सजा नहीं, सुधार की नई इबारत: रायपुर सेंट्रल जेल में ‘निश्चय’ से आत्मनिर्भरता की ओर महिला बंदी

चारदीवारी के भीतर महकी अचार और मसालों की खुशबू; 60 महिला बंदियों ने थामा स्वावलंबन का दामन, ‘आस्था गृह उद्योग’ से बदली तकदीर

रायपुर, 17 जुलाई:
केंद्रीय जेल रायपुर की चारदीवारी अब सिर्फ सजा काटने का ठिकाना नहीं, बल्कि सकारात्मक बदलाव और आत्म-निर्भरता की एक नई प्रयोगशाला बन चुकी है। जेल प्रशासन द्वारा संचालित ‘निश्चय कार्यक्रम’ के तहत महिला बंदियों के सर्वांगीण सुधार और समाज की मुख्यधारा में उनके सम्मानजनक पुनर्वास के लिए एक अनूठी और अनुकरणीय पहल शुरू की गई है। इस खास मुहिम के जरिए महिला बंदी न केवल व्यावसायिक रूप से दक्ष हो रही हैं, बल्कि जेल के भीतर ही उनके लिए रोजगार और आर्थिक आजादी की राह भी आसान हुई है।

हुनर से संवर रहा भविष्य: 60 बंदियों को मिला विशेष प्रशिक्षण

विभिन्न अपराधों के तहत जेल में बंद 60 महिला बंदियों को ‘बेसिक ऑफ पिकल (अचार) एवं मसाला निर्माण’ के व्यावसायिक उत्पादन का विशेष प्रशिक्षण दिया गया है। इस दूरदर्शी प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य बंदियों को इस काबिल बनाना है कि वे रिहाई के बाद समाज में सिर उठाकर जी सकें और स्वयं की व्यावसायिक इकाई स्थापित कर सकें।
प्रशिक्षण के दौरान इन बंदियों को सिर्फ अचार बनाना ही नहीं सिखाया गया, बल्कि आधुनिक बाजार की जरूरतों के अनुरूप निम्नलिखित कड़े पैमानों की व्यावहारिक जानकारियां भी दी गईं:

  • उत्तम गुणवत्ता नियंत्रण (Quality Control)
  • उच्च स्तरीय स्वच्छता और हाइजीन (Sanitation)
  • आकर्षक पैकेजिंग (Packaging)
  • सुरक्षित और वैज्ञानिक भंडारण (Safe Storage)
    प्रशिक्षण पूरा होते ही महिला बंदियों ने जेल के महिला प्रकोष्ठ में ही पूरी ऊर्जा के साथ नियमित रूप से विभिन्न वैरायटियों के स्वादिष्ट अचार का निर्माण शुरू कर दिया है।

‘आस्था गृह उद्योग’ से मिला बाजार; स्वाद के साथ कमाई भी

महिला बंदियों के हाथों से तैयार आम, नींबू, गाजर और लहसुन के चटपटे व हाइजीनिक अचारों की खुशबू अब जेल से बाहर आम जनता तक पहुँच रही है। इन गुणवत्तापूर्ण उत्पादों की सुचारू बिक्री के लिए जेल प्रशासन ने मुकम्मल व्यवस्था की है।
तैयार अचार और मसालों को केंद्रीय जेल परिसर में स्थित ‘आस्था मुंगोडी सेंटर’ (आस्था गृह उद्योग स्टॉल) और जेल कैंटीन के माध्यम से आम नागरिकों के लिए बिक्री हेतु उपलब्ध कराया जा रहा है। सबसे खास बात यह है कि इस बिक्री से होने वाली आय का एक निश्चित हिस्सा सीधे इन महिला बंदियों के बैंक खातों में जमा किया जा रहा है, जिससे वे आज जेल के भीतर रहते हुए भी आर्थिक रूप से सशक्त और आत्मनिर्भर बन रही हैं।

“जेल अब सकारात्मक परिवर्तन का केंद्र”

“जेल केवल दंड देने का स्थान नहीं है, बल्कि यह जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने का एक पवित्र केंद्र है। जेल महानिदेशक श्री हिमांशु गुप्ता के कुशल मार्गदर्शन में संचालित ‘निश्चय कार्यक्रम’ के माध्यम से हम महिला बंदियों को रोजगारपरक कौशल प्रदान कर रहे हैं। यह हुनर उन्हें आज आत्मनिर्भर बनाने के साथ-साथ, कल रिहाई के बाद समाज में सम्मानपूर्वक जीने और आजीविका अर्जित करने में मील का पत्थर साबित होगा। बंदियों के उज्ज्वल भविष्य के लिए ऐसे कौशल विकास कार्यक्रम आगे भी निरंतर जारी रहेंगे।”
श्री योगेश सिंह क्षत्री, अधीक्षक (केंद्रीय जेल, रायपुर)

एक नई सुबह की उम्मीद

रायपुर सेंट्रल जेल की यह पहल इस बात का जीवंत उदाहरण है कि यदि सही दिशा और अवसर मिले, तो अपराध के अंधेरे को हुनर के उजाले से मिटाया जा सकता है। जेल प्रशासन का यह कदम न केवल महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा दे रहा है, बल्कि अपराधियों के प्रति समाज के नजरिए को बदलने में भी एक बड़ी भूमिका निभाएगा।

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