अमर रहेगी पंडवानी की गूंज: डॉ. तीजन बाई की स्मृतियों को चिरस्थायी बनाएगी राज्य सरकार

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने दी भावभीनी श्रद्धांजलि; गनियारी में आयोजित दशगात्र कार्यक्रम में हुए शामिल

बड़ी घोषणाएं: राज्योत्सव में दिया जाएगा ‘डॉ. तीजन बाई लोककला अलंकरण’, गनियारी स्कूल का नामकरण और रायपुर संग्रहालय में संरक्षित होगा उनका ऐतिहासिक तंबूरा

विशेष संवाददाता, रायपुर/रायपुर /दुर्ग 14 जुलाई।

छत्तीसगढ़ की माटी की बेटी और विश्वमंच पर पंडवानी को नई ऊंचाइयां देने वाली महान लोक कलाकार, पद्म विभूषण स्वर्गीय डॉ. तीजन बाई अब हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी सांस्कृतिक विरासत को राज्य सरकार अमर बनाएगी। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने आज दुर्ग जिले के ग्राम गनियारी पहुंचकर स्व. डॉ. तीजन बाई के दशगात्र एवं श्रद्धांजलि सभा में हिस्सा लिया। मुख्यमंत्री ने उनके तैलचित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर भावभीनी श्रद्धांजलि दी और शोकसंतप्त परिजनों से मुलाकात कर अपनी गहरी संवेदनाएं व्यक्त कीं।

​मुख्यमंत्री ने स्व. तीजन बाई के पुत्र श्री दिलहरण पारधी सहित परिवार के अन्य सदस्यों को ढांढस बंधाया और कहा कि संकट की इस घड़ी में पूरी सरकार और छत्तीसगढ़ की जनता उनके साथ खड़ी है।

सांस्कृतिक धरोहर को सहेजने के लिए मुख्यमंत्री की तीन बड़ी घोषणाएं

​मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने लोककला की इस महान साधिका की स्मृतियों को अक्षुण्ण रखने के लिए तीन अत्यंत महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं:

  • ‘डॉ. तीजन बाई लोककला अलंकरण’ की शुरुआत: लोककला के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले कलाकारों को प्रोत्साहित करने के लिए हर साल राज्योत्सव के अवसर पर राज्य सरकार द्वारा यह प्रतिष्ठित अलंकरण प्रदान किया जाएगा।
  • शासकीय स्कूल का नामकरण: तीजन बाई के पैतृक गांव गनियारी स्थित शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय का नामकरण अब उनके नाम पर किया जाएगा, ताकि आने वाली पीढ़ी उनके जीवन, कड़े संघर्ष और वैश्विक उपलब्धियों से प्रेरणा ले सके।
  • संग्रहालय में संरक्षित होगा ऐतिहासिक तंबूरा: तीजन बाई की जीवनभर की कला-साधना के जीवंत प्रतीक यानी उनके प्रसिद्ध ‘तंबूरे’ को रायपुर के राज्य संग्रहालय में पूरे राजकीय सम्मान के साथ संरक्षित किया जाएगा।

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