अटेंशन की अंधी होड़ और भ्रामक खबरें लोकतंत्र के लिए ‘रेड अलर्ट’: रजत बंसल

‘मिसलीडिंग खबरों’ के इस दौर में केवल विश्वसनीयता ही मीडिया का आखिरी हथियार: जनसंपर्क आयुक्त

रायपुर प्रेस क्लब के ‘हमर पहुना’ में उमड़े राजधानी के दिग्गज पत्रकार; नगर निगम आयुक्त संबित मिश्रा की मौजूदगी में सुशासन और पत्रकारिता के मूल्यों पर आर-पार की चर्चा

रायपुर, 10 जुलाई।

“आज के डिजिटल युग में सबसे पहले दिखने और ‘क्लिक-बेट’ (अटेंशन) बटोरने की जो अंधी दौड़ शुरू हुई है, उसने पत्रकारिता की आत्मा को संकट में डाल दिया है। इस होड़ के कारण बढ़ती भ्रामक और मिसलीडिंग खबरें समाज को बांट रही हैं, जो हमारे लोकतंत्र के लिए एक गंभीर ‘रेड अलर्ट’ (चिंता का विषय) है।” यह बेबाक और कड़ा विश्लेषण छत्तीसगढ़ के जनसंपर्क आयुक्त रजत बंसल ने रायपुर प्रेस क्लब के प्रतिष्ठित ‘हमर पहुना’ कार्यक्रम में पत्रकारों के बीच रखा।

​शुक्रवार को आयोजित इस गरिमामयी और बेहद जीवंत संवाद कार्यक्रम में श्री बंसल ने बदलते मीडिया परिदृश्य और गिरती विश्वसनीयता पर आत्ममंथन करने का आह्वान किया। मंच पर विशिष्ट अतिथि के रूप में रायपुर नगर निगम के आयुक्त संबित मिश्रा भी मौजूद थे। राजधानी के शीर्ष संपादकों, वरिष्ठ पत्रकारों और कलमकारों की भारी मौजूदगी में यह आयोजन मीडिया की दशा, दिशा और प्रशासनिक पारदर्शिता पर एक ऐतिहासिक महामंथन का गवाह बना।

भीड़ से अलग दिखना है तो ‘तथ्य’ को ढाल बनाएं

​सोशल मीडिया के दौर में पत्रकारिता के गिरते स्तर पर कड़ा प्रहार करते हुए जनसंपर्क आयुक्त रजत बंसल ने दोटूक शब्दों में कहा कि आज हर हाथ में मोबाइल होने से सूचनाओं की बाढ़ तो आई है, लेकिन प्रामाणिकता गायब हो चुकी है। उन्होंने मुख्य बिंदु रेखांकित करते हुए कहा:

​”इस शोर-शराबे और सूचनाओं के कोलाहल में केवल वही मीडिया घराना या पत्रकार टिक पाएगा, जिसकी खबरों में सच्चाई, संतुलन और जिम्मेदारी होगी। त्वरित लोकप्रियता का लालच अल्पकालिक है, लेकिन विश्वसनीयता ही वह आखिरी कसौटी है जो पत्रकारिता को जिंदा रखेगी।”

​उन्होंने यह भी साफ किया कि जनसंपर्क विभाग सरकार और मीडिया के बीच किसी बाधा की तरह नहीं, बल्कि एक पारदर्शी सेतु के रूप में काम कर रहा है और आगे भी करता रहेगा।

सुशासन का असली ‘आईना’ है सजग मीडिया: संबित मिश्रा

​नगर निगम आयुक्त संबित मिश्रा ने प्रशासनिक तंत्र को दुरुस्त करने में मीडिया के तीखे तेवरों का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि एक निर्भीक पत्रकार शासन की कमियों को उजागर कर वास्तव में सुशासन की स्थापना में मदद करता है। जनहित के मुद्दों पर प्रशासन और मीडिया का एक पटरी पर होना जरूरी है।

​इस महाबहस में हिस्सा लेते हुए रायपुर के वरिष्ठ पत्रकारों ने लोकतंत्र के चौथे स्तंभ की मजबूती के लिए प्रशासन, सरकार और प्रेस के बीच बिना किसी हिचकिचाहट के सतत संवाद की आवश्यकता पर जोर दिया। पत्रकारों ने फील्ड पर काम करने वाले ग्राउंड रिपोर्टर्स की सुरक्षा, उनके कल्याण और विभागीय सूचनाओं तक आसान पहुंच का मुद्दा भी पुरजोर तरीके से उठाया।

प्रेस क्लब का कायाकल्प: सिर्फ चर्चा नहीं, अब दिखेगा धरातल पर बदलाव

​’हमर पहुना’ का यह मंच केवल वैचारिक बहसों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने रायपुर प्रेस क्लब के भविष्य की एक शानदार तस्वीर भी साफ की। प्रेस क्लब के पदाधिकारियों ने क्लब परिसर को हाईटेक बनाने, आधुनिक डिजिटल लाइब्रेरी स्थापित करने और युवा पत्रकारों के लिए ‘स्किल डेवलपमेंट’ कार्यशालाएं शुरू करने का खाका खींचा। उपस्थित प्रशासनिक अधिकारियों ने इस दूरदर्शी सोच की सराहना करते हुए हर संभव सहयोग देने का बड़ा भरोसा दिया।

एकजुटता के संकल्प के साथ ऐतिहासिक समापन:

कार्यक्रम के भव्य समापन पर रायपुर प्रेस क्लब की कार्यकारिणी द्वारा अतिथियों को स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया। प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया के दिग्गजों से खचाखच भरे इस हॉल में यह संकल्प लिया गया कि तकनीक चाहे कितनी भी बदल जाए, लेकिन छत्तीसगढ़ की पत्रकारिता अपने मूल्यों, शुचिता और जनसरोकार से कभी समझौता नहीं करेगी।

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