साय सरकार का छत्तीसगढ़ के इतिहास में सबसे बड़ा ‘मास्टरस्ट्रोक’: नवा रायपुर के लिए ₹62 करोड़ का ‘महा-पैकेज’, खत्म होंगे सारे विवाद

* कैबिनेट का ऐतिहासिक फैसला: ‘वन टाइम सेटलमेंट (OTS) योजना-2026’ को मंजूरी, मंदी और मुकदमों में फंसे प्रोजेक्ट्स को मिली ‘संजीवनी’

​* ‘जमीन लौटाओ, इज्जत से बाहर जाओ’: जो बिल्डर्स काम नहीं कर पा रहे, उन्हें बिना पेनाल्टी एग्जिट का रास्ता; अब बंद होंगे कोर्ट-कचहरी के चक्कर

​* खजाने को एक रुपये का नुकसान नहीं, फिर भी निवेशकों की चांदी; 31 मार्च 2027 तक खुला रहेगा राहत का झरोखा

विशेष ब्यूरो

रायपुर, 10 जुलाई।

​छत्तीसगढ़ की ‘हाईटेक राजधानी’ नवा रायपुर (अटल नगर) को देश के सबसे बड़े और सफल इन्वेस्टमेंट हब में बदलने के लिए मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की सरकार ने अब तक का सबसे साहसिक और क्रांतिकारी नीतिगत फैसला लिया है। सालों से सरकारी फाइलों, अदालती मुकदमों और मंदी के चक्रव्यूह में फंसी नवा रायपुर की अरबों रुपये की परियोजनाओं को मुक्त करने के लिए कैबिनेट ने ‘वन टाइम सेटलमेंट (OTS) योजना-2026’ पर अपनी अंतिम मुहर लगा दी है।

​इस अभूतपूर्व फैसले के तहत साय सरकार ने एक झटके में डिफाल्टर आवंटियों और बिल्डर्स को ब्याज व अधिभार (सरचार्ज) में करीब 61.96 करोड़ रुपये की भारी-भरकम छूट देने का एलान किया है। यह कदम नवा रायपुर के रियल एस्टेट, उद्योग और इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र के लिए ‘गेम चेंजर’ साबित होने जा रहा है, जिससे ठप पड़े प्रोजेक्ट्स में कल से ही काम की गूंज सुनाई देने लगेगी।

बदला घिसटती फाइलों का दौर, अब सीधे एक्शन: मुख्यमंत्री साय

​कैबिनेट के इस ऐतिहासिक निर्णय के बाद मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कड़े और स्पष्ट शब्दों में कहा:

​”हमारी सरकार सिर्फ कागजी घोषणाओं में नहीं, बल्कि जमीनी और व्यावहारिक समाधानों पर भरोसा करती है। नवा रायपुर को लेकर पिछली जटिलताओं के कारण निवेशकों का जो भरोसा डगमगाया था, यह OTS योजना उसे फिर से मजबूत करेगी। हम लंबित मामलों का निपटारा कर नवा रायपुर को देश के सबसे भरोसेमंद और सुनियोजित शहर के रूप में तेजी से आगे बढ़ाएंगे।”

मुकदमों का ‘द एंड’, विकास का ‘नया सवेरा’: ओ.पी. चौधरी

​आवास एवं पर्यावरण मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी ने इस योजना के दूरगामी परिणामों को रेखांकित करते हुए कहा:

​”विष्णु देव साय सरकार छत्तीसगढ़ में ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ (व्यापार करने की सुगमता) का नया इतिहास लिख रही है। यह योजना उन सभी आवंटियों के लिए एक लाइफलाइन है, जो काम तो करना चाहते थे लेकिन भारी जुर्माने और कानूनी अड़चनों की वजह से बेबस थे। अब कोर्ट के चक्कर खत्म होंगे, फालतू पड़ी कीमती जमीनों का सदुपयोग होगा और राज्य की अर्थव्यवस्था को एक नया बूस्ट मिलेगा।”

क्यों ‘सुपर-हिट’ और सबसे दमदार है यह नीति? 4 अचूक बिंदु:

1. सम्मानजनक एग्जिट: बिना डर के प्रोजेक्ट से बाहर निकलने की छूट

​इस नीति का सबसे शानदार हिस्सा यह है कि जो आवंटी अब नवा रायपुर में निवेश या निर्माण करने में असमर्थ हैं, वे बिना किसी डर या अदालती कार्रवाई के अपनी जमीन वापस प्राधिकरण (NRDA) को सौंप सकते हैं। सरकार उन्हें बिना किसी कड़े दंड के अनुबंध से सम्मानजनक तरीके से बाहर निकलने का मौका दे रही है। इससे फंसी हुई कीमती जमीनें मुक्त होंगी और नए निवेशकों को दी जा सकेंगी।

2. ‘नो लॉस, ऑल गेन’: खजाना भी सुरक्षित, जनता को भी राहत

​आमतौर पर ऐसी योजनाओं में सरकार को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है, लेकिन साय सरकार की इस रणनीति का गणित बेजोड़ है। मूल भूमि प्रीमियम (Principal Amount) में एक रुपये की भी कटौती नहीं की जाएगी, न ही वर्तमान रिजर्व प्रीमियम से कम पर कोई सेटलमेंट होगा। यानी प्राधिकरण का राजस्व पूरी तरह सुरक्षित है और आवंटियों का सिरदर्द भी खत्म।

3. ‘डेडलाइन’ का दबाव, काम में आएगी तेजी

​यह योजना आज से लागू होकर केवल 31 मार्च 2027 तक ही प्रभावी रहेगी। इस सीमित समय-सीमा (विंडो) के कारण डिफॉल्टर्स और निवेशकों के बीच अपने बकाया निपटाने और काम शुरू करने की होड़ मचेगी, जिससे नवा रायपुर में अचानक भारी कैश फ्लो और रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।

नवा रायपुर का कायाकल्प: एक नजर में ‘एक्स-रे रिपोर्ट’

पुरानी बीमारी (जिससे शहर ग्रसित था)नया इलाज (OTS-2026 का सीधा असर)
₹62 करोड़ का दंडात्मक ब्याज का पहाड़ब्याज माफ, अब पूरा पैसा सीधे निर्माण कार्य में लगेगा।
सालों से अदालतों में लंबित विवाद‘आउट ऑफ कोर्ट’ आपसी समझौते से मुकदमों का हमेशा के लिए खात्मा।
खंडहर बने आधे-अधूरे प्रोजेक्ट्सआवासीय, व्यावसायिक और मॉल प्रोजेक्ट्स में फिर शुरू होगी रौनक।

संपादकीय टिप्पणी (Editorial View):

नवा रायपुर को लेकर अब तक के इतिहास का यह सबसे व्यावहारिक और कड़ा प्रहार करने वाला फैसला है। साय सरकार ने निवेशकों को डराने या उन पर कानूनी डंडा चलाने के बजाय, उन्हें विकास में हिस्सेदार बनाने और संकट से बाहर निकलने का रास्ता दिया है। यह छत्तीसगढ़ के विकास की राजनीति में एक नया टर्निंग पॉइंट है, जिसका असर अगले कुछ महीनों में चमचमाती सड़कों और गगनचुंबी इमारतों के रूप में धरातल पर दिखेगा।

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