बदलेगी युवाओं की तकदीर, कप्तानों को मिली 2 साल की कमान; लापरवाही पर कड़े एक्शन के निर्देश
विशेष संवाददाता |रायपुर 8 जुलाई।
छत्तीसगढ़ के कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS) को नई ऊर्जा और धार देने के लिए उच्च शिक्षा विभाग ने अब तक का सबसे बड़ा प्रशासनिक फेरबदल किया है। मंत्रालय (महानदी भवन, नवा रायपुर) से जारी एक हाई-प्रोफाइल आदेश के तहत राज्य में 29 धुरंधर प्राध्यापकों को उनके वर्तमान शैक्षणिक दायित्वों के साथ-साथ 02 वर्षों के लिए अंशकालीन जिला संगठक (District Organizer) की कमान सौंप दी गई है। राज्य एनएसएस अधिकारी डॉ. नीता बाजपेयी के डिजिटल दस्तखत से जारी यह आदेश सोशल मीडिया से लेकर शैक्षणिक गलियारों तक चर्चा का विषय बना हुआ है।

### किसे कहाँ की मिली कमान? ये हैं ‘रासेयो’ के नए सेनापति:
मैदानी स्तर पर मोर्चा संभालने के लिए विभाग ने बेहद अनुभवी चेहरों पर दांव लगाया है:
- राजधानी रायपुर (शहरी): डॉ. रात्री लहरी (गुरुकुल महिला महाविद्यालय) को कमान सौंपी गई है।
- रायपुर (ग्रामीण): डॉ. आर. के. रजक (सेठ फूलचंद अग्रवाल स्मृति महाविद्यालय, नवापारा) मोर्चा संभालेंगे।
- दुर्ग (हाई-प्रोफाइल जिला): श्री सुरेश कुमार ठाकुर (इंदिरा गांधी शासकीय पीजी कॉलेज, वैशाली नगर) को जिम्मेदारी दी गई है।
- न्यायधानी बिलासपुर: श्री शीतेश जैन (शासकीय कॉलेज कोटा) को नया जिम्मा मिला है।
- राजनंदगांव: श्रीमती मोनिका दास (मनीमाता शासकीय कन्या पॉलिटेक्निक) पर भरोसा जताया गया है।
- बस्तर व सरगुजा अंचल: बस्तर में सुश्री मौसमी विश्वास और सरगुजा में श्री खेमकरण अहिरवार को कमान देकर आदिवासी अंचलों में रासेयो को मजबूत करने का टास्क दिया गया है।
- महीने में दौरा और ऑन-स्पॉट रिपोर्टिंग: नए जिला संगठकों को हर महीने अपने जिले की रासेयो इकाइयों का तूफानी दौरा करना होगा। निरीक्षण की रिपोर्ट सीधे विश्वविद्यालयीन और राज्य एनएसएस प्रकोष्ठ को अनिवार्य रूप से भेजनी होगी।
- कलेक्टरों के साथ सीधे ‘नेटवर्किंग’: अब कागजों पर काम नहीं चलेगा। जिला संगठकों को सीधे अपने जिले के कलेक्टर से तालमेल बिठाकर ‘जिला स्तरीय सलाहकार समिति’ का गठन करना होगा और नियमित तौर पर हाई-लेवल बैठकें बुलानी होंगी।
- बजट का सीधा हिसाब: रासेयो के छात्रों की संख्या के आधार पर ही यात्रा और बैठकों के खर्च (अधिकतम वार्षिक व्यय) को हरी झंडी मिलेगी। हालांकि, बेहतर काम के लिए संगठकों को हर महीने जेब खर्च भी दिया जाएगा।
- कृषि और तकनीकी कॉलेजों पर भी नजर: सामान्य कॉलेजों के साथ-साथ जिले में आने वाले कृषि और इंजीनियरिंग/तकनीकी कॉलेजों की रासेयो गतिविधियों का पूरा ब्यौरा भी इन प्रभारियों को तैयार करना होगा।
