भारतीय आदिम जाति सेवक संघ के शपथ ग्रहण में बोले मुख्यमंत्री— ‘जल, जंगल और जमीन के साथ आदिवासियों के अधिकारों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है सरकार’
‘नियद नेल्लानार’ और ‘बस्तर मुन्ने’ योजनाओं से टूट रहा सुदूर वनांचलों का अलगाव, घर-घर पहुँच रही सरकार
मुख्यधारा से कटे 400 गाँवों का पहली बार हुआ सर्वे, 500 से अधिक गाँवों में बुनियादी सुविधाओं का जाल।

रायपुर, 13 जुलाई।
“छत्तीसगढ़ का जनजातीय समाज सिर्फ हमारी पहचान नहीं, बल्कि हमारे राज्य का गौरव है। विगत चार दशकों से विकास की मुख्यधारा से कटे बस्तर के अंतिम छोर पर बैठे व्यक्ति तक हक पहुँचाना हमारी सरकार का मुख्य संकल्प है।” यह बात मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने आज राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास के जनदर्शन हॉल में आयोजित भारतीय आदिम जाति सेवक संघ के छत्तीसगढ़ राज्य बोर्ड के शपथ ग्रहण समारोह में कही।
मुख्यमंत्री ने नवनियुक्त पदाधिकारियों को कर्तव्यनिष्ठा की शपथ दिलाई और विश्वास व्यक्त किया कि यह नवगठित बोर्ड आदिवासी समाज के उत्थान, उनके अधिकारों की रक्षा तथा सामाजिक समरसता के क्षेत्र में एक नई क्रांति का सूत्रपात करेगा।
इस ऐतिहासिक अवसर पर भारतीय आदिम जाति सेवक संघ के अध्यक्ष श्री प्रकाश कुमार उइके, श्रीमती कौशल्या साय, श्री राजेश मालवीय, श्री कुंवर जितेंद्र नरसिंह राणा सहित देश के विभिन्न राज्यों से आए शीर्ष पदाधिकारी और प्रबुद्ध जन उपस्थित थे।
अतीत का गौरव और वर्तमान का संकल्प
मुख्यमंत्री श्री साय ने संघ के गौरवशाली इतिहास को याद करते हुए कहा कि जिस संस्था के प्रथम अध्यक्ष देश के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद रहे हों और जिसका नेतृत्व पूर्व प्रधानमंत्री श्री मोरारजी देसाई ने किया हो, उसका उत्तरदायित्व स्वतः ही ऐतिहासिक हो जाता है। छत्तीसगढ़ जैसे जनजातीय बहुल राज्य में, जहाँ विशेष पिछड़ी जनजातियाँ अपनी समृद्ध संस्कृति को सहेजे हुए हैं, इस बोर्ड की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है।
बदलाव का गवाह बना बस्तर: 40 साल का अंधेरा छँटा
मुख्यमंत्री ने पिछली प्रशासनिक उपेक्षाओं पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि बस्तर के लगभग 400 ऐसे गाँव थे, जिनका आज तक विधिवत सर्वे भी नहीं हो पाया था। हमारी सरकार ने न सिर्फ इन गाँवों का सर्वे पूरा किया, बल्कि विकास की नई इबारत लिख दी है।
बदलाव के प्रमुख स्तंभ:
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│ 1. नियद नेल्लानार योजना: 500+ वनांचल गाँवों तक सड़क, बिजली, │
│ पेयजल और निर्बाध संचार कनेक्टिविटी। │
│ 2. बस्तर मुन्ने (अग्रणी बस्तर): हर अंतिम व्यक्ति तक सरकारी │
│ योजनाओं की शत-प्रतिशत डायरेक्ट डिलीवरी। │
│ 3. मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर योजना: दुर्गम पहाड़ियों और जंगलों │
│ के बीच घर-घर जाकर मुफ्त स्वास्थ्य परीक्षण और इलाज। │
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‘होमस्टे’ से बदली ग्रामीण अर्थव्यवस्था, ग्लोबल हुआ बस्तर
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कुशल मार्गदर्शन का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि आज बस्तर राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय पर्यटन के मानचित्र पर चमक रहा है। यहाँ की समृद्ध आदिवासी संस्कृति और प्राकृतिक सौंदर्य को देखने आ रहे सैलानी अब ‘लोकल होमस्टे’ में रुक रहे हैं। इससे न केवल बस्तर की छवि बदली है, बल्कि स्थानीय स्तर पर ग्रामीण अर्थव्यवस्था बेहद मजबूत हुई है।
“हमारा लक्ष्य केवल बुनियादी ढाँचा सुधारना नहीं है, बल्कि जनजातीय समाज की सांस्कृतिक विरासत को अक्षुण्ण रखते हुए उन्हें शिक्षा, आधुनिक रोजगार और आर्थिक अवसरों के शिखर पर पहुँचाना है।”
— श्री विष्णु देव साय, मुख्यमंत्री
मुख्यमंत्री ने संघ के नवनियुक्त बोर्ड को शुभकामनाएं देते हुए आह्वान किया कि वे सरकार के इन प्रयासों को जन-जन तक पहुँचाने के लिए अपनी पूरी ऊर्जा के साथ जुट जाएं।
