राज्यपाल रमेन डेका और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने निभाई ‘छेरा-पहरा’ की पारंपरिक रस्म, सोने की झाड़ू से बुहारी राह
CM साय ने की कामना: ‘प्रदेश में हो उत्तम वर्षा, किसानों के घरों में आए समृद्धि और खुशहाली’

रायपुर, 16 जुलाई।
राजधानी के गायत्री नगर स्थित भगवान श्री जगन्नाथ मंदिर में आज आस्था, लोक-संस्कृति और सामाजिक समरसता का जीवंत महापर्व ‘रथयात्रा’ पूरे वैभव और हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। ओडिशा की विश्वप्रसिद्ध पुरी रथयात्रा की तर्ज पर आयोजित इस भव्य महोत्सव में राज्यपाल श्री रमेन डेका और मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने विशेष रूप से शिरकत की। दोनों दिग्गजों ने महाप्रभु जगन्नाथ, भ्राता बलभद्र और देवी सुभद्रा की विधिवत पूजा-अर्चना की और सदियों पुरानी ‘छेरा-पहरा’ की रस्म निभाकर रथयात्रा का शुभारंभ किया। इस दौरान पूरा मंदिर परिसर जय जगन्नाथ के उद्घोष, शंखध्वनि और वैदिक मंत्रोच्चार से गुंजायमान रहा।

सोने की झाड़ू से साफ किया रथमार्ग, दिया समानता का संदेश
इस महापर्व का सबसे मुख्य और ऐतिहासिक आकर्षण ‘छेरा-पहरा’ की रस्म रही। राज्यपाल श्री रमेन डेका और मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने पारंपरिक रीति-रिवाजों का पालन करते हुए सोने की झाड़ू से रथमार्ग की सफाई (प्रतीकात्मक शुद्धिकरण) की।

क्यों खास है यह रस्म?
छेरा-पहरा की यह परंपरा सदियों से संदेश देती आ रही है कि भगवान के दरबार में न कोई राजा है, न कोई रंक। महाप्रभु के सामने सभी समान हैं और ‘सेवा’ ही संसार का सर्वोच्च धर्म है। इस रस्म के बाद महाप्रभु की दिव्य प्रतिमाओं को पूरी श्रद्धा के साथ विशाल रथ पर विराजित किया गया।
भगवान जगन्नाथ हैं अन्नदाता के रक्षक: मुख्यमंत्री साय
रथयात्रा के पावन अवसर पर प्रदेशवासियों को बधाई देते हुए मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने कहा:
”भगवान श्री जगन्नाथ सिर्फ आस्था के केंद्र नहीं हैं, बल्कि वे हमारे किसानों के आराध्य और अन्नदाता के रक्षक हैं। उनकी कृपा से ही समय पर मानसून आता है, खेतों में हरियाली छाती है, और धान की बालियों में दूध भरता है। मैंने महाप्रभु से प्रार्थना की है कि इस वर्ष छत्तीसगढ़ में भरपूर वर्षा हो, किसानों की मेहनत सफल हो और हमारा प्रदेश निरंतर प्रगति के पथ पर अग्रसर रहे।”
मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि रथयात्रा जैसे सांस्कृतिक आयोजन समाज में बिखराव को रोकते हैं और आपसी सद्भाव, एकता व सामूहिक चेतना को नई ऊर्जा प्रदान करते हैं। यह सनातन संस्कृति और जनभागीदारी का सबसे बड़ा उदाहरण है।

छत्तीसगढ़ और उत्कल संस्कृति का मजबूत सेतु
ओडिशा का पड़ोसी राज्य होने के कारण छत्तीसगढ़ में भगवान जगन्नाथ के प्रति गहरी अगाध श्रद्धा है। गायत्री नगर का यह आयोजन दक्षिण कोसल (छत्तीसगढ़) और उत्कल (ओडिशा) की महान सांस्कृतिक परंपराओं के बीच एक मजबूत और अटूट सेतु का काम करता है। महाप्रभु के रथ की एक झलक पाने और रस्सी खींचकर पुण्य कमाने के लिए सुबह से ही हजारों श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा।
गरमामयी उपस्थिति:
इस भव्य धार्मिक और सांस्कृतिक उत्सव के दौरान सांसद श्री बृजमोहन अग्रवाल, स्थानीय विधायक श्री पुरंदर मिश्रा समेत विभिन्न निगम-मंडलों व आयोगों के अध्यक्ष, वरिष्ठ जनप्रतिनिधि, धार्मिक-सामाजिक संगठनों के पदाधिकारी और भारी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
