​”पैरों पर खड़ा करना ही सच्ची सेवा” — सीएम विष्णु देव साय ने जांजगीर के ‘सोठी आश्रम’ को बताया मानवता का तीर्थ

रायपुर/जांजगीर-चांपा 3 जुलाई : विशेष प्रतिनिधि,

मानवता और सेवा का सच्चा तीर्थ: जांजगीर का ‘सोठी आश्रम’ बना गरिमा-आधारित पुनर्वास का देशव्यापी मॉडल

भारत में भले ही कुष्ठ रोग के आंकड़ों में कमी आई हो, लेकिन इस बीमारी से जुड़ा सामाजिक कलंक और प्रभावित लोगों के सम्मानजनक पुनर्वास की चुनौती आज भी एक कड़वी हकीकत है। इलाज के बाद शारीरिक रूप से ठीक हो चुके लोगों को आज भी समाज की दूरी, उपेक्षा और मानसिक पीड़ा का सामना करना पड़ता है। ऐसे अंधकारमय परिदृश्य में छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा जिले के सोठी (कात्रेनगर) में स्थित ‘भारतीय कुष्ठ निवारक संघ आश्रम’ उम्मीद की एक ऐसी चमकदार किरण बनकर उभरा है, जिसने सेवा और पुनर्वास की परिभाषा को ही बदल दिया है।

​यह संस्थान महज एक उपचार केंद्र नहीं, बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य, सामाजिक न्याय और मानवीय गरिमा का एक ऐसा अनूठा मॉडल है, जहां कुष्ठ रोगियों को सिर्फ सहानुभूति या दान नहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता का अधिकार दिया जाता है।

​## छह दशकों का सफर: पीड़ा से आत्मसम्मान तक की यात्रा

​इस अद्वितीय आश्रम की नींव 5 अप्रैल 1962 को एक ऐसे दूरदर्शी शख्सियत द्वारा रखी गई थी, जो स्वयं इस बीमारी का दंश झेल चुके थे— स्वर्गीय सदाशिव गोविंद कात्रे

  • स्थापना का मूल मंत्र: शुरुआत से ही इस संस्थान का उद्देश्य रोगियों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ना और उन्हें समाज में सिर उठाकर जीने का हौसला देना रहा है।
  • बदलाव का केंद्र: बीते छह दशकों में यह आश्रम दान-पुण्य की संकीर्ण मानसिकता से आगे बढ़कर ‘गरिमा-आधारित पुनर्वास’ का एक जीवंत उदाहरण बन चुका है।

​## सुविधाएं ऐसी जो बड़े अस्पतालों को दें मात

​सोठी आश्रम में मरीजों को केवल दवाइयां नहीं दी जातीं, बल्कि उनके संपूर्ण जीवन को संवारा जाता है। वर्तमान में यहाँ 75 मरीज गरिमापूर्ण जीवन बिता रहे हैं, जिनकी सेवा में 120 समर्पित सेवाभावी दिन-रात जुटे हैं।

आश्रम की प्रमुख चिकित्सा सुविधाएं:

  • निःशुल्क उपचार: परिसर में 20 बिस्तरों का सर्वसुविधायुक्त अस्पताल संचालित है, जहां मरीजों को मुफ्त इलाज, दवाइयां, पट्टी, भोजन और वस्त्र उपलब्ध कराए जाते हैं।
  • आधुनिक डायग्नोस्टिक्स: आश्रम के भीतर ही अत्याधुनिक लैब और एक्स-रे जैसी जांच सुविधाएं मौजूद हैं। गंभीर स्थिति होने पर मरीजों को उच्च स्तरीय अस्पतालों में रेफर करने की भी व्यवस्था है।
  • सामुदायिक स्वास्थ्य: आश्रम सिर्फ अपने परिसर तक सीमित नहीं है। अब तक इस संस्थान के माध्यम से 10 हजार से अधिक मोतियाबिंद ऑपरेशन सफलतापूर्वक किए जा चुके हैं। हाल ही में आयोजित स्वास्थ्य शिविर में 300 से अधिक ग्रामीणों की जांच की गई और उन्हें कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों के प्रति जागरूक किया गया।

​## इलाज के बाद आत्मनिर्भरता: हुनर से बदल रही है तकदीर

​सोठी आश्रम की सबसे बड़ी ताकत इसका ‘स्वावलंबन मॉडल’ है। बीमारी ठीक होने के बाद यहां के निवासियों को विभिन्न विधाओं में प्रशिक्षित किया जाता है ताकि वे किसी पर बोझ न रहें।

  • कृषि और बागवानी: मरीज आश्रम की भूमि पर खेती और बागवानी कर अन्न उपजाते हैं।
  • हस्तशिल्प और कुटीर उद्योग: चॉक, कालीन, रस्सी बनाना और सिलाई जैसे कार्यों से मरीज आर्थिक रूप से सशक्त हो रहे हैं।
  • तकनीकी एवं आधुनिक कौशल: यहां युवाओं और मरीजों को कंप्यूटर संचालन, वेल्डिंग और वाहन ड्राइविंग का भी प्रशिक्षण दिया जाता है।
  • भावी पीढ़ी की चिंता: आश्रम में रह रहे परिवारों के बच्चों की शिक्षा-दीक्षा का पूरा खर्च और जिम्मेदारी भी संस्थान स्वयं उठाता है।

​## मुख्यमंत्री का दौरा: “यह ईंट-पत्थर का नहीं, करुणा का तीर्थ है”

​छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने बुधवार को सोठी आश्रम का सघन दौरा किया। उन्होंने परिसर में स्थित संत गुरु घासीदास चिकित्सालय का बारीकी से निरीक्षण किया और संस्था की सेवा गतिविधियों की खुलकर सराहना की।

​मुख्यमंत्री साय ने भावुक होते हुए कहा:

​”कुष्ठ रोग केवल एक शारीरिक पीड़ा नहीं है, बल्कि यह सामाजिक उपेक्षा और भेदभाव का एक गहरा जख्म भी रहा है। ऐसे दौर में सोठी आश्रम मानवता, करुणा और सेवा का सच्चा तीर्थ है। किसी व्यक्ति को आत्मसम्मान के साथ अपने पैरों पर खड़ा करना ही समाज की सबसे बड़ी और सच्ची सेवा है। ऐसे लोगों को सुरक्षा और आत्मविश्वास देना हम सबकी सामूहिक जिम्मेदारी है।”

​## संपादकीय दृष्टिकोण: असली प्रगति का पैमाना

​आज के दौर में जब विकास की परिभाषा अक्सर गगनचुंबी इमारतों, चमचमाती सड़कों और विदेशी निवेश तक सीमित मान ली जाती है, तब सोठी आश्रम हमें एक नया दृष्टिकोण देता है। यह संस्थान चीख-चीख कर कहता है कि किसी भी प्रगतिशील समाज की असली पहचान इस बात से तय होती है कि वह अपने सबसे कमजोर, उपेक्षित और वंचित तबके को कितना सहारा, सम्मान और स्वावलंबन दे पाता है। सोठी का यह मॉडल आज पूरे देश के लिए अनुकरणीय है।

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