रायपुर, 9 जुलाई 2026।
छत्तीसगढ़ की विष्णु देव साय सरकार ने राज्य के लाखों शासकीय कर्मचारियों के हित में अब तक का सबसे बड़ा और ऐतिहासिक कदम उठाया है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने आज मंत्रालय (महानदी भवन) के सभागार में शासकीय सेवकों के लिए ‘वेतन के विरुद्ध अल्पावधि ऋण योजना’ का शंखनाद किया। इस क्रांतिकारी योजना के तहत अब राज्य के शासकीय सेवकों को किसी भी आपात स्थिति या घरेलू जरूरत के लिए किसी के सामने हाथ फैलाने की जरूरत नहीं होगी, बल्कि वे अपनी सैलरी के एवज में बिना ब्याज (Zero Interest) के तत्काल लोन ले सकेंगे।

मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर योजना के रंगीन सूचना ब्रोशर का विमोचन किया और इसे ‘सुशासन, संवेदनशीलता और कर्मचारी कल्याण’ का नया छत्तीसगढ़ मॉडल बताया।
”कर्मचारी निश्चिंत रहेंगे, तभी विकास की रफ्तार बढ़ेगी” — मुख्यमंत्री
सभागार में उपस्थित अधिकारियों और कर्मचारी संघों को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने बेहद भावुक और दमदार बात कही। उन्होंने कहा:
”शासकीय सेवक छत्तीसगढ़ के विकास रथ के असली सारथी हैं। जब हमारा कर्मचारी आर्थिक चिंताओं से मुक्त होकर दफ्तर आएगा, तभी सरकार की योजनाओं का शत-प्रतिशत लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचेगा। अब तक मजबूरी में कर्मचारियों को ऊंची ब्याज दरों पर निजी साहूकारों के जाल में फंसना पड़ता था, जिससे उनका आत्मसम्मान और जेब दोनों चोटिल होते थे। हमारी सरकार ने इस दर्द को समझा और यह पूरी तरह पेपरलेस, पारदर्शी और सुरक्षित व्यवस्था खड़ी कर दी।”
— श्री विष्णु देव साय, मुख्यमंत्री
सरकार की जेब पर ₹1 का भी बोझ नहीं, फिर भी कर्मचारियों को बड़ी राहत
इस योजना की सबसे ‘शानदार’ खूबी यह है कि वित्त विभाग ने सूचना प्रौद्योगिकी (IT) का ऐसा बेजोड़ तालमेल बिठाया है कि इसे सीधे ई-कोष (E-Kosh) प्रणाली से जोड़ दिया गया है। यह पूरी प्रक्रिया 100% डिजिटल है। इस योजना से राज्य सरकार के खजाने पर एक रुपये का भी अतिरिक्त वित्तीय भार नहीं आएगा, लेकिन कर्मचारियों को बहुत बड़ा संबल मिल गया है।

2 महीने के ट्रायल में ही टूट गए रिकॉर्ड: वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी
प्रदेश के युवा और विजनरी वित्त मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी ने इस योजना की ताकत को आंकड़ों के जरिए सामने रखा। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री साय के नेतृत्व में राज्य सरकार ‘कैशलेस मेडिकल सुविधा’ के बाद यह दूसरा बड़ा धमाका कर रही है।

वित्त मंत्री ने बताया कि योजना कितनी असरदार है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसके सिर्फ 2 महीने के पायलट (ट्रायल) फेज में ही:
- 73,000 से अधिक कर्मचारियों ने उत्साहपूर्वक अपना रजिस्ट्रेशन कराया।
- 27,000 से अधिक कर्मचारियों के बैंक खातों में लोन की राशि ट्रांसफर भी की जा चुकी है।
- भविष्य का प्लान: आने वाले समय में जिन कर्मचारियों का क्रेडिट स्कोर (वित्तीय अनुशासन) शानदार रहेगा, उन्हें बहुत ही प्रतिस्पर्धी और सस्ती दरों पर और बड़ी लोन राशि देने की भी तैयारी है।
सिर्फ 3 क्लिक में खाते में आएगा पैसा: कैसे उठाएं लाभ?
इस योजना को बेहद सरल और ‘यूजर फ्रेंडली’ बनाया गया है। अब लोन के लिए बाबू के चक्कर काटने या फाइलों को दौड़ाने की कोई जरूरत नहीं होगी:
- चरण 1: कर्मचारी सीधे ई-कोष पोर्टल के ‘एम्प्लॉयी कॉर्नर’ में जाएंगे।
- चरण 2: ई-केवाईसी (e-KYC) और डिजिटल सहमति की प्रक्रिया पूरी होगी।
- चरण 3: डिजिटल प्रमाणीकरण होते ही लोन राशि सीधे बैंक खाते में ट्रांसफर हो जाएगी।
डेटा सुरक्षा की गारंटी: वित्त विभाग की मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) के तहत कर्मचारियों की गोपनीयता और साइबर सुरक्षा का देश का सबसे उच्च मानक (High Standard) लागू किया गया है।
कर्मचारी संघों में जश्न का माहौल: “यह ऐतिहासिक सौगात”
छत्तीसगढ़ कर्मचारी-अधिकारी संघ के प्रांतीय संयोजक श्री कमल वर्मा और छत्तीसगढ़ मंत्रालयीन कर्मचारी संघ के अध्यक्ष श्री चंद्रकांत पाण्डेय ने इस योजना को शासकीय सेवकों के इतिहास में मील का पत्थर बताया। उन्होंने कहा कि आपातकालीन परिस्थितियों में यह योजना कर्मचारियों के लिए ‘संजीवनी’ की तरह काम करेगी और उन्हें सम्मानजनक जीवन देगी।
गरमामय उपस्थिति:
इस ऐतिहासिक पल के गवाह मुख्य सचिव श्री विकासशील, वित्त विभाग के विशेष सचिव श्री चंदन कुमार, लोक निर्माण विभाग के सचिव श्री मुकेश बंसल, संचालक (बजट एवं वित्त) श्री ऋषभ पराशर सहित प्रदेशभर के सैकड़ों वरिष्ठ अधिकारी और कर्मचारी बने।
विशेष टिप्पणी: ‘कर्मचारी केंद्रित सुशासन’ का छत्तीसगढ़ मॉडल
संपादकीय दृष्टिकोण:
छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा शुरू की गई ‘वेतन के विरुद्ध अल्पावधि ऋण योजना’ केवल एक वित्तीय योजना नहीं, बल्कि प्रशासनिक संवेदनशीलता का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। अक्सर देखा गया है कि मध्यम और निम्न वर्ग के कर्मचारी अचानक आई चिकित्सा या पारिवारिक आकस्मिकताओं के समय स्थानीय साहूकारों या कड़े नियमों वाले वित्तीय संस्थानों के चक्कर में कर्ज के जाल में फंस जाते हैं। इसका सीधा असर उनकी कार्यक्षमता और मानसिक शांति पर पड़ता है।
इस योजना के जरिए सरकार ने बिना सरकारी खजाने पर अतिरिक्त बोझ डाले, तकनीक (ई-कोष पोर्टल) का ऐसा सटीक इस्तेमाल किया है जो सीधे कर्मचारियों को स्वावलंबी बनाता है। यह पहल न केवल भ्रष्टाचार की गुंजाइश को खत्म करती है बल्कि वित्तीय सुगमता सुनिश्चित कर शासकीय सेवकों के आत्मसम्मान को भी सुरक्षित रखती है। पायलट फेज की शानदार सफलता यह साबित करती है कि यह योजना आने वाले समय में देश के अन्य राज्यों के लिए भी ‘रोल मॉडल’ बनेगी।
