रायपुर, 28 जून 2026।
- रायपुर के डीडीयू ऑडिटोरियम में आयोजित ‘आपातकाल स्मृति दिवस’ समारोह में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने लोकतंत्र सेनानियों को किया नमन
- राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ प्रचारक और मुख्य वक्ता इंद्रेश कुमार बोले— लोकतंत्र सिर्फ शासन प्रणाली नहीं, नागरिकों की जीवन शैली है
- आपातकाल के योद्धाओं के संघर्ष पर आधारित विशेष स्मारिका का हुआ विमोचन; राज्य स्तरीय निबंध प्रतियोगिता के विजेता छात्र भी हुए सम्मानित
छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय आज राजधानी रायपुर के पंडित दीनदयाल उपाध्याय (DDU) ऑडिटोरियम में आयोजित ‘आपातकाल स्मृति दिवस’ के गरिमामयी और ऐतिहासिक लोकतंत्र सेनानी सम्मान समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। इस विशेष अवसर पर मुख्यमंत्री ने वर्ष 1975 के आपातकाल के दौरान देश में लोकतंत्र की पुनर्स्थापना के लिए जेल की अमानवीय यातनाएं सहने वाले और कड़ा संघर्ष करने वाले जांबाज लोकतंत्र सेनानियों का शाल व श्रीफल भेंटकर भावभीनी वंदन और सम्मान किया। मुख्यमंत्री ने सेनानियों के त्याग को रेखांकित करते हुए स्पष्ट शब्दों में कहा कि इन राष्ट्रभक्तों का अद्वितीय संघर्ष हमारी नई और भावी पीढ़ी के लिए राष्ट्रप्रेम और कर्तव्यनिष्ठा का सबसे बड़ा प्रेरणा पुंज है।

समारोह के दौरान मुख्यमंत्री ने लोकतंत्र सेनानियों के गौरवमयी इतिहास और उनके कठिन संघर्षगाथाओं को संजोकर तैयार की गई विशेष स्मारिका “आपातकाल के योद्धा” का विमोचन किया। इसके साथ ही, युवा वर्ग को भारतीय लोकतंत्र के इस महत्वपूर्ण कालखंड के इतिहास से रूबरू कराने के लिए आयोजित की गई राज्य स्तरीय निबंध प्रतियोगिता के मेधावी विजेता छात्र-छात्राओं को मंच से पुरस्कृत व सम्मानित भी किया।
स्वतंत्र भारत का सबसे काला अध्याय था आपातकाल: मुख्यमंत्री साय
समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने कहा कि 25 जून 1975 को लगाया गया आपातकाल स्वतंत्र भारत के इतिहास पर एक ऐसा अमिट और काला धब्बा था, जिसने देश की लोकतांत्रिक आत्मा को झकझोर कर रख दिया था। उस दमनकारी दौर में क्रूर तानाशाही के चलते आम जनता के मौलिक अधिकारों को पूरी तरह छीन लिया गया था और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर ताला लगा दिया गया था।

मुख्यमंत्री ने भावुक होते हुए कहा, “ऐसे भयानक और दमनकारी दौर में भी अपनी जान, नौकरी और परिवारों की चिंता किए बिना जिन वीर राष्ट्रभक्तों ने जेल की कालकोठरियों और अमानवीय कोड़ों की मार सही, लेकिन तानाशाही के सामने घुटने नहीं टेके, वे ही सच्चे अर्थों में इस देश के नायक हैं।” उन्होंने विश्वास दिलाया कि छत्तीसगढ़ सरकार लोकतंत्र सेनानियों के कल्याण, मान-सम्मान और उनकी सुख-सुविधाओं की रक्षा के लिए सदैव पूरी तरह से प्रतिबद्ध है।
संविधान की हत्या करने वालों को देश कभी माफ नहीं करेगा: इंद्रेश कुमार
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के वरिष्ठ प्रचारक और प्रखर विचारक श्री इंद्रेश कुमार ने अपने ओजस्वी और राष्ट्रभक्ति से ओत-प्रोत संबोधन में लोकतंत्र, सांस्कृतिक राष्ट्रवाद और देश निर्माण के मूल्यों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा, “लोकतंत्र केवल एक राजनीतिक प्रणाली, सरकार बनाने का माध्यम या मतपेटियों तक सीमित व्यवस्था नहीं है, बल्कि यह हमारे देश की मिट्टी का जीवन मूल्य और प्रत्येक भारतीय नागरिक की जीवन शैली है।”
श्री इंद्रेश कुमार ने आपातकाल के क्रूर दिनों को याद दिलाते हुए कहा कि वह भारतीय लोकतंत्र की सबसे कठिन अग्निपरीक्षा का काल था, जब तत्कालीन सत्ता द्वारा देश के पावन संविधान की खुलेआम हत्या की गई थी। उन्होंने आह्वान किया कि आज की युवा पीढ़ी को इस खुली हवा और सुरक्षित लोकतंत्र की कीमत को समझना चाहिए, जिसे हमारे बुजुर्गों ने अपना सर्वस्व दांव पर लगाकर बचाया है।
इतिहास से जुड़ी नई पीढ़ी, निबंध प्रतियोगिता के विजेता हुए पुरस्कृत
आयोजन समिति ने इस बार युवा पीढ़ी और छात्र-छात्राओं को आपातकाल के वास्तविक इतिहास से जोड़ने के लिए प्रदेश स्तर पर एक वृहद निबंध प्रतियोगिता का आयोजन किया था। इस प्रतियोगिता के माध्यम से स्कूलों और कॉलेजों के हजारों छात्र-छात्राओं ने उस दौर के संघर्षों और राजनीतिक घटनाक्रमों का गहन अध्ययन किया। मुख्यमंत्री ने प्रतियोगिता के प्रथम, द्वितीय और तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को मंच पर प्रशस्ति पत्र और पुरस्कार देकर उनकी वैचारिक परिपक्वता और उत्कृष्ट लेखन की जमकर सराहना की।
मंच पर दिग्गजों की रही मौजूदगी
इस भव्य और गरिमामयी सम्मान समारोह में मुख्य वक्ता श्री इंद्रेश कुमार के साथ विशिष्ट अतिथि के रूप में छत्तीसगढ़ विधानसभा के अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह, प्रदेश सरकार के उप-मुख्यमंत्रीद्वय, स्थानीय विधायकगण, लोकतंत्र सेनानी संघ के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सच्चिदानंद उपासने सहित शासन के वरिष्ठ अधिकारी, प्रबुद्ध नागरिक, देशप्रेमी और बड़ी संख्या में युवा छात्र उपस्थित रहे। कार्यक्रम के दौरान जब मुख्यमंत्री ने बुजुर्ग सेनानियों का चरण स्पर्श कर आशीर्वाद लिया, तो पूरा ऑडिटोरियम ‘भारत माता की जय’ और ‘लोकतंत्र अमर रहे’ के गगनभेदी नारों से गुंजायमान हो उठा।
