अब पटवारी-तहसील के चक्करों से मुक्ति: सीधे किसानों के व्हाट्सएप पर कूरियर होंगे बी-1 और खसरा दस्तावेज!
अबूझमाड़ में जमीन सर्वे को टॉप प्रायोरिटी; दिसंबर 2026 तक डिजिटल हो जाएंगे छत्तीसगढ़ के नक्शे
रायपुर, 7 जुलाई। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने सूबे के राजस्व प्रशासन को लेकर अब तक का सबसे सख्त रुख अख्तियार किया है। मंत्रालय महानदी भवन में राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग की हाई-लेवल मीटिंग में मुख्यमंत्री ने दो टूक चेतावनी दी—“राजस्व मामलों में लापरवाही, गड़बड़ी या भ्रष्टाचार किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं होगा। आम जनता और किसानों को दफ्तरों के चक्कर काटने को मजबूर किया, तो सीधे गाज गिरेगी।” मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को दो टूक निर्देश दिए हैं कि हर नागरिक को समय-सीमा के भीतर पारदर्शी और जवाबदेह सेवाएं मिलनी ही चाहिए।

बदलाव की बड़ी पहल: मोबाइल पर ‘डिजिटल किसान किताब’
अखबारों और दफ्तरों की कतारों को खत्म करने के लिए मुख्यमंत्री ने तकनीक का ब्रह्मास्त्र चलाने के निर्देश दिए हैं। अब किसानों को बी-1, खसरा, ऋण पुस्तिका और जमीन के अन्य कागजात के लिए तहसील या पटवारी के चक्कर नहीं काटने होंगे। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिए कि:
- ऐसी पुख्ता व्यवस्था तैयार की जाए जिससे ये तमाम दस्तावेज सीधे व्हाट्सएप (WhatsApp) पर उपलब्ध हो सकें।
- शासन के इस डिजिटल रिफॉर्म का सीधा फायदा गांव के अंतिम व्यक्ति तक तय समय में पहुंचना चाहिए।

प्रशासनिक सर्जरी: ‘वसुंधरा’ और ‘साइबर तहसील’ से म्यूटेशन होगा चुटकियों में
जमीन के रिकॉर्ड्स में हेरफेर और जालसाजी को पूरी तरह खत्म करने के लिए राज्य में VASUNDHARA (Verified Accessible System for Unified Digital Land Records & Historical Archives) प्रोजेक्ट को वॉर-फुटिंग पर लागू किया जा रहा है।
इस महा-परियोजना से क्या बदलेगा?
- मिनटों में नकल: पूरे प्रदेश के तहसील और जिला रिकॉर्ड्स का एक सेंट्रलाइज्ड डिजिटल आर्काइव (एकीकृत डिजिटल अभिलेखागार) बनेगा, जिससे सर्टिफाइड कॉपी महज कुछ ही मिनटों में मिल जाएगी।
- कागजी हेरफेर बंद: डेटा पूरी तरह एन्क्रिप्टेड और सुरक्षित होगा, जिससे भू-अभिलेखों में बैकडेट एंट्री या छेड़छाड़ का चांस जीरो हो जाएगा।
- साइबर तहसील से ऑटो-म्यूटेशन: अविवादित नामांतरण और बंटवारे के लिए ‘साइबर तहसील’ व्यवस्था लागू होगी, जिसमें मानवीय दखल न्यूनतम होगा।
BREAKING HIGHLIGHTS
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│ ◼ पंचायतों को पावर: अब अविवादित फौती नामांतरण सीधे ग्राम पंचायतों से होंगे।│
│ ◼ आपदा राहत (RBC 6-4) ऑनलाइन: पीड़ित खुद ट्रैक कर सकेंगे अपना मुआवजा। │
│ ◼ सीमांकन की डेडलाइन: समय-सीमा से बाहर पेंडिंग केसों की होगी जिला-वार समीक्षा।│
│ ◼ मेगा भर्ती: पटवारी, आरआई (RI) और क्लर्कों के खाली पदों पर तुरंत होगी भर्ती।│
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अबूझमाड़ में सर्वे और नक्शा प्रोजेक्ट पर टाइमलाइन सेट
दशकों से असर्वेक्षित रहे अबूझमाड़ क्षेत्र को लेकर मुख्यमंत्री ने संवेदनशीलता दिखाते हुए निर्देश दिया कि वहां सर्वे का काम सर्वोच्च प्राथमिकता पर पूरा किया जाए, ताकि स्थानीय आदिवासियों को जमीन का हक और सरकारी योजनाओं का लाभ मिल सके।
इसके साथ ही, धमतरी, अंबिकापुर और जगदलपुर में चल रहे नक्शा डिजिटाइजेशन पायलट प्रोजेक्ट को दिसंबर 2026 तक हर हाल में पूरा करने की डेडलाइन सेट कर दी गई है। तहसीलदारों को फील्ड पर मुस्तैद रखने के लिए गाड़ियां और तहसीलों के इंफ्रास्ट्रक्चर को अपग्रेड करने के भी निर्देश जारी कर दिए गए हैं।
समीक्षा में रहे मौजूद:
इस अहम बैठक में राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा, मुख्य सचिव विकास शील, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह, राजस्व सचिव श्रीमती शम्मी आबिदी सहित भूमि-अभिलेख और राजस्व विभाग के शीर्ष कमांडर मौजूद थे।
