सरहदें मिलेंगी, संवरेगा भविष्य: छत्तीसगढ़-झारखंड के बीच ‘साझा विकास’ का नया युग शुरू

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और झारखंड के वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर के बीच महामंथन; सीमावर्ती जिलों की बदलेगी सूरत

विशेष खोजी ब्यूरो | रायपुर, 7 जुलाई 2026

​छत्तीसगढ़ और झारखंड की सीमा पर बसे लाखों नागरिकों के लिए आज का दिन एक ऐतिहासिक मोड़ साबित होने जा रहा है। मंत्रालय महानदी भवन में आज जब छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय और झारखंड के वित्त मंत्री श्री राधाकृष्ण किशोर के बीच मुलाकात हुई, तो वह सिर्फ एक शिष्टाचार भेंट नहीं थी, बल्कि दो राज्यों के बीच ‘इंटीग्रेटेड रीजनल ग्रोथ’ (एकीकृत क्षेत्रीय विकास) का एक नया घोषणापत्र थी।

​सदियों पुराने ‘रोटी-बेटी’ और सांस्कृतिक संबंधों को अब दोनों राज्यों की सरकारें आर्थिक और ढांचागत प्रगति की नई ताकत बनाने जा रही हैं।

​”जशपुर से झारखंड तक… हमारा खून का रिश्ता है”: मुख्यमंत्री साय

​बैठक में मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने बेहद भावुक और कूटनीतिक रूप से मजबूत संदेश दिया। उन्होंने कहा:

​”छत्तीसगढ़ और झारखंड केवल नक्शे पर एक-दूसरे के पड़ोसी नहीं हैं। हमारी आत्मा एक है। हमारे बीच सामाजिक, सांस्कृतिक और पारिवारिक संबंधों की वो मजबूत दीवार है जिसे कोई सरहद अलग नहीं कर सकती। विशेष रूप से जशपुर अंचल का झारखंड के साथ वर्षों पुराना आत्मीय और पारिवारिक जुड़ाव रहा है। इसी अटूट विश्वास के दम पर अब हम विकास की नई ऊंचाइयों को छुएंगे।”

4 बड़े फैसले: जो इस मुलाकात को बनाते हैं ‘गेम चेंजर’

​यह मुलाकात दोनों राज्यों की राजनीति और भूगोल को बदलने वाली साबित होगी, क्योंकि इसमें इन चार अहम रणनीतिक बिंदुओं पर सीधी सहमति बनी है:

विषयअसर और रणनीति
बॉर्डर इंफ्रास्ट्रक्चरदोनों राज्यों की सीमाओं पर कनेक्टिविटी (सड़क, पुल-पुलिया) को रिकॉर्ड समय में सुधारा जाएगा।
वेलफेयर मॉडल शेयरिंगछत्तीसगढ़ की जनजातीय कल्याण और किसान केंद्रित योजनाओं का लाभ झारखंड अपने यहाँ लागू करने में लेगा।
आर्थिक कॉरिडोरसीमावर्ती जिलों में स्थानीय वनोपज, कृषि और व्यापार को बढ़ावा देने के लिए साझा कूटनीति बनेगी।
अंतिम व्यक्ति तक पहुंचसीमाओं पर बसे उन गांवों तक विकास पहुंचेगा जो भौगोलिक दिक्कतों के कारण पीछे छूट गए थे।

सरहद की सियासत से आगे… जनता का सीधा फायदा

​मुख्यमंत्री श्री साय ने साफ किया कि इस नए गठबंधन और परस्पर अनुभवों के आदान-प्रदान से दोनों राज्यों में विकास के नए अवसर पैदा होंगे। इसका सबसे बड़ा और सीधा लाभ सीमावर्ती क्षेत्रों के उन नागरिकों को मिलेगा जो बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष करते हैं।

​झारखंड के वित्त मंत्री श्री राधाकृष्ण किशोर ने मुख्यमंत्री श्री साय के इस ‘विजनरी लीडरशिप’ का लोहा माना। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की विकास नीतियां आज देश के लिए एक रोल मॉडल हैं और दोनों राज्यों का यह समन्वय मध्य भारत के विकास में मील का पत्थर साबित होगा।

​संपादकीय नजरिया (ब्यूरो रिपोर्ट)

क्यों खास है यह मुलाकात?

जशपुर और उससे लगे झारखंड के इलाके हमेशा से एक-दूसरे पर सामाजिक रूप से निर्भर रहे हैं। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय खुद इसी अंचल (जशपुर) से आते हैं, इसलिए वे इन जमीनी रिश्तों की गहराई और वहां की जरूरतों को बखूबी समझते हैं। साय सरकार का यह ‘पड़ोसी प्रथम’ (Neighbour First) का रुख आने वाले दिनों में मध्य भारत की राजनीति और विकास की दिशा तय करेगा।

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