“अमिता की ऐतिहासिक सफलता देश और प्रदेश के लिए गौरव, बेटियों के लिए बनीं प्रेरणा” — मुख्यमंत्री श्री साय
रायपुर, 16 जुलाई 2026।
छत्तीसगढ़ की बेटी ने एक बार फिर दुनिया के सबसे ऊंचे शिखर पर राज्य की सफलता का झंडा गाड़ दिया है। जांजगीर-चांपा जिले की होनहार पर्वतारोही सुश्री अमिता श्रीवास ने समुद्र तल से 8,848.86 मीटर ऊंची दुनिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट को फतह कर इतिहास रच दिया है। इस अभूतपूर्व उपलब्धि के बाद अमिता श्रीवास ने मुख्यमंत्री निवास में मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय से सौजन्य मुलाकात की। मुख्यमंत्री ने अमिता को इस ऐतिहासिक कामयाबी के लिए बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। इस गौरवमयी अवसर पर विधायक श्रीमती गोमती साय भी विशेष रूप से उपस्थित रहीं।

साहस और संकल्प की जीती-जागती मिसाल: मुख्यमंत्री
मुलाकात के दौरान मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने अमिता के जज्बे की जमकर सराहना की। उन्होंने कहा:
”अमिता श्रीवास ने अपने अदम्य साहस, कठिन अनुशासन और अटूट संकल्प के बल पर एवरेस्ट पर तिरंगा लहराया है। उन्होंने न केवल छत्तीसगढ़ बल्कि पूरे देश का मान बढ़ाया है। उनकी यह सफलता इस बात का प्रमाण है कि यदि लक्ष्य के प्रति समर्पण हो, तो सीमित संसाधनों और विपरीत परिस्थितियों में भी दुनिया की किसी भी चुनौती को पार किया जा सकता है।”
मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि अमिता की यह ऐतिहासिक सफलता प्रदेश के युवाओं और विशेषकर बेटियों के लिए प्रेरणा का एक सशक्त माध्यम बनेगी।
22 मई को रचा था इतिहास
गौरतलब है कि जांजगीर-चांपा की रहने वाली अमिता श्रीवास ने 22 मई को दुनिया की सबसे दुर्गम और ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट (8,848.86 मीटर) पर सफलतापूर्वक कदम रखा था। हाड़ कपा देने वाली ठंड और बेहद कम ऑक्सीजन के बीच अमिता ने हार नहीं मानी और शिखर पर पहुंचकर भारत का तिरंगा और छत्तीसगढ़ का मान ऊंचा किया।
Highlights
- ऐतिहासिक उपलब्धि: जांजगीर-चांपा की अमिता श्रीवास ने 22 मई को दुनिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट फतह की।
- सीएम से मुलाकात: मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने अमिता को शॉल-श्रीफल और स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया।
- प्रेरणा स्रोत: मुख्यमंत्री ने अमिता की सफलता को छत्तीसगढ़ की बेटियों के लिए एक नया मील का पत्थर बताया।
- गरिमामयी उपस्थिति: मुलाकात के दौरान विधायक श्रीमती गोमती साय भी रहीं मौजूद।
अमिता की इस कामयाबी से पूरे प्रदेश में जश्न का माहौल है और खेल व साहसिक कला जगत से जुड़े लोग इसे छत्तीसगढ़ के इतिहास का एक सुनहरा पन्ना मान रहे हैं।
