छत्तीसगढ़ में ‘कोनोकार्पस’ पौधों पर पूर्ण प्रतिबंध: पर्यावरण और सेहत के लिए बड़ा खतरा घोषित, राजपत्र में अधिसूचना जारी

बड़ी कार्रवाई: सूबे में नए वृक्षारोपण, प्रचार-प्रसार और बिक्री पर तत्काल रोक, अब देशी प्रजातियों से बदले जाएंगे पुराने पौधे

विशेष संवाददाता,रायपुर 19 जुलाई।
छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य की जैव विविधता, पारिस्थितिकी तंत्र और जनस्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए एक बेहद कड़ा और ऐतिहासिक कदम उठाया है। आवास एवं पर्यावरण विभाग ने पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 की धारा 5 के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए प्रदेश में ‘कोनोकार्पस’ (Conocarpus) प्रजाति के नए वृक्षारोपण पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया है। राज्यपाल के नाम से जारी इस राजपत्रित अधिसूचना को तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है।
अब राज्य की भौगोलिक सीमा के भीतर कोई भी व्यक्ति, स्थानीय प्राधिकारी, शासकीय-अर्द्धशासकीय विभाग या निजी संस्था इस आक्रामक विदेशी पौधे का रोपण नहीं कर सकेगी।

## सुप्रीम कोर्ट की समिति की रिपोर्ट के बाद जागा प्रशासन

इस कड़े फैसले की पृष्ठभूमि माननीय उच्चतम न्यायालय (सुप्रीम कोर्ट) की केंद्रीय सशक्त समिति (CEC) की उस रिपोर्ट पर आधारित है, जो 21 अगस्त, 2025 को “भारत में कोनोकार्पस प्रजातियों से उत्पन्न पर्यावरणीय एवं पारिस्थितिकीय जोखिम” विषय पर प्रस्तुत की गई थी। इस रिपोर्ट में साफ तौर पर यह अभिलेखित किया गया था कि कोनोकार्पस इरेक्टस (Conocarpus erectus) एक अत्यंत आक्रामक वनस्पति प्रजाति है, जो स्थानीय जैव विविधता, प्राकृतिक पारिस्थितिक तंत्र, भू-जल संसाधनों तथा जनस्वास्थ्य पर बेहद प्रतिकूल प्रभाव डाल रही है।

## जनहित में प्रक्रिया को किया गया बाईपास

मामले की गंभीरता और तात्कालिकता को देखते हुए सरकार ने असाधारण कदम उठाया है। राजपत्र में उल्लेख है कि पर्यावरण के संरक्षण के हित में तत्काल निवारक कार्रवाई आवश्यक थी, इसलिए पर्यावरण (संरक्षण) नियम, 1986 के नियमों के तहत आपत्तियां एवं अभ्यावेदन आमंत्रित किए जाने की सामान्य प्रक्रिया को जनहित में छोड़ दिया गया है (Dispensed with) ताकि फैसले में कोई देरी न हो।

### अधिसूचना के मुख्य बिंदु और कड़े निर्देश:

  • पूर्ण प्रतिबंध: छत्तीसगढ़ की सीमा के भीतर कोई भी व्यक्ति, स्थानीय निकाय (नगर निगम/पालिका), सरकारी या निजी विभाग कोनोकार्पस का नया रोपण नहीं करेगा और न ही कराएगा।
  • बिक्री और प्रचार पर रोक: इस प्रजाति के पौधों के प्रचार-प्रसार तथा नर्सरियों में इसकी बिक्री पर पूरी तरह रोक लगाने की अनुशंसा की गई है।
  • चरणबद्ध तरीके से हटाए जाएंगे पुराने पौधे: वर्तमान में जहां भी कोनोकार्पस के पौधे लगे हुए हैं, उन्हें चरणबद्ध (Phased manner) तरीके से हटाया जाएगा और उनकी जगह उपयुक्त देशी प्रजातियों के पौधे प्रतिस्थापित किए जाएंगे।

> क्यों खतरनाक है कोनोकार्पस? (बॉक्स आइटम)

पर्यावरणविदों के अनुसार, कोनोकार्पस एक विदेशी प्रजाति है जो तेजी से फैलती है। यह आसपास के भू-जल (Groundwater) स्तर को तेजी से सोखकर जमीन को बंजर बनाती है। इसके अलावा, इसके परागकणों (Pollen grains) से इंसानों में सांस की गंभीर बीमारियां, अस्थमा, सर्दी और एलर्जी का खतरा अत्यधिक बढ़ जाता है। यही कारण है कि इसे स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र का दुश्मन माना गया है।

### विशेष सचिव के हस्ताक्षर से आदेश जारी

महानदी भवन, नवा रायपुर अटल नगर से जारी इस अधिसूचना (क्रमांक GENCOR/11917/2026-आवास) को छत्तीसगढ़ के राज्यपाल के नाम से और आदेशानुसार विशेष सचिव देवेन्द्र सिंह भारद्वाज द्वारा जारी किया गया है। सरकार के इस फैसले से अब शहरों के सौंदर्यीकरण के नाम पर अंधाधुंध लगाए जा रहे इन विदेशी और नुकसानदेह पौधों पर पूरी तरह लगाम लग जाएगी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *