हो गई हैं।
बजट में ₹4,000 करोड़ का ऐतिहासिक प्रावधान
राज्य के वित्त मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी द्वारा इस योजना के सफल और सुचारू संचालन के लिए छत्तीसगढ़ के बजट में ₹4,000 करोड़ का ऐतिहासिक प्रावधान किया गया है। यह आवंटन पारंपरिक रोजगार योजनाओं की तुलना में काफी अधिक है, जो ग्रामीण विकास के प्रति राज्य सरकार की दृढ़ प्रतिबद्धता को दर्शाता है। इसके साथ ही, भारत सरकार द्वारा केंद्रीय स्तर पर भी इस मिशन के लिए ₹95,692 करोड़ की भारी-भरकम राशि आवंटित की गई है, जिससे छत्तीसगढ़ को अपने ग्रामीण अंचलों का कायाकल्प करने के लिए पर्याप्त वित्तीय मदद मिलेगी।
125 दिन के रोजगार की वैधानिक गारंटी, हर हफ्ते होगा भुगतान
इस योजना के लागू होने से ग्रामीण क्षेत्रों के पात्र परिवारों के वयस्क सदस्यों को प्रत्येक वित्तीय वर्ष में 125 दिनों का अकुशल श्रम आधारित रोजगार प्राप्त करने की वैधानिक गारंटी मिलेगी। पारंपरिक मनरेगा व्यवस्था (जिसमें केवल 100 दिन का प्रावधान था) को अपग्रेड करते हुए इस योजना में कार्य दिवसों को बढ़ाकर 125 दिन किया गया है। ग्रामीणों के आर्थिक सशक्तिकरण के लिए योजना के तहत दी जाने वाली मजदूरी का भुगतान हर हफ्ते सीधे उनके बैंक खातों में (Direct Benefit Transfer – DBT) सुनिश्चित किया जाएगा, जिससे पारदर्शिता बढ़ेगी और बिचौलियों का अंत होगा।
क्यूआर कोड आधारित डिजिटल सुशासन और पीएम गति शक्ति से समन्वय
योजना के क्रियान्वयन में पूरी पारदर्शिता और भ्रष्टाचार-मुक्त व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए डिजिटल सुशासन (Digital Governance) का व्यापक उपयोग किया जा रहा है। अब ग्रामीणों के जॉब कार्ड और मस्टर रोल का मिलान क्यूआर कोड आधारित नई प्रणाली से किया जाएगा। इसके अतिरिक्त, ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे के विकास को गति देने के लिए इस योजना का समन्वय ‘पीएम गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान’ से किया जा रहा है, जिससे विभागीय योजनाओं के अभिसरण (Convergence) को बल मिलेगा।
ग्राम सभाएं तय करेंगी विकास का एजेंडा: ये हैं मुख्य घटक
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के अनुसार, इस योजना के अंतर्गत विकास का मॉडल ‘ऊपर से’ नहीं, बल्कि ‘नीचे से’ तय होगा, जिसमें स्थानीय ग्राम सभाओं की सहमति से ही प्राथमिकताओं के आधार पर कार्यों का चयन किया जाएगा। योजना के मुख्य घटकों में शामिल हैं:
- जल संरक्षण और बाढ़ नियंत्रण: भूजल स्तर को सुधारने के लिए जल संवर्धन कार्य।
- प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन: पर्यावरण और कृषि को बढ़ावा देने वाले कार्य।
- ग्रामीण अधोसंरचना निर्माण: गांवों में आंगनबाड़ी भवनों, सड़कों और परिसंपत्तियों का विकास।
- आजीविकामूलक परिसंपत्तियां: पशुपालन, मत्स्य विकास और टिकाऊ रोजगार के अवसरों का सृजन।
- आपदा प्रबंधन व जलवायु अनुकूल कार्य: ग्रामीण क्षेत्रों को जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से सुरक्षित बनाना।
केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान को लिखा पत्र
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने इस योजना को लेकर केंद्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान को पत्र लिखकर मार्गदर्शन के लिए आभार व्यक्त किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि पूरे प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में वर्तमान में जनभागीदारी बढ़ाने के लिए विशेष प्रशिक्षण शिविर और ग्राम सभाएं आयोजित की जा रही हैं, जिससे ग्रामीणों में भारी उत्साह का वातावरण है।
