● मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की बड़ी पहल: आर्थिक तंगी से जूझ रहे परिवारों के जीवन में लौटेगी खुशहाली
● गढ़ दी गई व्यवस्था: नीति निर्धारण के लिए 7 सदस्यीय हाई-पावर अंतर्विभागीय समिति का ऐलान, सचिव (GAD) संभालेंगे कमान
● ‘अल्टीमेटम’ 1 महीने का: समिति को 30 दिन में सौंपनी होगी रिपोर्ट, कैबिनेट की मुहर लगते ही छत्तीसगढ़ में लागू होगी नई नीति

रायपुर, 14 जुलाई 2026
छत्तीसगढ़ की विष्णु देव साय सरकार ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि जनहित और कर्मचारियों का कल्याण ही उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता है। एक बेहद संवेदनशील और युगांतकारी कदम उठाते हुए राज्य सरकार ने अधोसंरचना विकास निगम (CIDC) के अंतर्गत आने वाले विघटित परिवहन निगम के दिवंगत कर्मचारियों के परिवारों के हक में सबसे बड़ा फैसला लिया है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की सीधी पहल पर, सालों से दर-दर भटक रहे दिवंगत कर्मियों के आश्रितों को अनुकंपा नियुक्ति देने के लिए एक नई, व्यावहारिक और ऐतिहासिक नीति बनाने का रास्ता साफ हो गया है।
इस नीति को धरातल पर उतारने और सभी तकनीकी पेंचों को सुलझाने के लिए सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) के सचिव की अध्यक्षता में 7 सदस्यीय उच्च स्तरीय अंतर्विभागीय समिति का गठन कर दिया गया है। विभाग द्वारा इसका आधिकारिक आदेश भी जारी कर दिया गया है।
क्यों फंसा था पेंच? पूर्ववर्ती व्यवस्थाओं की नाकामी का शिकार थे परिवार
विघटित परिवहन निगम के दिवंगत कर्मचारियों के आश्रितों की अनुकंपा नियुक्ति का मामला सालों से फाइलों में दबा हुआ था। दरअसल:
- रास्ता हुआ था बंद: पहले इन आश्रितों को ‘शिक्षाकर्मी वर्ग-तीन’ के पद पर नियुक्ति दी जाती थी, लेकिन प्रदेश में शिक्षाकर्मी प्रथा समाप्त होते ही यह विकल्प पूरी तरह बंद हो गया।
- पदों का टोटा और बढ़ती लाचारी: इसके बाद 13 दिसंबर 2022 को जल संसाधन विभाग ने CIDC के तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी के रिक्त पदों पर अनुकंपा नियुक्ति का प्रावधान तो किया, लेकिन CIDC में पद खाली न होने के कारण यह आदेश सिर्फ कागजी बनकर रह गया।
- आर्थिक तंगी की मार: पद रिक्त न होने से कई महत्वपूर्ण और संवेदनशील प्रकरण सालों से धूल खा रहे थे। नौकरी की आस में बैठे कई परिवार गंभीर आर्थिक तंगी, कर्ज और मुफलिसी के दौर से गुजर रहे थे।
मुख्यमंत्री का कड़ा रुख: समस्या का चाहिए ‘स्थायी समाधान’, 1 माह में मांगी रिपोर्ट
मामले की संवेदनशीलता, पीड़ित परिवारों की चीख और माननीय उच्च न्यायालय के कड़े निर्देशों को संज्ञान में लेते हुए मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने इस समस्या के ‘परमानेंट इलाज’ के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री के कड़े रुख के बाद एक्शन में आए प्रशासन ने हाई-पावर समिति को सिर्फ 1 महीने (30 दिन) का वक्त दिया है।
कैबिनेट की मुहर के साथ सीधे लागू होगी नीति
यह समिति एक माह के भीतर अपनी विस्तृत और व्यावहारिक रिपोर्ट शासन को सौंपेगी। इस रिपोर्ट के आधार पर सीधे कैबिनेट (मंत्रि-परिषद्) से अंतिम मंजूरी ली जाएगी और बिना किसी देरी के नई नीति को पूरे प्रदेश में अधिसूचित कर दिया जाएगा।
असरदार नतीजा: वर्षों का अंधेरा छंटेगा, मिलेगा आर्थिक अधिकार
साय सरकार का यह फैसला बेहद असरदार और दूरगामी साबित होने वाला है। इस नई नीति के लागू होते ही वर्षों से लंबित पड़े मामलों का निपटारा ‘फास्ट ट्रैक’ पर होगा।
शासन का स्पष्ट संकल्प है कि किसी भी दिवंगत कर्मचारी के परिवार को दर-दर न भटकना पड़े और उन्हें तत्काल आर्थिक संबल मिले। सरकार के इस दमदार और संवेदनशील फैसले से पीड़ित परिवारों में न्याय की उम्मीद जागी है, वहीं प्रदेश भर के कर्मचारी संगठनों ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के इस कदम को ‘ऐतिहासिक और अनुकरणीय’ बताते हुए उनका आभार जताया है।
