साय सरकार का ‘मास्टरस्ट्रोक’: छत्तीसगढ़ में आधी हुई रजिस्ट्री फीस, तो महिलाओं के नाम संपत्ति में 45% का बंपर उछाल

  • बदलाव की बयार: कुल रजिस्ट्री में महिलाओं की हिस्सेदारी 32% से बढ़कर 41% हुई, पुरुषों के गढ़ में महिलाओं ने बढ़ाई धमक
  • बड़ी राहत: छत्तीसगढ़ के परिवारों को मिला ₹50.14 करोड़ का सीधा डिस्काउंट; रायपुर-बालोद समेत 75% जिलों में रिकॉर्ड तोड़ ग्रोथ
  • सीएम साय बोले- ‘महिलाएं अब सिर्फ घर नहीं, संपत्ति की भी मालकिन’; वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी ने कहा- ‘यह विकसित छत्तीसगढ़ की नींव’

रायपुर, 13 जुलाई।

छत्तीसगढ़ में साय सरकार के एक फैसले ने प्रदेश के रियल एस्टेट और सामाजिक ताने-बाने में क्रांति ला दी है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय द्वारा महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए पंजीयन शुल्क (रजिस्ट्री फीस) में दी गई 50% की छूट के बेहद चमत्कारी और दमदार परिणाम सामने आए हैं। सरकारी खजाने में होने वाली छूट सीधे जनता की जेब में पहुंची है, जिससे प्रदेश में महिलाओं के नाम पर जमीन, मकान और दुकान खरीदने की होड़ मच गई है।

​पंजीयन एवं मुद्रांक विभाग के ताजा तुलनात्मक आंकड़ों (06 मई से 30 जून 2026) ने यह साबित कर दिया है कि यह योजना प्रदेश की महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण का सबसे बड़ा हथियार बन चुकी है।

🔥 तीन बड़े आंकड़े, जो बयां कर रहे हैं सफलता की कहानी:

  • 1. हिस्सेदारी में लंबी छलांग: पिछले साल (2025) तक प्रदेश में होने वाली कुल रजिस्ट्री में महिलाओं की हिस्सेदारी महज 32% थी, जो इस साल इस छूट के बाद छलांग लगाकर 41% पर पहुंच गई है।
  • 2. 45% ज्यादा रजिस्ट्री: पिछले साल महिलाओं के नाम 14,668 संपत्तियों का पंजीयन हुआ था, जो इस साल 45% की भारी बढ़ोतरी के साथ 21,292 पार कर गया।
  • 3. ₹50 करोड़ की सीधी बचत: सरकार के इस फैसले से छत्तीसगढ़ के आम परिवारों को 50.14 करोड़ रुपये का सीधा आर्थिक लाभ (कैशबैक/छूट के रूप में) मिला है।

📊 जिलावार रिपोर्ट: 75% जिलों में ‘महिला राज’, इन जिलों ने गाड़े झंडे

​सरकारी रिपोर्ट के मुताबिक, राज्य के 75 प्रतिशत से अधिक जिलों में महिलाओं के नाम संपत्ति पंजीयन में 20% से ज्यादा की सालाना ग्रोथ दर्ज की गई है। इसमें सबसे शानदार प्रदर्शन करने वाले जिलों में शामिल हैं:

जांजगीर-चांपा, बालोद, कोरिया, रायपुर और कांकेर। इन जिलों में महिलाओं को संपत्ति का मालिकाना हक देने में परिवारों ने सबसे ज्यादा दिलचस्पी दिखाई है।

💬 “फैसला सिर्फ छूट का नहीं, सम्मान और सुरक्षा का है” — मुख्यमंत्री साय

“संपत्ति पर महिलाओं का हक केवल एक कानूनी दस्तावेज नहीं है, बल्कि यह उन्हें परिवार और समाज में निर्णय लेने की असली ताकत और सुरक्षा देता है। हमारी सरकार महिलाओं को सिर्फ योजनाओं का लाभ लेने वाला नहीं, बल्कि विकास की समान भागीदार और आत्मनिर्भर बनाना चाहती है। यह रिकॉर्ड बढ़ोतरी इसी सोच का परिणाम है।”

श्री विष्णु देव साय, मुख्यमंत्री, छत्तीसगढ़

💬 “यह आंकड़ा नहीं, छत्तीसगढ़ का सामाजिक बदलाव है” — ओ.पी. चौधरी

​वित्त एवं पंजीयन मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी ने इस कामयाबी को छत्तीसगढ़ के इतिहास का स्वर्णिम अध्याय बताते हुए कहा:

“जब एक महिला मकान या जमीन की मालकिन बनती है, तो उसका आत्मविश्वास सातवें आसमान पर होता है। मुख्यमंत्री साय के नेतृत्व में हमारा लक्ष्य सिर्फ राजस्व कमाना नहीं, बल्कि एक पारदर्शी, नागरिक-केंद्रित और समावेशी व्यवस्था बनाना है। ₹50 करोड़ से ज्यादा की यह छूट परिवारों के लिए बहुत बड़ी आर्थिक राहत है। यह विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण का संकेत है।”

📰 संपादक की नजर में (News Analysis):

​आमतौर पर भारतीय समाज में संपत्तियां पुरुषों के नाम पर रखने का चलन रहा है। लेकिन साय सरकार की ‘50% रजिस्ट्री फीस छूट’ योजना ने आर्थिक लाभ के बहाने पुरुषों की सोच को बदला है। ₹50 करोड़ की बचत ने परिवारों को यह सोचने पर मजबूर कर दिया कि संपत्ति महिला के नाम पर ही कराई जाए। यह योजना न केवल रियल एस्टेट सेक्टर को बूस्ट दे रही है, बल्कि महिलाओं को घरेलू फैसलों में ‘बराबर का हकदार’ भी बना रही है।

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