बंदूक की गूंज से ‘बस्तर मुन्ने’ की गूंज तक: मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का संकल्प, शांति और विश्वास के नए युग में बस्तर

दशकों की नक्सली दहशत को पीछे छोड़ विकास की नई इबारत लिख रहा बस्तर; केंद्र और राज्य के साझा ‘बस्तर रोडमैप 2.0’ से जनजातीय अंचल में आया युगांतकारी बदलाव

सुरक्षा बलों के शौर्य, संवेदनशील पुनर्वास नीति और ‘नियद नेल्ला नार’ योजना के त्रिकोण ने बदला बस्तर का भूगोल और इतिहास

रायपुर, 15 जुलाई 2026

छत्तीसगढ़ का बस्तर संभाग, जो कभी दशकों तक लाल आतंक की विभीषिका, बारूदी धमाकों और भय के साये में जीने को मजबूर था, आज वह शांति, सुरक्षा और समृद्धि की एक नई गाथा लिख रहा है। विधानसभा के पटल पर मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने बस्तर के इस ऐतिहासिक और अभूतपूर्व कायाकल्प का जो ब्योरा प्रस्तुत किया, वह केवल शासकीय योजनाओं की फेहरिस्त नहीं है, बल्कि बस्तर के आदिवासियों और आम जनमानस के जीवन में आए वास्तविक और जीवंत बदलाव का दस्तावेज़ है।

​मुख्यमंत्री ने बड़े गर्व और दृढ़ संकल्प के साथ सदन को बताया कि केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार और राज्य की साय सरकार की ‘डबल इंजन’ नीति ने बस्तर की जनता के मन में शासन और प्रशासन के प्रति अटूट विश्वास जगाया है। अब बस्तर विनाश की राह से हटकर देश के अग्रणी जनजातीय संभाग बनने की दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रहा है।

त्रिसूत्रीय रणनीति: सुरक्षा, विकास और अटूट विश्वास

​मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने स्पष्ट किया कि नक्सलवाद से मुक्ति का यह अभियान केवल हथियारों और सुरक्षा बलों की कार्रवाई तक सीमित नहीं है। राज्य सरकार ने ‘सुरक्षा, पुनर्वास और त्वरित विकास’ की त्रिसूत्रीय रणनीति पर काम किया है, जिसके परिणाम अब धरातल पर साफ दिखाई दे रहे हैं।

1. अदम्य साहस और शहीदों को नमन

​मुख्यमंत्री ने बस्तर की शांति के लिए अपने प्राणों का सर्वोच्च बलिदान देने वाले वीर शहीदों को नमन करते हुए कहा:

“हमारे सुरक्षा बलों का साहस और पराक्रम ही हमारी सबसे बड़ी शक्ति है। केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF), छत्तीसगढ़ पुलिस, जिला बल और विशेष सुरक्षा इकाइयों के जवानों ने अपनी जान की परवाह न करते हुए बस्तर के दुर्गम जंगलों में तिरंगा फहराया है। उनका यह त्याग व्यर्थ नहीं जाएगा।”

2. दिल्ली से रायपुर तक मजबूत इच्छाशक्ति

​प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के विजन और केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह के सतत मार्गदर्शन की सराहना करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि 24 अगस्त 2024 को रायपुर में हुई उच्च स्तरीय बैठक के बाद नक्सलवाद के समूल नाश के लिए एक बेहद सटीक और समयबद्ध (Time-bound) कार्ययोजना बनाई गई। इस योजना के तहत सुरक्षा बलों को अत्याधुनिक उपकरण, निर्बाध संचार तंत्र और लॉजिस्टिक्स सपोर्ट प्रदान किया गया, जिससे नक्सली बैकफुट पर आ गए।

3. मुख्यधारा में वापसी के लिए संवेदनशील हाथ

​भटके हुए युवाओं को सही राह पर लाने के लिए राज्य सरकार ने देश की सबसे मानवीय और आकर्षक पुनर्वास नीति लागू की है।

  • ​हिंसा का मार्ग छोड़ने वाले नक्सलियों को तुरंत आर्थिक सहायता, कृषि के लिए भूमि और स्वरोजगार के साधन दिए जा रहे हैं।
  • ​आत्मसमर्पित युवाओं को विभिन्न क्षेत्रों में कौशल प्रशिक्षण (Skill Development) देकर समाज में सम्मानजनक स्थान दिलाया जा रहा है।

‘बस्तर रोडमैप 2.0’ और ‘नियद नेल्ला नार’: विकास का महा-अभियान

​मुख्यमंत्री ने सदन में बस्तर के सर्वांगीण विकास के लिए तैयार किए गए ‘बस्तर रोडमैप 2.0’ का पूरा खाका पेश किया। इसके तहत सुदूर और पहुंचविहीन क्षेत्रों तक सड़क, बिजली, पानी, शिक्षा और स्वास्थ्य की किरण पहुंचाई जा रही है।

‘नियद नेल्ला नार’ (आपका अच्छा गांव) योजना

​यह योजना बस्तर के सुदूर अंचलों में बदलाव का सबसे बड़ा जरिया बनी है। इसके तहत:

  • ​सुरक्षा शिविरों (कैंपों) के 10 किलोमीटर के दायरे में आने वाले 525 गांवों को चिन्हित किया गया है।
  • ​इन गांवों में 17 अलग-अलग विभागों की 43 कल्याणकारी योजनाओं को सीधे ग्रामीणों के घर तक पहुंचाया जा रहा है।
  • ​प्रशासन की इस सक्रियता से ग्रामीणों का लोकतंत्र पर भरोसा कई गुना बढ़ गया है।

शहीद गुंडाधुर सेवा डेरा: सुरक्षा कैंप अब बहुआयामी सेवा केंद्र

​मुख्यमंत्री ने एक बेहद क्रांतिकारी बदलाव की जानकारी देते हुए बताया कि अब बस्तर में सुरक्षा बलों के कैंपों को केवल सैनिक चौकियों के रूप में नहीं देखा जा रहा है। इन्हें ‘शहीद गुंडाधुर सेवा डेरा’ के रूप में विकसित किया जा रहा है। ये डेरे अब स्थानीय लोगों के लिए:

  • ​नागरिक सुविधाओं और शासकीय सेवाओं के वितरण केंद्र होंगे।
  • ​आजीविका गतिविधियों और कौशल प्रशिक्षण के केंद्र बनेंगे।
  • ​आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं और जनसंवाद के मुख्य केंद्र के रूप में कार्य करेंगे।

बदलते बस्तर की सांख्यिकीय गवाही (Statistical Proof)

​बस्तर में जनकल्याणकारी योजनाओं और सुविधाओं को अंतिम छोर तक पहुंचाने के लिए राज्य सरकार ने संतृप्तिकरण (Saturation Mode) रणनीति अपनाई है। इसके तहत बस्तर संभाग में हुए कार्यों का लेखा-जोखा नीचे दी गई तालिका में स्पष्ट है:

विकास और जनकल्याण के प्रमुख स्तंभकुल आंकड़े / प्रगति की स्थिति
खाद्य सुरक्षा (राशन कार्ड वितरण)6 लाख 79 हजार परिवारों को मिला राशन का अधिकार
वित्तीय समावेशन (जनधन बैंक खाते)17 लाख से अधिक ग्रामीणों के बैंक खाते खोले गए
डिजिटल पहचान (आधार कार्ड निर्माण)24 लाख 66 हजार लोगों के आधार कार्ड बनाए गए
निःशुल्क स्वास्थ्य कवच (आयुष्मान कार्ड)22 लाख से अधिक नागरिकों को ₹5 लाख तक का इलाज मुफ्त
कृषि प्रोत्साहन (किसान क्रेडिट कार्ड)3 लाख 89 हजार किसानों को मिला आसान ऋण का लाभ
अधिकार संपन्न आदिवासी (वनाधिकार पत्र)1 लाख 18 हजार आदिवासियों को व्यक्तिगत पट्टे वितरित
आवास का सपना सच (पीएम आवास)1 लाख 76 हजार आवास स्वीकृत (नक्सल पीड़ितों हेतु 15 हजार अतिरिक्त आवास)

बुनियादी ढांचा और कनेक्टिविटी: सुदूर वनों से महानगरों तक संपर्क

​बस्तर को शेष भारत और वैश्विक बाजारों से जोड़ने के लिए बुनियादी ढांचे (Infrastructure) का तेजी से विस्तार किया जा रहा है:

  • रेल कनेक्टिविटी की ऐतिहासिक शुरुआत: बस्तर की जीवनरेखा मानी जाने वाली ₹3,513 करोड़ की जगदलपुर-रावघाट रेल परियोजना पर युद्ध स्तर पर काम चल रहा है। जल्द ही बस्तर सीधे देश के रेल नेटवर्क से पूरी तरह जुड़ जाएगा।
  • हवाई संपर्क का विस्तार: जगदलपुर हवाई अड्डे से नियमित उड़ानों का विस्तार किया गया है, जिससे आपातकालीन और व्यावसायिक कनेक्टिविटी बेहद मजबूत हुई है।
  • रायपुर-विशाखापट्टनम एक्सप्रेस-वे: यह विशाल एक्सप्रेस-वे परियोजना अब अपने अंतिम चरण में है। यह न केवल बस्तर को एक बड़ा औद्योगिक गलियारा प्रदान करेगी, बल्कि बस्तर के हस्तशिल्प, वनोपज और कृषि उत्पादों को सीधे अंतरराष्ट्रीय बंदरगाहों तक पहुंचाएगी।

शिक्षा और सामाजिक चेतना: बंदूकों की जगह गूंज रही किलकारियां

​नक्सलियों ने बस्तर के भविष्य पर प्रहार करने के लिए सबसे पहले स्कूलों को निशाना बनाया था। साय सरकार ने इस अंधकार को दूर करने के लिए अभूतपूर्व कदम उठाए हैं:

  • बंद स्कूल दोबारा शुरू: नक्सल हिंसा के कारण बस्तर संभाग के जिन 240 गांवों में स्कूल दशकों से बंद पड़े थे, सरकार ने उनमें से 458 बंद विद्यालयों में से 421 विद्यालयों को दोबारा खोल दिया है। इसके साथ ही 36 नए स्कूल भी शुरू किए गए हैं।
  • कौशल विकास: बस्तर के सभी विकासखंडों में विशेष कौशल प्रशिक्षण केंद्र चलाए जा रहे हैं ताकि स्थानीय युवाओं को आजीविका से जोड़ा जा सके।

खेल और संस्कृति का नया उल्लास: बस्तर ओलंपिक और बस्तर पंडुम

​बस्तर के युवाओं की ऊर्जा को सही और सकारात्मक दिशा देने के लिए राज्य सरकार ने पारंपरिक खेलों और सांस्कृतिक धरोहरों को संजोने का काम किया है:

  • बस्तर ओलंपिक और बस्तर पंडुम जैसे भव्य और अनूठे आयोजनों ने बस्तर के इतिहास में नया रंग भर दिया है।
  • ​इन आयोजनों में 4 लाख से अधिक स्थानीय युवाओं और नागरिकों ने हिस्सा लिया।
  • ​इसने बस्तर के युवाओं को बंदूक थामने के बजाय खेल के मैदानों में देश का नाम रोशन करने के लिए प्रेरित किया है।

नेतृत्व और टीम वर्क की सफलता

​मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने इस पूरी सफलता का श्रेय अपनी टीम के मजबूत सहयोगियों को भी दिया। उन्होंने विशेष रूप से प्रदेश के गृहमंत्री श्री विजय शर्मा, वन मंत्री श्री केदार कश्यप और जगदलपुर विधायक श्री किरण सिंह देव के जमीनी संघर्ष, संवेदनशीलता और नक्सल उन्मूलन की लड़ाई में दिए गए अमूल्य योगदान की सराहना की।

निष्कर्ष

​मुख्यमंत्री श्री साय ने सदन के माध्यम से पूरे देश को आश्वस्त किया कि बस्तर अब पीछे मुड़कर नहीं देखेगा। बस्तर के आदिवासी भाइयों और बहनों की आंखों में अब भय नहीं, बल्कि सुनहरे भविष्य के सपने हैं। बस्तर आज विकास, शांति, संस्कृति और जन-विश्वास की नई उड़ान के लिए पूरी तरह तैयार है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *