रायपुर में मध्य भारत के सबसे बड़े ‘व्यापारिक गढ़’ का उदय; ₹221 करोड़ का महा-मार्केट अब ‘सरदार पटेल’ के नाम

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने किया डुमरतराई फेस-2 का ऐतिहासिक लोकार्पण; परिसर में आकार लेगी ‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी’ की तर्ज पर लौह पुरुष की 15 फीट ऊंची गगनचुंबी प्रतिमा

  • इंफ्रास्ट्रक्चर क्रांति: NH-30 पर 36 एकड़ का हाई-टेक कैंपस, जो छत्तीसगढ़ की आर्थिक रफ्तार को 4G स्पीड देगा।
  • मास्टरस्ट्रोक: नामकरण से लेकर 15 फीट ऊंची प्रतिमा तक, राष्ट्रीय अस्मिता और व्यापारिक गौरव का अनूठा संगम।
  • सिटी रिलीफ: शहर के भीतर से थोक कारोबार शिफ्ट होने से राजधानी को मिलेगी ‘ट्रैफिक जाम’ के अभिशाप से मुक्ति।

विशेष संवाददाता | रायपुर 9 जुलाई।

छत्तीसगढ़ के आर्थिक भूगोल में 9 जुलाई 2026 का दिन एक युगांतरकारी मोड़ के रूप में दर्ज हो गया है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने आज राजधानी के डुमरतराई में छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल (हाउसिंग बोर्ड) द्वारा निर्मित ‘नवीन थोक बाजार फेस-2’ का भव्य लोकार्पण कर राज्य को मध्य भारत के सबसे आधुनिक व्यापारिक हब की सौगात दी। इस ऐतिहासिक मंच से मुख्यमंत्री ने एक बड़ा मास्टरस्ट्रोक खेलते हुए ऐलान किया कि इस अत्याधुनिक परिसर को अब ‘लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल थोक बाजार’ के नाम से जाना जाएगा, जहाँ ₹145 करोड़ के दूसरे चरण के कार्यों के साथ ही सरदार पटेल की 15 फीट ऊंची भव्य प्रतिमा भी राष्ट्र को समर्पित की जाएगी।

​लोकार्पण के बाद प्रदेश के चेंबर ऑफ कॉमर्स और शीर्ष व्यापारिक संगठनों के महाजुटान को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा, “सरदार पटेल ने 562 रियासतों का विलय कर जिस अखंड भारत की नींव रखी थी, यह आधुनिक बाजार छत्तीसगढ़ के आर्थिक एकीकरण की वैसी ही एक मजबूत कंक्रीट संरचना है। यह परिसर राष्ट्र निर्माता के प्रति हमारी कृतज्ञता का प्रतीक बनेगा।”

अर्थव्यवस्था का नया ‘ग्रोथ इंजन’: व्यापार से खुलेगा रोजगार का महाद्वार

​मुख्यमंत्री ने आर्थिक दर्शन को रेखांकित करते हुए कहा कि व्यापार और रोजगार एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। जहाँ विश्वस्तरीय अधोसंरचना (वर्ल्ड-क्लास इंफ्रास्ट्रक्चर) तैयार होती है, वहाँ पूंजी का प्रवाह स्वतः बढ़ता है। राष्ट्रीय राजमार्ग-30 पर 36 एकड़ में फैला यह लॉजिस्टिक और कमर्शियल हब छत्तीसगढ़, ओडिशा, झारखंड और मध्य प्रदेश के व्यापारिक ताने-बाने को री-डिफाइन करेगा। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि उनकी सरकार ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ को केवल कागजों पर नहीं, बल्कि ‘ईज ऑफ लिविंग’ के जरिए आम आदमी के जीवन को सुगम बनाने के धरातल पर उतार रही है।

बजट और विन्यास: दो चरणों की इंजीनियरिंग में खड़ा हुआ ‘व्यापारिक साम्राज्य’

​यह पूरा प्रोजेक्ट हाउसिंग बोर्ड के कुशल वित्तीय प्रबंधन और स्थापत्य कला का बेहतरीन उदाहरण है:

विकास का चरणबुनियादी ढांचा और स्वरूपवित्तीय निवेश
प्रथम चरण (Phase-1)536 सुव्यवस्थित व्यावसायिक दुकानें एवं विशाल कवर्ड हॉल₹76 करोड़
द्वितीय चरण (Phase-2)154 स्वतंत्र, बहुमंजिला और आधुनिक व्यावसायिक शोरूम₹145 करोड़
ऐतिहासिक योग (Total)690 हाई-टेक व्यापारिक प्रतिष्ठानों का एकीकृत नेटवर्क₹221 करोड़

शहरी नियोजन का नया मॉडल: 16 साल की तपस्या का प्रतिफल

​समारोह को संबोधित करते हुए आवास एवं पर्यावरण मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी ने इस प्रोजेक्ट के रणनीतिक महत्व को समझाया। उन्होंने कहा, “साल 2010 में जब इस थोक बाजार का खाका खींचा गया था, तब मकसद सिर्फ दुकानें बनाना नहीं, बल्कि रायपुर को अगले 50 सालों के ट्रैफिक और आबादी के दबाव से बचाना था। आज मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के दृढ़ संकल्प से वह विजन जमीन पर उतरा है।” इस बाजार के पूरी तरह क्रियाशील होने से शहर के गोलबाजार, मालवीय रोड और पंडरी जैसे संकरे इलाकों से भारी वाहनों का दबाव शून्य हो जाएगा।

​इस अवसर पर हाउसिंग बोर्ड के अध्यक्ष श्री अनुराग सिंह देव ने कहा कि हाउसिंग बोर्ड अब सिर्फ आवासीय कॉलोनियां काटने वाला पारंपरिक उपक्रम नहीं रहा, बल्कि यह राज्य के आर्थिक इंफ्रास्ट्रक्चर को लीड करने वाला ‘पावरहाउस’ बन चुका है। कार्यक्रम में कैबिनेट मंत्री श्री गुरु खुशवंत साहेब, राज्यसभा सांसद श्रीमती लक्ष्मी वर्मा और प्रबुद्ध जनप्रतिनिधि मौजूद रहे।

संपादकीय विश्लेषण: कंक्रीट के ढांचे में धड़कती छत्तीसगढ़ की आर्थिक आकांक्षाएं

– मुख्य संपादक की कलम से

​रायपुर के डुमरतराई में ₹221 करोड़ के थोक बाजार का लोकार्पण महज एक सरकारी भवन का फीता काटना नहीं है। यह छत्तीसगढ़ के एक उपभोक्ता राज्य (Consumer State) से बढ़कर मध्य भारत के सबसे बड़े लॉजिस्टिक और डिस्ट्रीब्यूशन हब (Distribution Hub) बनने की कशिश का जीता-जागता प्रमाण है। किसी भी विकासशील राज्य के लिए ‘शहरी विकेंद्रीकरण’ (Urban Decentralization) सबसे कठिन चुनौती होती है। रायपुर ने बीते दो दशकों में अभूतपूर्व भौगोलिक विस्तार तो देखा, लेकिन उसका व्यापारिक दिल अब भी पुरानी, संकरी गलियों में ही धड़क रहा था, जिससे पूरा शहर क्रॉनिक ट्रैफिक जाम से जूझ रहा था। एनएच-30 पर 36 एकड़ का यह नया परिसर इस समस्या की बाईपास सर्जरी है।

​इस परियोजना में आर्थिक बुद्धिमत्ता के साथ-साथ जो सांस्कृतिक राष्ट्रवाद पिरोया गया है, वह इसकी स्वीकार्यता को कई गुना बढ़ा देता है। बाजार के केंद्र में लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल की 15 फीट ऊंची प्रतिमा स्थापित करने का निर्णय व्यापारियों के भीतर ‘राष्ट्र निर्माण में योगदान’ के भाव को जगाए रखेगा। व्यापार कभी भी शून्य में नहीं पनपता; उसके लिए सुरक्षा, कनेक्टिविटी और सम्मान की आवश्यकता होती है। साय सरकार ने ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ के तहत प्रक्रियाओं को सरल करके और इस स्तर का इंफ्रास्ट्रक्चर देकर निजी निवेश के लिए रेड कारपेट बिछा दिया है।

​सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट छत्तीसगढ़ हाउसिंग बोर्ड की कार्यसंस्कृति में आया बदलाव है। जो संस्था कभी लेटलतीफी और साधारण निर्माणों के लिए आलोचना झेलती थी, उसने समय सीमा के भीतर ₹145 करोड़ के दूसरे फेज को जिस फिनिशिंग के साथ पूरा किया है, वह राज्य के अन्य निगम-मंडलों के लिए एक केस स्टडी है। यह महा-बाजार आने वाले समय में छत्तीसगढ़ के राजस्व और रोजगार दोनों की रीढ़ बनने जा रहा है। अब चुनौती इस बात की होगी कि शहर के भीतर बचे हुए थोक व्यापारियों को इस नए परिसर में बिना किसी प्रशासनिक घर्षण के तेजी से शिफ्ट किया जाए, ताकि इस निवेश का शत-प्रतिशत लाभ जनता को मिल सके।

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