माफियाराज पर सीएम साय का ‘डबल प्रहार’: 2 महीने में 1747 केस, ₹6.49 करोड़ जुर्माना और 1500+ गाड़ियां जब्त!

विशेष संवाददाता
रायपुर, 25 जून 2026

रेत, चूना पत्थर और कोयला माफिया पर सीएम साय का ‘डबल वार’: दो महीने में 1747 मामले दर्ज, ₹6.49 करोड़ जुर्माना वसूला

बड़ी कार्रवाई: बिलासपुर और रायगढ़ में भी खनिज उड़नदस्तों की दबिश, भारी मात्रा में कोयला और मुरूम जब्त

जब्ती का आंकड़ा: प्रदेशभर में 1500 से अधिक पोकलेन, हाइवा और ट्रैक्टर ट्रॉली पर लगा सरकारी ताला

छत्तीसगढ़ की अमूल्य खनिज संपदा की लूट करने वाले रेत, चूना पत्थर और कोयला माफियाओं के खिलाफ मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के सख्त प्रशासनिक रुख का बड़ा असर दिखने लगा है। मुख्यमंत्री के कड़े निर्देशों के बाद राज्यभर में खनिजों के अवैध उत्खनन, परिवहन और भंडारण के खिलाफ एक व्यापक विशेष अभियान जारी है। इस अभियान के तहत बीते दो महीनों (अप्रैल और मई 2026) के भीतर ही प्रशासन ने ताबड़तोड़ कार्रवाई करते हुए कुल 1,747 प्रकरण दर्ज किए हैं।

इस कड़ी कार्रवाई के साथ ही राज्य सरकार ने माफियाओं की आर्थिक कमर तोड़ते हुए 6 करोड़ 49 lakh 50 हजार 903 रुपये से अधिक की दाण्डिक राशि (जुर्माना) वसूल की है। शासन के इस ‘डबल वार’ और हाल ही में संशोधित कड़े नियमों से अवैध खनन सिंडिकेट में हड़कंप मचा हुआ है।

1500 से अधिक वाहन और भारी मशीनें जब्त

खनिज विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, इन दो महीनों की कार्रवाई के दौरान पूरे प्रदेश में अवैध परिवहन और उत्खनन में लगे 1,500 से अधिक वाहनों और भारी मशीनों को सीज किया गया है। इसमें नदियों से अवैध रेत निकालने वाली 35 से ज्यादा चेन-माउंटेड पोकलेन और जेसीबी मशीनें शामिल हैं। इसके अलावा, बिना वैध दस्तावेज खनिज ले जाते हुए 900 से अधिक हाइवा/डंपर और 600 से ज्यादा ट्रैक्टर-ट्रॉलियों को विभिन्न थानों और खनिज चौकियों में खड़ा कराया गया है।

बिलासपुर और रायगढ़ बेल्ट में भी उड़नदस्तों की बड़ी सर्जिकल स्ट्राइक

राजधानी और जांजगीर के साथ-साथ बिलासपुर और रायगढ़ संभाग में भी मुख्यमंत्री के निर्देश पर खनिज उड़नदस्तों ने समानांतर कार्रवाई की है:

  • बिलासपुर संभाग: बिलासपुर के सीपत, मस्तूरी और बिल्हा क्षेत्र में अरपा नदी के तटीय इलाकों से अवैध रेत और मुरूम उत्खनन के खिलाफ विशेष रात-कालीन गश्त (Night Patrolling) चलाई गई। यहाँ अवैध रूप से संचालित हो रहे 4 क्रशर प्लांट को मापदंडों के उल्लंघन के आरोप में नोटिस देकर सील किया गया है।
  • रायगढ़ जिला: कोयला हब कहे जाने वाले रायगढ़ के घरघोड़ा, तमनार और खरसिया क्षेत्रों में खनिजों के अवैध परिवहन पर नकेल कसी गई है। यहाँ बिना वैध रॉयल्टी पास (TP) के कोयला परिवहन करते पाए जाने पर कई भारी ट्रकों को जब्त किया गया है। साथ ही, ग्रामीण इलाकों में अवैध रूप से बनाए गए कोयला डिपो और अवैध भंडारण केंद्रों पर छापामार कार्रवाई कर भारी मात्रा में खनिज जब्त किया गया है।

इन विशिष्ट खनिजों के अवैध खेल पर सरकार का कड़ा प्रहार

  • रेत (Sand): मानसून प्रतिबंध (10 जून से 15 अक्टूबर) के बावजूद महानदी, खारुन और अरपा नदी के घाटों पर भारी मशीनों से अवैध रेत खनन जारी था, जिस पर ड्रोन तकनीक का उपयोग कर कार्रवाई की गई।
  • चूना पत्थर (Limestone): बलौदाबाजार-भाटापारा जिले के खपरीडीह और आसपास के ग्रामीण इलाकों में निम्न श्रेणी के चूना पत्थर का बड़े पैमाने पर अवैध उत्खनन पकड़ा गया।
  • मुरूम और गिट्टी (Murrum & Gravel): राजधानी रायपुर के बाहरी इलाकों और जांजगीर-चांपा बेल्ट में बिना वैध रॉयल्टी पर्ची के मुरूम और गिट्टी के अवैध परिवहन और ओवरलोडिंग के सबसे ज्यादा मामले दर्ज किए गए हैं।

  • बलौदाबाजार जिला: चूना पत्थर और मुरूम के अवैध उत्खनन के मामलों में पूरे प्रदेश में शीर्ष पर रहा।
  • जांजगीर-चांपा जिला: खनिजों के अवैध परिवहन (बिना टीपी या फर्जी पास के गाड़ियां दौड़ाना) में सबसे आगे रहा।
  • रायपुर जिला: राजधानी और इसके सीमावर्ती क्षेत्रों में अवैध रूप से खनिजों को डंप करने यानी अवैध भंडारण के सबसे ज्यादा केस पकड़े गए हैं।

साय कैबिनेट का नया नियम: माफियाओं को छोड़ना नामुमकिन

मुख्यमंत्री सचिवालय के सूत्रों के मुताबिक, सीएम विष्णु देव साय ने स्पष्ट किया है कि केवल गाड़ियों की जब्ती से काम नहीं चलेगा, बल्कि भारी आर्थिक दंड से माफियाओं को नेस्तनाबूद किया जाएगा। इसी के तहत राज्य सरकार ने अपने अल्प खनिज नियमों में संशोधन कर जुर्माने की राशि कई गुना बढ़ा दी है:

  1. अवैध उत्खनन और परिवहन के सभी मामलों में अब न्यूनतम समझौता (Compounding) राशि सीधे ₹25,000 तय कर दी गई है।
  2. अवैध परिवहन करने वालों को पकड़े जाने पर खनिज की कुल कीमत के अलावा ₹2,000 प्रति टन का अतिरिक्त जुर्माना भुगतना होगा।
  3. जब्त किए गए वाहनों और भारी पोकलेन मशीनों को छुड़ाने के नियम भी पहले से कहीं अधिक कड़े कर दिए गए हैं।

ड्रोन और उड़नदस्तों की पैनी नजर के साथ जिला कलेक्टरों और पुलिस अधीक्षकों (SPs) को रोजाना की कार्रवाई की रिपोर्ट सीधे मंत्रालय भेजने के निर्देश दिए गए हैं।

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