रायपुर, 13 जुलाई। छत्तीसगढ़ विधानसभा के पावस (मानसून) सत्र का बिगुल फूंक दिया गया है। सत्र को सुचारू, मर्यादित और असरदार बनाने के लिए आज विधानसभा के समिति कक्ष में विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह की अध्यक्षता में ‘कार्यमंत्रणा समिति’ (Business Advisory Committee) की हाई-प्रोफाइल बैठक संपन्न हुई। इस बैठक में सत्ता पक्ष और विपक्ष के दिग्गजों ने बैठकर सदन की रूपरेखा और विधायी कामकाज का एजेंडा तय किया।

सत्र की शुरुआत से ठीक पहले हुई इस बैठक को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इसमें जनता से जुड़े गंभीर मुद्दों पर चर्चा का समय और नियम तय किए गए हैं।
सत्ता और विपक्ष के दिग्गज रहे मौजूद
बैठक में राज्य के शीर्ष नेतृत्व की मौजूदगी ने इसके महत्व को और बढ़ा दिया। इसमें मुख्य रूप से शामिल हुए:
- श्री विष्णु देव साय (मुख्यमंत्री)
- डॉ. चरणदास महंत (नेता प्रतिपक्ष)
- श्री अरुण साव (उपमुख्यमंत्री)
- श्री केदार कश्यप (संसदीय कार्य मंत्री)
- श्री रामविचार नेताम (कृषि मंत्री)
- श्री ओ.पी. चौधरी (वित्त मंत्री)

सदन को सार्थक बनाने की प्रतिबद्धता
बैठक के दौरान विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने दोनों पक्षों से सदन की गरिमा बनाए रखने और जनहित के मुद्दों पर सार्थक चर्चा करने की अपील की। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने जहां सरकार की ओर से हर सवाल का तथ्यात्मक जवाब देने और महत्वपूर्ण विधेयकों को पटल पर रखने की बात कही, वहीं नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने स्पष्ट किया कि विपक्ष जनता की आवाज को पूरी प्रखरता के साथ सदन में उठाएगा।

📌 क्यों खास है यह बैठक?
कार्यमंत्रणा समिति को विधानसभा का ‘पावर हाउस’ कहा जाता है। यही वह मंच है जहां तय होता है कि सत्र के दौरान कौन से नए कानून (विधेयक) आएंगे, बजट अनुपूरक मांगों पर कितनी चर्चा होगी और विपक्ष को जनहित के मुद्दों को उठाने के लिए कितना वक्त मिलेगा।
⚡ टकराव और समन्वय की उम्मीद
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस बार का पावस सत्र काफी हंगामेदार और असरदार हो सकता है। एक तरफ जहाँ सरकार अपनी उपलब्धियों और नए विधेयकों को पारित कराने की तैयारी में है, वहीं विपक्ष भी किसानों, युवाओं और विकास कार्यों के मुद्दे पर सरकार को घेरने की रणनीति बना चुका है।
