बस्तर की बी.एससी. एग्री. ग्रेजुएट ग्रेसी दुग्गा ने लिखा सफलता का नया अध्याय: 1.12 करोड़ के प्रोजेक्ट से खड़ी की आधुनिक सूकर फार्मिंग

नेशनल लाइवस्टॉक मिशन से मिली 30 लाख की सब्सिडी; 400 से अधिक सूकरों के साथ स्वरोजगार की बनाई नई मिसाल

रायपुर / जगदलपुर:
नौकरी की होड़ से अलग हटकर खुद का उद्यम शुरू करने का जज्बा हो, तो ग्रामीण अंचल में भी सफलता की नई इबारत लिखी जा सकती है। इसे सच कर दिखाया है बस्तर जिले के बकावंड विकासखंड स्थित किंजोली गांव की निवासी ग्रेसी दुग्गा ने। बी.एससी. एग्रीकल्चर की पढ़ाई पूरी करने के बाद पारंपरिक नौकरियों के पीछे भागने के बजाय ग्रेसी ने आधुनिक पशुपालन को अपनी आजीविका का जरिया बनाया और आज 400 से अधिक सूकरों के साथ एक सफल महिला उद्यमी के रूप में उभरकर सामने आई हैं।

🎓 उत्तराखंड से पढ़ाई, बस्तर में खड़ा किया साम्राज्य

ग्रेसी दुग्गा ने वर्ष 2023 में देहरादून (उत्तराखंड) से बी.एससी. एग्रीकल्चर की डिग्री हासिल की। उच्च शिक्षा के बाद उन्होंने बस्तर में व्यावसायिक सूकरपालन की अपार संभावनाओं को पहचाना। स्थानीय बाजार में बढ़ती मांग और प्रतिस्पर्धियों की कमी को देखते हुए उन्होंने पशु चिकित्सा विभाग के सहयोग से 1 करोड़ 12 लाख 10 हजार रुपये की महत्वाकांक्षी योजना तैयार की।

💰 30 लाख की सरकारी सब्सिडी ने दिए पंख

केंद्र सरकार की ‘नेशनल लाइवस्टॉक मिशन’ योजना के तहत अनुसूचित जनजाति वर्ग से पहली बार आवेदन करने पर ग्रेसी को 30 लाख रुपये की सब्सिडी स्वीकृत हुई।

“यदि सरकार से यह अनुदान न मिलता, तो मैं केवल 20-25 सूकरों के साथ बहुत छोटे स्तर पर ही काम शुरू कर पाती। शासन के सहयोग से मुझे आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ बड़ा फार्म खोलने का अवसर मिला।”
ग्रेसी दुग्गा, महिला उद्यमी

🔬 वैज्ञानिक प्रबंधन और तमिलनाडु से लाई गई उन्नत नस्ल

मई 2025 में 110 (100 मादा और 10 नर) उन्नत नस्ल के सूकरों के साथ तमिलनाडु से शुरुआत करने वाले इस फार्म में वैज्ञानिक पद्धतियों का विशेष ध्यान रखा गया। नियमित टीकाकरण, पोषण प्रबंधन और पशु चिकित्सा विशेषज्ञों के मार्गदर्शन का नतीजा यह रहा कि जून 2026 तक फार्म में 202 वयस्क सूकर और 206 पिगलेट्स तैयार हो गए। वर्तमान में फार्म में कुल सूकरों की संख्या 400 के पार पहुँच चुकी है।

📈 पहली ही बिक्री से 3.90 लाख रुपये की कमाई

व्यावसायिक बिक्री के पहले ही चरण में ग्रेसी ने 65 पिगलेट्स को 6,000 रुपये प्रति पिगलेट की दर से बेचकर 3 लाख 90 हजार रुपये का राजस्व प्राप्त किया है। उनके फार्म से रायपुर और स्थानीय बाजारों में पिगलेट्स की नियमित आपूर्ति की जा रही है।

🌟 बस्तर के शिक्षित युवाओं के लिए बनीं प्रेरणास्रोत

ग्रेसी दुग्गा का यह सफल स्टार्टअप बस्तर के युवाओं को पारंपरिक कृषि एवं पशुपालन आधारित आधुनिक व्यवसायों की ओर आकर्षित कर रहा है। पशु चिकित्सा विभाग के तकनीकी मार्गदर्शन और दृढ़ इच्छाशक्ति के बल पर उन्होंने यह साबित कर दिया है कि सही जानकारी और सरकारी योजनाओं के समन्वय से ग्रामीण भारत में भी करोड़ों का टर्नओवर खड़ा किया जा सकता है।
रिपोर्ट: धनंजय राठौर, संयुक्त संचालक
जनसंपर्क संचालनालय, रायपुर (छत्तीसगढ़)

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