इंदिरा गांधी ने कुर्सी बचाने के लिए की थी संविधान की हत्या, युवा पीढ़ी जाने आपातकाल का काला सच: CM विष्णु देव साय

विशेष संवाददाता, रायपुर 28 जून

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने आपातकाल (इमरजेंसी) को भारतीय इतिहास का एक काला अध्याय बताते हुए कहा है कि देश की आने वाली पीढ़ी को इस क्रूर कालखंड की पूरी जानकारी होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि 25 जून 1975 को तत्कालीन प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के ऐतिहासिक निर्णय को स्वीकार नहीं किया। अपने पद से इस्तीफा देने के बजाय उन्होंने देश के संविधान की हत्या करते हुए आपातकाल लागू कर दिया था।

मुख्यमंत्री साय ने यह बातें ‘लोकतंत्र सेनानी संघ’ द्वारा आयोजित एक भव्य प्रदेश स्तरीय कार्यक्रम के दौरान कहीं। इस गरिमामय समारोह में लोकतंत्र की रक्षा के लिए जेल जाने वाले और प्रताड़ना सहने वाले प्रदेशभर के लोकतंत्र सेनानियों (मीसा बंदियों) का शॉल और श्रीफल देकर भव्य सम्मान किया गया।

निबंध प्रतियोगिता के विजेता छात्र हुए पुरस्कृत

युवा पीढ़ी को आपातकाल के स्याह सच से रूबरू कराने के लिए संघ द्वारा एक विशेष निबंध प्रतियोगिता का आयोजन भी किया गया था। इस प्रतियोगिता में राज्यभर के स्कूली और कॉलेज के विद्यार्थियों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। मुख्यमंत्री ने प्रतियोगिता के विजेता छात्र-छात्राओं को मंच से पुरस्कृत किया और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। उन्होंने कहा कि इस तरह के रचनात्मक आयोजनों से युवाओं में राष्ट्रवाद और लोकतंत्र के प्रति सम्मान की भावना और मजबूत होगी।

“सच्चाई जानकर ही मजबूत होगा लोकतंत्र”

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने लोकतंत्र सेनानियों के संघर्ष को नमन करते हुए कहा कि आज हम जिस स्वतंत्र माहौल में सांस ले रहे हैं, वह इन सेनानियों के त्याग और बलिदान का परिणाम है। उन्होंने जोर देकर कहा, “इलाहाबाद कोर्ट के फैसले को दरकिनार कर जिस तरह तानाशाही थोपी गई थी, वह इतिहास हमें सिखाता है कि लोकतंत्र की रक्षा कितनी जरूरी है। जब युवा पीढ़ी इस सच्चाई को जानेगी, तभी वे लोकतंत्र के सजग प्रहरी बनेंगे।”

कार्यक्रम की मुख्य बातें:

  • सेनानियों का महासम्मान: छत्तीसगढ़ के कोने-कोने से आए लोकतंत्र सेनानियों का राजकीय सम्मान के साथ अभिनंदन किया गया।
  • इतिहास की सीख: वक्ताओं ने आपातकाल के दौरान प्रेस पर लगी पाबंदी और मौलिक अधिकारों के हनन पर प्रकाश डाला।
  • युवाओं की भागीदारी: निबंध प्रतियोगिता के जरिए सैकड़ों छात्रों ने आपातकाल के दौरान हुए दमन और लोकतंत्र की पुनर्स्थापना के विषय पर अपने विचार साझा किए।

यह कार्यक्रम प्रदेशभर में चर्चा का विषय बना हुआ है, और मुख्यमंत्री के इस कड़े बयान को राजनीतिक हलकों में भी बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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