छत्तीसगढ़ में समान नागरिक संहिता (UCC) का रास्ता साफ, जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में बनी कमेटी: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

रायपुर26 जून । छत्तीसगढ़ में समान नागरिक संहिता (UCC) का रास्ता साफ, जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में बनी कमेटी: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

छत्तीसगढ़ में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करने की दिशा में राज्य सरकार ने एक बड़ा और ऐतिहासिक कदम उठाया है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने घोषणा की है कि प्रदेश में यूसीसी लागू करने के लिए सुप्रीम कोर्ट की सेवानिवृत्त न्यायाधीश (जस्टिस) रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय समिति का गठन कर दिया गया है। यह समिति राज्य के सभी वर्गों, समुदायों और हितधारकों से व्यापक विचार-विमर्श कर अपनी रिपोर्ट सौंपेगी, जिसके आधार पर कानून का मसौदा तैयार किया जाएगा।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा, “हमारे छत्तीसगढ़ में यूसीसी लागू होगा। इसके लिए रिटायर्ड जज मैडम देसाई की अध्यक्षता में कमेटी का गठन हो गया है। वे हर वर्ग के बीच में जाकर अपनी रिपोर्ट देंगी और उसके बाद यूसीसी लागू होगा।”

सभी वर्गों से चर्चा कर तैयार होगी रिपोर्ट

मुख्यमंत्री ने साफ किया कि यूसीसी का मसौदा तैयार करने में पूरी पारदर्शिता और संवेदनशीलता बरती जाएगी। जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई की अगुवाई वाली यह कमेटी छत्तीसगढ़ के आदिवासी समाज, अनुसूचित जाति, अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) और अल्पसंख्यक समुदायों सहित हर वर्ग के लोगों से मुलाकात करेगी। उनके सुझावों, परंपराओं और चिंताओं को सुनने व समझने के बाद ही कमेटी अपनी अंतिम रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंपेगी।

जस्टिस रंजना देसाई के पास है बड़ा अनुभव

समिति की अध्यक्ष बनाई गईं जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई इससे पहले उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता (UCC) का ड्राफ्ट तैयार करने वाली समिति की भी अध्यक्षता कर चुकी हैं। उत्तराखंड देश का पहला ऐसा राज्य है जिसने यूसीसी विधेयक को विधानसभा से पारित कराया है। उनके इस व्यापक अनुभव का लाभ छत्तीसगढ़ सरकार को मिलेगा, जिससे राज्य की भौगोलिक और सामाजिक परिस्थितियों के अनुरूप एक संतुलित मसौदा तैयार किया जा सके।

क्यों अहम है छत्तीसगढ़ में UCC?

छत्तीसगढ़ एक जनजातीय बहुल राज्य है, जहाँ आदिवासियों की अपनी अनूठी सांस्कृतिक परंपराएं, प्रथाएं और पारंपरिक नियम हैं। ऐसे में यूसीसी लागू करने से पहले हर वर्ग को विश्वास में लेना सरकार के लिए सबसे बड़ी चुनौती और प्राथमिकता है। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि उत्तराखंड की तर्ज पर छत्तीसगढ़ सरकार भी आदिवासियों को इस कानून के कुछ कड़े प्रावधानों से छूट देने या उनकी परंपराओं को सुरक्षित रखने का विकल्प चुन सकती है। मुख्यमंत्री के इस बड़े ऐलान के बाद अब प्रदेश की सियासत और प्रशासनिक हलकों में यूसीसी को लेकर सरगर्मियां तेज हो गई हैं।

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