बस्तर के गीदम से जशपुर के कुनकुरी तक चिकित्सा शिक्षा का महा-विस्तार; NMC ने दी अंतिम मंजूरी
एक झटके में बढ़ीं 250 MBBS सीटें; मुख्यमंत्री साय ने प्रधानमंत्री मोदी और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री नड्डा का जताया आभार
रायपुर, 13 जुलाई
छत्तीसगढ़ की विष्णु देव साय सरकार ने राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था और चिकित्सा शिक्षा के इतिहास में अब तक का सबसे बड़ा और युगांतरकारी कदम उठाया है। राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) ने प्रदेश के पांच रणनीतिक और दूरस्थ क्षेत्रों—गीदम (दंतेवाड़ा), कुनकुरी (जशपुर), मनेन्द्रगढ़, जांजगीर-चांपा और कबीरधाम में नए शासकीय मेडिकल कॉलेजों की स्थापना को हरी झंडी दे दी है। इन सभी कॉलेजों में 50-50 एमबीबीएस (MBBS) सीटों की स्वीकृति मिली है, जिससे राज्य में एक साथ 250 डॉक्टर तैयार करने वाली सीटों का इजाफा हो गया है।

इस निर्णय को छत्तीसगढ़ के इतिहास में ‘स्वास्थ्य और शिक्षा के लोकतंत्रीकरण’ के रूप में देखा जा रहा है, जहां विकास की रोशनी राज्य के अंतिम छोर तक पहुंच रही है।
लाल आतंक पर भारी पड़ी विकास की ‘डबल इंजन’ रफ्तार
इस स्वीकृति का सबसे महत्वपूर्ण और संवेदनशील पहलू भौगोलिक चयन है। कभी धुर नक्सल हिंसा और खौफ के साए में जीने वाले बस्तर संभाग के गीदम (दंतेवाड़ा) में मेडिकल कॉलेज खुलना इस बात का जीवंत प्रमाण है कि सरकार ‘बुलेट पर बैलेट और विकास’ को प्राथमिकता दे रही है। वहीं दूसरी ओर, उत्तर छत्तीसगढ़ के सुदूर वनांचल क्षेत्र कुनकुरी (जशपुर) के युवाओं के लिए यह फैसला उनके सपनों को नई उड़ान देने वाला साबित होगा। मैदानी और नवगठित जिलों (जांजगीर-चांपा, कबीरधाम और मनेन्द्रगढ़) को शामिल कर सरकार ने पूरे प्रदेश में स्वास्थ्य सुविधाओं का एक समान और मजबूत संजाल (Network) तैयार कर दिया है।
“यह सुशासन और अंत्योदय के संकल्प की सिद्धि है”
इस ऐतिहासिक सौगात पर प्रदेशवासियों को बधाई देते हुए मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री श्री जे.पी. नड्डा का सहृदय आभार व्यक्त किया है। मुख्यमंत्री ने कहा:
“यह केवल कॉलेजों की स्वीकृति नहीं, बल्कि अंतिम छोर पर बैठे छत्तीसगढ़िया नागरिक तक सर्वसुविधायुक्त स्वास्थ्य सेवाएँ पहुँचाने के हमारे ‘अंत्योदय’ संकल्प की ऐतिहासिक उपलब्धि है। हमारे युवाओं को अब डॉक्टर बनने के लिए बड़े शहरों का रुख नहीं करना पड़ेगा। यह ऐतिहासिक पहल छत्तीसगढ़ की स्वास्थ्य सेवाओं को नई ऊँचाइयों पर ले जाएगी।”
पाँच नए मेडिकल कॉलेज: एक नज़र में महा-विस्तार
| नव-स्वीकृत मेडिकल कॉलेज | सीटें | क्षेत्रीय प्रभाव और महत्व |
|---|---|---|
| गीदम (दंतेवाड़ा) | 50 | बस्तर अंचल के आदिवासियों को अब गंभीर इलाज के लिए भटकना नहीं पड़ेगा। |
| कुनकुरी (जशपुर) | 50 | वनांचल और पहाड़ी क्षेत्रों के मेधावी छात्रों को स्थानीय स्तर पर मिलेगी विश्वस्तरीय शिक्षा। |
| मनेन्द्रगढ़ | 50 | नवगठित और सीमावर्ती जिले की स्वास्थ्य संरचना में क्रांतिकारी बदलाव। |
| जांजगीर-चांपा | 50 | सघन आबादी वाले मैदानी क्षेत्र में अत्याधुनिक चिकित्सा सेवाओं का विस्तार। |
| कबीरधाम | 50 | कवर्धा और आस-पास के ग्रामीण व मैदानी इलाकों के लिए ‘लाइफलाइन’ बनेगा अस्पताल। |
असरदार बदलाव: आम जनता और युवाओं को क्या होगा सीधा लाभ?
- गांवों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की बाढ़: 250 नई सीटें बढ़ने से आने वाले समय में राज्य को हर साल सैकड़ों नए डॉक्टर मिलेंगे। ये डॉक्टर अनिवार्य ग्रामीण सेवा के तहत सुदूर क्षेत्रों में तैनात होंगे।
- महानगरों पर निर्भरता खत्म: इन कॉलेजों के साथ संबद्ध जिला अस्पतालों को सुपर-स्पेशलिटी स्तर पर अपग्रेड किया जाएगा। अब बस्तर या जशपुर के मरीजों को रायपुर, विशाखापट्टनम या नागपुर नहीं भागना पड़ेगा।
- स्थानीय स्तर पर रोजगार और आर्थिक उन्नति: पांच बड़े मेडिकल कॉलेजों के शुरू होने से हजारों की संख्या में पैरामेडिकल स्टाफ, नर्सिंग, और गैर-तकनीकी पदों पर स्थानीय युवाओं को रोजगार मिलेगा।
संपादकीय टिप्पणी (News Impact)
यह फैसला केवल प्रशासनिक मंजूरी भर नहीं है, बल्कि छत्तीसगढ़ की ‘डबल इंजन’ सरकार का वह विजन है जो यह साबित करता है कि राजनीतिक इच्छाशक्ति अगर मजबूत हो, तो जंगलों और पहाड़ों के बीच भी देश की सबसे आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाएं खड़ी की जा सकती हैं। चालू सत्र से ही इन सीटों पर दाखिले की प्रक्रिया शुरू होने की प्रबल संभावना है, जो छत्तीसगढ़ के इतिहास में एक नया स्वर्णिम अध्याय लिखेगी।
